धनतेरस क्यों मनाया जाता है और उस दिन क्या-क्या ख़रीदे


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दोस्तों बहुत जल्द ही हिंदुस्तान का एक प्रमुख पर्व (दीपावली) आने वाला है। लेकिन इस पर्व के ठीक एक या दो दिन पहले, हम धनतेरस के पर्व को मनाते है। और उस दिन हम सभी कुछ न कुछ जरूर खरीदते है। क्या आप जानते है की यह दिन पर्व के रूप में क्यों मनाया जाता है या इस पर्व को मनाने के पीछे क्या कारण है। आइये जानते है। ……….

उत्तरी भारत में कार्तिक कूष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि के दिन धनतेरस का पर्व मनाया जाता है। धन्वन्तरि के आलावा ,इस दिन देवी लक्ष्मी और धन के देवता कुबेर की पूजा करने की भी मान्यता है।

वैसे इस पर्व को मनाने के पीछे बहुत सारी कथाये प्रचलित है,पर हमजो आज आपको बताने जा रहे है वो सबसे अधिक प्रचलित है। एक बार की बात है जब भगवन विष्णु ने मिर्त्युलोक का भ्रमण करने की सोच बनायीं। तभी माता लक्ष्मी ने कहा की वो भी उनके साथ जाना चाहती है। इसपर ,भगवन विष्णु ने प्रस्ताव रखा की अगर वो उनकी सभी बातें मानेंगी तब वो उनको भी अपने साथ लेकर जा सकते है। इसपर माता लक्ष्मी  ने हामी भर दी। भगवन विष्णु ने उनको अपने साथ पृथ्वीलोक लेकर गए।

 

कुछ दूर चलने के बाद भगवन विष्णु ने माता लक्ष्मी को एक स्थान पर रुकने के लिए कहा तथा वे बोले की मैं दछिण दिशा की ओर जा रहा हूँ और मैं जब तक न आऊँ आप यही पर रुकी रहना। और ऐसा कहने के बाद वो दक्षिण  दिशा की ओर चले गए तथा माता लक्ष्मी उनकी प्रतीक्षा करने लगी। कुछ देर बीतने के बाद जब वो नहीं आये तब माता लक्ष्मी ने उस दिशा की ओर न जाने का वादा  तोड़ दिया तथा उसी ओर जाने लगी।

कुछ देर चलने के बाद उन्हें एक बेहत आकर्षक सरसों की खेत दिखाई पड़ी। उन्होंने  बिना सोचे उस सरसों के खेत से सरसों के फूलों को तोड़कर अपने बालों में लगा लिया। और फिर दछिण दिशा की और चलना प्रारम्भ कर दिया। कुछ दूर जाने के बाद उन्हें एक गन्ना का खेत दिखाई दिया।उन्होंने उस गन्ने के खेत से गन्ने तोड़कर उसका रस चूसने लगी। तभी भगवन विष्णु उधर से आ रहे थे।लक्ष्मी जी को इधर देखकर  वे बहुत क्रोधित हुए तथा उन्हें श्राप दिया की जिस गरीब किसान के खेत से तुमने गन्ने चुराए है तुम उसके घर पर १२ वर्ष तक उसकी सेवा करोगी।

तथा वे अकेले ही चले गए। एक दिन लक्ष्मीजी ने उस किसान की पत्नी से कहा कि तुम स्नान कर पहले मेरी बनाई गई इस देवी लक्ष्मी का पूजन करो, फिर रसोई बनाना, तब तुम जो मांगोगी मिलेगा।किसान की पत्नी ने ऐसा ही किया।पूजा के प्रभाव और लक्ष्मी जी की कृपा से किसान का घर दूसरे ही दिन  अन्न, धन, रत्न, स्वर्ण आदि से भर गया। लक्ष्मी ने किसान को धन-धान्य से पूर्ण कर दिया। किसान के 12 वर्ष बड़े आनंद से कट गए। फिर 12 वर्ष के बाद लक्ष्मीजी जाने के लिए तैयार हुईं।विष्णुजी लक्ष्मीजी को लेने आए तो किसान ने उन्हें भेजने से इंकार कर दिया। तब भगवान ने किसान से कहा कि इन्हें कौन जाने देता है ,यह तो चंचला हैं, कहीं नहीं ठहरतीं। इनको बड़े-बड़े नहीं रोक सके। इनको मेरा शाप था इसलिए 12 वर्ष से तुम्हारी सेवा कर रही थीं। तुम्हारी 12 वर्ष सेवा का समय पूरा हो चुका है। किसान हठपूर्वक बोला कि नहीं अब मैं लक्ष्मीजी को नहीं जाने दूंगा।ऐसा करने पर लक्ष्मी जी ने किसान से कहा की मैं जैसा बोलती हूँ तुम वैसा करो। कल तेरस है। तुम कल घर को लीप-पोतकर स्वच्छ रखना । रात्रि में घी का दीपक जलाकर रखना और शाम को मेरा पूजन करना और एक तांबे के कलश में रुपए भरकर मेरे लिए रखना, मैं उस कलश में निवास करूंगी। किंतु लक्ष्मी जी ने कहा की पूजा के समय मैं तुम्हें दिखाई नहीं दूंगी।

उन्होंने किसान से कहा की सिर्फ एक दिन की पूजा के कारण मैं वर्ष भर तुम्हारे घर में निवास करूंगी।  यह कहकर वह दीपों के प्रकाश के साथ दसों दिशाओं में फैल गईं। अगले दिन किसान ने लक्ष्मीजी के कथानुसार पूजन किया। उसका घर धन-धान्य तथा सुख समृद्धि  से पूर्ण हो गया। इसी वजह से हर वर्ष तेरस के दिन लक्ष्मीजी की पूजा होने लगी।और यह दिन धनतेरस के नाम से जाना जाने लगा।कहा जाता है कि भगवान धन्वंतरि अपने हाथ में एक विशेष स्वर्ण कलश धारण करते हैं, जो धन, स्वास्थ्य, भाग्य का साथ देता है। इसलिए, सम्मान और कृतज्ञता के निशान के रूप में, यह सलाह दी जाती है कि उपासक एक बर्तन खरीदते हैं, जो उत्सव के मौसम में समृद्धि की शुरुआत को चिह्नित करने के लिए चावल या कुछ मीठा से भरा हो सकता है।उपासक देवी लक्ष्मी के सम्मान के रूप में कुछ सोने के सिक्के या आभूषण भी खरीद सकते हैं, जिन्हें घर में धन और लक्ष्मी लाने के लिए जाना जाता है और इसलिए, यह  शुभ माना जाता है।

कुछ लोग झाड़ू भी खरीदते हैं, जिसे घर से किसी भी प्रकार की नकारात्मक ऊर्जा को बाहर निकालने और देवी के घर आमंत्रित करने के लिए बहुत प्रतीकात्मक माना जाता है।

कुबेर और लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए लोग किसी भी तरह की बड़ी खरीदारी करने के लिए धनतेरस को बहुत अच्छा दिन मानते हैं। छात्रों को यह भी सलाह दी जाती है कि वे अपनी पुस्तकों की पूजा करें या कलम की तरह किसी भी तरह का उपकरण खरीदें, जो उनके करियर के लिए फायदेमंद होगा।धन्यवाद। ..


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