Chanakya Niti: इन 4 लोगों को जीवन में एक बार जरूर परखें, वरना धोखा मिलने पर पछताओगे

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आचार्य चाणक्य अपने जमाने के सबसे बड़े विद्वान थे। उन्होंने अपने जीवन के अनुभवों और सोच विचार के आधार पर चाणक्य नीति बनाई है। कुछ लोगों को चाणक्य की यह नीतियां थोड़ी कठोर लग सकती है, लेकिन देखा जाए तो आज के कलयुग के जमाने में इन नीतियों को प्रैक्टिकल बेस पर नजरअंदाज करना मुश्किल है। ये कहीं न कहीं काम आ ही जाती है।

ऐसे में आज हम आपको चाणक्य नीति के एक विशेष कथन के बारे में बताने जा रहे हैं। इस कथन में आचार्य चाणक्य ये बता रहे हैं कि व्यक्ति को जीवन में चार लोगों को जरूर परखना चाहिए। उनकी ये परख कैसे और किस स्थिति में करनी चाहिए इसका भी विवरण उन्होंने अपनी कथनी में दिया है। ये कथन इस प्रकार है –

‘सेवक को तब परखें जब वह काम ना कर रहा हो, रिश्तेदार को किसी कठिनाई में, मित्र को संकट में और पत्नी को घोर विपत्ति में।’ – आचार्य चाणक्य

आचार्य चाणक्य का मानना है कि एक सेवक (नौकर) की असली परख तभी होती है जब वह काम ना कर रहा हो। इस समय उसका मन शांत रहता है और आपको उसका असली चेहरा नजर आ जाता है। आजकल कई लोग सेवक को घर के सदस्य की तरह मानते हैं। उन्हें पूरा मान सम्मान देते हैं और आँख बंद कर भरोसा भी कर लेते हैं। ऐसे में सेवक की परख कर लेना सही होता है।

रिश्तेदारों की असली परख तभी होती है जब आप कठिनाई में होते हैं। आपके अच्छे दिनों का हिस्सा बनने को रिश्तेदार खुशी खुशी खुद से ही आ जाते हैं। लेकिन जब आप कठिनाई का सामना कर रहे हो और तब यदि कोई रिश्तेदार आपकी मदद के लिए आए तो वह उसकी असली परख होगी।

जब आप खुश होते हैं, आपके साथ कुछ अच्छा हो रहा होता है तो कई दोस्त उस खुशी में शामिल होने आ जाते है। लेकिन एक सच्चा दोस्त वही होता है जो संकट के समय आपका साथ दे।

शादी के समय पत्नी के साथ हम सात जन्म साथ रहने की कसम खाते हैं। यह वादा करते हैं कि हर सुख दुख में एक दूसरे का साथ देंगे। ऐसे में आचार्य चाणक्य का कहना है कि पत्नी की असली परख तब करनी चाहिए जब आप घोर विपत्ति में हो। क्योंकि एक सुखी, धनी और अच्छे समय से गुजर रहे पति का साथ कोई भी पत्नी दे देगी, लेकिन आपके घोर संकट के समय सिर्फ पतिव्रता और आप से सच्चा प्रेम करने वाली पत्नी ही साथ देगी।