कांग्रेस के नक़्शे कदम पर शिवसेना बनी सेक्युलर, अब उसे अच्छे नहीं लगते हैं हिंदुत्व से जुडी बातें

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महाराष्ट्र राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी द्वारा मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को लेखे गए पत्र का मुद्दा अब शिवसेना ने अपने मुखपत्र सामना में उठाया है। मुखपत्र सामना में शिवसेना ने लिखा है कि राज्यपाल के पद पर आसीन व्यक्ति को कैसा व्यवहार नहीं करना चाहिए, ये राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने दिखा दिया है। राज्यपाल ने आ बैल मुझे मार जैसा व्यवहार किया है। लेकिन वे ये कैसे भूल गए कि यहां बैल नहीं बल्कि शेर है। राज्य के मंदिरों को खोलने के लिए बीेजेपी  आंदोलन कर रही है। उस राजनीतिक आंदोलन में राज्यपाल के हस्तक्षेप की जरूरत नहीं थी। जब ये आंदोलन शुरू था तब टाइमिंग साधते हुए माननीय राज्यपाल ने मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को एक पत्र लिखा। उन्होंने जो पत्र लिखा वो मुख्यमंत्री तक पहुंचने से पहले ही अखबारों तक पहुंच गया।

आपको बता दें कि इन दिनों महाराष्ट्र में बीजेपी मंदिरों को खोलने का आंदलोन कर रही है। इसी आंदलोन को लेकर राज्यपाल ने ये पत्र लिखा था।

बताया बीजेपी का नेता 

सामना में लिखे लेख में कहा गया कि ये कभी संघ के प्रचारक या बीजेपी के नेता रहे भी होंगे। लेकिन आज ये महाराष्ट्र के राज्यपाल हैं। लगता है वे इस बात को अपनी सुविधानुसार भूल गए हैं। महाराष्ट्र बीजेपी के नेता रोज सुबह सरकार की बदनामी करने की मुहिम शुरू करते हैं। ये समझा जा सकता है। लेकिन उस मुहिम का कीचड़ राज्यपाल अपने ऊपर क्यों उड़वा लेते हैं? बीजेपी महाराष्ट्र में सत्ता गंवा चुकी है। ये बड़ी पीड़ा है, लेकिन इससे हो रहे पेटदर्द पर राज्यपाल द्वारा हमेशा लेप लगाने में कोई अर्थ नहीं। ये पीड़ा आगामी चार साल तो रहने ही वाली है।

इस लेख में कहा गया कि राज्य में बार और रेस्तरां शुरू हो गए हैं। लेकिन प्रार्थना स्थल क्यों बंद हैं? आपको मंदिरों को बंद रखने के लिए कोई दैवीय संकेत मिल रहा है क्या? या आप अचानक सेक्युलर (धर्मनिरपेक्ष) हो गए हैं? ऐसा सवाल राज्यपाल ने पूछा। ठाकरे ने कड़े शब्दों में कहा कि राज्यपाल महोदय, संविधान के अनुसार आपने राज्यपाल पद की शपथ ली है। आपको देश का संविधान व धर्मनिरपेक्षता स्वीकार नहीं है क्या? और आपको हमारे हिंदुत्व पर कुछ बोलने की आवश्यकता नहीं है। मेरे हिंदुत्ववाद को आपके प्रमाण पत्र की आवश्यकता नहीं है।

गौरतलब है कि भगत सिंह कोश्यारी ने मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को एक पत्र लिखा था। जिसमें राज्य के मंदिरों को खोलने की बात कही थी। अपने इस पत्र में राज्यपाल ने लिखा था कि कोरोना के कारण बंद किए गए मंदिरों को अब खोल देना चाहिए। कई राज्यों में मंदिरों को खोल दिया गया है और वहां पर कोरोना के केस भी नहीं बढ़ें हैं। अपने इस पत्र में राज्यपाल ने ठाकरे से सवाल पूछते हुए लिखा था कि क्या अब आप अचानक सेक्युलर हो गए हैं? राज्यपाल के इस पत्र का कड़ा जवाब ठाकरे ने पत्र के जरिए ही दिया था और अब सामाना में भी राज्यपाल द्वारा लिखे गए पत्र का मुद्दा उठाया गया।