Shardiya Navratri 2020: इस नवरात्रि अपनी कामना के अनुसार करें इन मंत्रों का जाप

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नई दिल्ली। Shardiya Navratri 2020. इस साल के शारदीय नवरात्रि शुरु होने में ज्यादा दिन नहीं रहे है। देशभर में नवरात्रि को लेकर तैयारियां चल रही है। इस मौके पर मंत्र का जाप अधिक महत्व रखता है। इस खबर में हम आप को ऐसे मंत्र के बारे में बता रहे है कि जिनका जाप कर सकते है, मार्कण्डेय पुराण के अंतर्गत देवी माहात्म्य में श्लोक, अर्धश्लोक और उवाच आदि मिलाकर कुल 700 मंत्र हैं। यह माहात्म्य दुर्गासप्तशती के नाम से प्रसिद्ध है। नवरात्रि में अनेक साधक और भक्त देवी को प्रसन्न करने के लिए दुर्गा सप्तशती का पाठ अवश्य करते हैं। दुर्गा सप्तशती जीवन के चारों पुरुषार्थो धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष प्रदान करने वाली कही गई है।

इस नवरात्रि अपनी कामना के अनुसार करें देवी के मंत्रों का जाप
जो मनुष्य जिस भाव और जिस कामना से श्रद्धा एवं विधि के अनुसार सप्तशती का पारायण करता है, उसे उसी भावना और कामना के अनुसार फल सिद्धि प्राप्त होती है। दुर्गा सप्तशती का प्रत्येक मंत्र अपने आप में सिद्ध है, लेकिन इसका सही विधि और पूर्ण श्रद्धा के साथ पाठ करना चाहिए। यहां हम नौ ऐसे मंत्र प्रस्तुत कर रहे हैं, जो आपको शीघ्र फल प्रदान करके आपकी सारी मनोकामनाएं पूर्ण करेंगे। इनमें से आप अपनी कामना के अनुसार मंत्रों का चयन कर सकते हैं। इनका पाठ 17 अक्टूबर 2020 से प्रारंभ हो रही शारदीय नवरात्रि के नौ दिनों तक करें। फिर स्वयं देखें चमत्कार।

विपत्ति नाश के लिए

शरणागतदीनार्त परित्राण परायणे ।
सर्वस्यार्तिहरे देवी नारायणी नमोस्तु ते ।।
भय नाश के लिए

सर्वस्वरूपे सर्वेशे सर्वशक्तिसमन्विते ।
भयेभ्यस्त्राहि नो देवी दुर्गे देवी नमोस्तु ते ।।
रोग नाश के लिए

रोगानशेषानपहंसि तुष्टा रूष्टा तु कामान् सकलानभीष्टान् ।
त्वामाश्रितानां न विपन्नराणां त्वामाश्रिता ह्याश्रयतां प्रयान्ति ।।
आरोग्य और सौभाग्य की प्राप्ति के लिए

देहि सौभाग्यमारोग्यं देहि मे परमं सुखम् ।
रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि ।।
सुलक्षणा पत्नी की प्राप्ति के लिए

पत्नीं मनोरमां देहि मनोवृत्तानुसारिणीम् ।
तारिणीं दुर्गसंसारसागरस्य कुलोद्भवाम् ।।
कार्य बाधा दूर करने के लिए

सर्वाबाधाप्रशमनं त्रैलोक्यस्याखिलेश्वरि ।
एवमेव त्वया कार्यमस्मद्वैरिविनाशनम् ।।
दारिद्रय दुख नाश के लिए

दुर्गे स्मृता हरसि भीतिमशेषजन्तो : स्वस्थै: स्मृता मतिमतीव शुभां ददासि ।
दारिद्रयदुखभयहारिणि का त्वदन्या सर्वोपकारकरणाय सदार्द्रचित्ता ।।
सर्वत्र रक्षा के लिए

शूलेन पाहि नो देवि पाहि खड्गेन चाम्बिके ।
घण्टास्वनेन न: पाहि चापज्यानि:स्वनेन च ।।
धन-संतान की प्राप्ति के लिए

सर्वाबाधाविनिर्मुक्तो धनधान्यसुतान्वित: ।
मनुष्यो मत्प्रसादेन भविष्यति न संशय: ।।
स्वप्न में सिद्धि जानने के लिए

दुर्गे देवि नमस्तुभ्यं सर्वकामार्थसाधिके ।
मम सिद्धिमसिद्धिं वा स्वप्ने र्सव प्रदर्शय ।।
कैसे करें मंत्र की सिद्धि

सबसे पहले साधक अपनी कामना के अनुसार मंत्र का चयन कर लें। एक से अधिक कामनाओं की पूर्ति के लिए अधिक मंत्रों का भी चयन किया जा सकता है।
नवरात्रि में प्रतिपदा से नवमी तक अपने अभीष्ट मंत्र का नियमित एक ही समय पर एक बराबर जाप करें।
कम से कम 9 माला मंत्र प्रतिदिन जाप करें।
देवी दुर्गा की मूर्ति या चित्र के सामने बैठकर तेल का दीपक, सुगंधित धूप लगाकर मंत्र जप करें।
मंत्रों का जाप मानसिक करें तो ज्यादा बेहतर रहेगा। वाचिक अर्थात् जोर-जोर से बोलकर भी कर सकते हैं।
मंत्र जाप के लिए रूद्राक्ष, काली गुंजा या स्फटिक की माला का प्रयोग करें।