त्योहारी सीजन में आम आदमी पर दोहरी मार, थोक महंगाई भी इतनी बढ़ी

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नयी दिल्ली। कोरोना काल में वायरस का दंश झेल रहे आम आदमी पर खुदरा महंगाई के बाद थोक महंगाई भी बढ़ी है। ऐसे में इस साल के फेस्टिव सीजन पर दोहरी मार पड़ने वाली है। सितंबर महीने में भारत में थोक महंगाई सात महीने के उच्च स्तर पर पहुंच गई। सितंबर में थोक महंगाई 1.32 फीसदी दर से बढ़ीं, जो अगस्त में 0.16 फीसदी रही थी। थोक महंगाई में लगातार दूसरे महीने बढ़ोतरी देखने को मिली है। सब्जियों के दाम 36.5 फीसदी बढ़े, वहीं सितंबर में आलू के दाम 107.6 फीसदी बढ़ गए। वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के अनुसार प्रमुख चीजों में खाद्य उत्पादों की कीमतें महीने में सबसे अधिक 6.92 प्रतिशत की दर से बढ़ीं।

लगातार 4 महीने आई थी गिरावट

अगस्त और सितंबर से पहले थोक महंगाई में लगातार महीने निगेटिव ग्रोथ दर्ज की गई थी। थोक मूल्य सूचकांक आधारित (डब्लूपीआई) मुद्रास्फीति अप्रैल में (-)1.57 प्रतिशत, मई में (-)3.37 प्रतिशत, जून में (-)1.81 प्रतिशत और जुलाई में (-)0.25 प्रतिशत रही थी। अगस्त में यह 0.16 प्रतिशत पर थी, जबकि अप्रैल से पहले मार्च में डब्ल्यूपीआई मुद्रास्फीति 0.42 प्रतिशत थी। वहीं सितंबर 2019 में ये 0.33 फीसदी पर थी।

अनाज और दामों के दाम

सितंबर में अनाज की कीमतें कम हुईं। इनमें 3.91 प्रतिशत की नकारात्मक ग्रोथ दर्ज की गई। वहीं दालों की कीमतो में 12.53 प्रतिशत की वृद्धि हुई। एक कैटेगरी के रूप में सब्जियों पर सितंबर में मुद्रास्फीति 36.54 प्रतिशत के उच्च स्तर पर थी, जबकि प्याज में 31.64 प्रतिशत की गिरावट आई। सरकारी आंकड़ों में बताया गया है कि विनिर्मित उत्पादों की कैटेगरी में सितंबर के दौरान मुद्रास्फीति बढ़कर 1.61 प्रतिशत हो गई, जो एक महीने पहले 1.27 प्रतिशत थी।

खुदरा महंगाई कहां पहुंची

इससे पहले देश में खुदरा महंगाई दर सितंबर में बढ़कर 7.34 फीसदी हो गई, जो अगस्त में 6.69 फीसदी थी। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) पर आधारित मुद्रास्फीति अगस्त में 6.69 प्रतिशत थी। पिछले साल सितंबर में यह 3.99 फीसदी थी। यह खुदरा मुद्रास्फीति का जनवरी के बाद सबसे ऊंचा स्तर रहा। अगस्त में 9.05 प्रतिशत की तुलना में खाद्य मुद्रास्फीति सितंबर में 10.68 प्रतिशत दर्ज की गई।