नौकरी छोड़ तीन दोस्तों ने छोटे से तालाब में शुरू की मोती की खेती आज अपने मेहनत और लगन से कर रहे हैं अच्छी कमाई

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इंसान काफ़ी मेहनत से पढ़ाई करता है ताकि अच्छे मार्क्स से डिग्री ले सके जिससे अच्छे जगह पर अच्छे पैकेज पर जॉब कर सके। वहीं कुछ ऐसे युवा भी मिलते हैं जो अच्छी खासी नौकरी छोड़ कृषि के क्षेत्र से जुड़ जाते हैं। हमारी आज की कहानी ऐसे तीन दोस्तों की है जिन्होंने उच्च शिक्षा लेने के बाद भी खेती करने का मन बनाया और आज मोती की खेती कर काफ़ी अच्छी कमाई भी कर रहे हैं।

‘श्वेतांक पाठक’, ‘रोहित पाठक’ और ‘मोहित पाठक’ तीनों दोस्त वाराणसी के चिरईगांव के चौबेपुर क्षेत्र के नारायणपुर के रहने वाले हैं। श्वेतांक ने M.A.& B.Ed, मोहित ने बीएचयू से बीए और रोहित में टेक्निकल फील्ड में उच्च शिक्षा हासिल की है इसके बावजूद भी उन लोगों ने कुछ अलग करने का सोचा और फिर मोती की खेती करने का प्लान बना लिया। इसके अलावा ये तीनो दोस्त मधुमक्खी और बकरी पालन भी करते हैं।

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श्वेतांक पाठक

श्वेतांक ने एमए-बीएड किया है परंतु उनकी रूचि सीप की खेती में आ गई थी। श्वेतांक को सीप की खेती के बारे में ज़्यादा अनुभव नहीं था तो इसे सिखने के लिए इंटरनेट का मदद लिया और इसके बाद ट्रेनिंग भी लिया परिणाम तो वह मोती की खेती में सफल हो चुके हैं और आज 3 गुना लाभ कमा रहे हैं।

मोहित पाठक

पारंपरिक खेती से कुछ अलग करने की चाह रखने वाले मोहित ने ‘बीएचयू’ से ‘B.A.’ किया, इसके बाद दिल्ली गांधी दर्शन से खेती का प्रशिक्षण भी लिया है। प्रशिक्षण के बाद उन्होंने खेती की शुरुआत की। मोहित वाराणसी में मधुमक्खी पालन कर रहे हैं जिसे वह शहद बेचने वाली कंपनियों और औषधालयों को भी शहद बेचते हैं। इसके साथ ही वह बकरी पालन भी करते हैं। अपने इस कार्य में सफल हो चुके मोहित आज दूसरे किसानों को भी प्रशिक्षित कर रहे हैं।

रोहित त्रिपाठी

रोहित एक बड़ी कंपनी के रीजनल हेड की नौकरी कर रहे थें जिसे covid-19 के दौरान छोड़कर वाराणसी वापस आ गए। रोहित अपने मित्र मोहित और श्वेतांक के साथ मिलकर कृषि के कार्य में जुट गए। वह ख़ुद खेती करने के साथ-साथ दूसरों को भी नई तकनीक सीखा रहे हैं।

उनका मानना है कि उन्हें कोविड-19 महामारी से बहुत कुछ नया सीखने को मिला। बीमारी के दौरान परिवेश बिल्कुल बदल गया जहाँ बहुत लोगों की नौकरी चल रही वही इन लोगों ने खेती को आमदनी का नया ज़रिया बनाया उनका उद्देश्य अपने साथ-साथ अन्य लोगों का भला करना भी है और इसके लिए उन्होंने इस साल कम से कम 200 लोगों को रोजगार से जोड़ने का लक्ष्य रखा है।

गांव के लोगों को तकनीक के साथ कृषि सिखाने को लेकर ये लोग अपने गाँव में तो चर्चा के पात्र हैं ही साथ ही साथ सोशल मीडिया पर भी ये तीनों दोस्त ख़ूब चर्चा में है। गौरतलब हो कि उनके इस इनिशिएटिव से यूपी सरकार के मंत्री और विधायक भी काफ़ी खुश हैं और उनके तरीके की काफ़ी तारीफ भी कर रहे हैं।