सूफी संत पीर खुशहाल की चिल्लाहगाह पर चला बुलडोजर, एक्शन के बाद वन विभाग ने लिया कब्जा

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उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में प्रशासन ने सूफी संत के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करते हुए खुशहाल की चिल्लाहगाह पर बुलडोजर चलाया है। मुरैना में पीर ख्वाजा खुशहाल मियां की चिल्लाहगाह पर पिछले 3 दिनों से यह कार्रवाई जारी है। वहीं स्थानीय प्रशासन का इस मामले पर कहना है कि दरअसल यह पूरी कार्रवाई अवैध निर्माण के चलते की गई है। पीर खुशहाल पर की गई इस कार्रवाई के तहत चिल्लाहगाह की पूरी बिल्डिंग को जमीनोंद्दोज कर दिया गया है।

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वहीं इस मामले में प्रबंधन से जुड़े तीन व्यक्तियों सज्जादा साहब, ईरानी मोहतरमा सहित एक अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। फिलहाल आरोपी मौके से फरार बताए जा रहे हैं। बता दें इस पीर खुशहाल के दुनिया भर में लाखों की संख्या में चाहने वाले हैं। इलाहाबाद में भी खुशहाल की कब्र बनाई गई है। 4 साल पहले उनका इंतकाल हो गया था। यह जगह मुरैना ब्लॉक के बिहारगढ़ में स्थित है।

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गौरतलब है कि यह पूरा मामला मुजफ्फरनगर जनपद के थाना भोपा क्षेत्र के गांव का है। यह चिल्लाहगाह 50 साल पुरानी है। प्रशासन द्वारा इस मामले पर की गई कार्रवाई के बाद वहां भारी पुलिस बल को तैनात किया गया है। खबरों के मुताबिक पीर बाबा खुशहाल द्वारा साल 1975 में लगभग 100 बीघा भूमि को 30 वर्षों के लिए लीज पर लिया गया था। उसके बाद अकीदत बंधुओं ने यहां उनके परिवार के लिए रिहाइश मस्जिद और मदरसे का निर्माण करवाया, जो मौजूदा समय में विवाद का हिस्सा है।

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साल 2005 में इसकी लीज खत्म हो गई थी और तब से यह मामला अदालत में चल रहा है। वहीं इस मामले पर पीर खुशहाल की पत्नी नाजिया अफरीदी का कहना है कि यह कार्रवाई पूरी तरह से गलत है और सरकारी तंत्र ने ही उन्हें बुलडोजर से कुचला है। यहां सैकड़ों आश्रम है और साधु संत है। खुशहाल साहब भी एक संत ही है। उन्हें इस जगह आकर काफी लंबी इबादत की थी।

उनकी पत्नी ने कहा कि वह एक मुस्लिम संत है उन्होंने 40 दिन तक बिना कुछ खाए यहां बैठकर इबादत की थी। ऐसे में सरकार का यह फैसला पूरी तरह से गलत है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री खुद एक संत हैं और एक संत के राज में दूसरे संत पर अत्याचार हो रहा है। यह गलत है सरकार को इस मामले पर योचना चाहिए।

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फिलहाल इस पूरे मामले पर जांच पड़ताल जारी है। वहीं इस मामले पर जिलाधिकारी प्रशासन अमित कुमार का कहना है कि उच्च न्यायालय के आदेश पर यह कार्रवाई की गई है, जिसमें परिसर में बनी मस्जिद और मजार वाले स्थान को कार्रवाई से अलग किया गया है। अदालत के आदेश के तहत केवल रेट टेपिंग वाले स्थान पर ही कार्रवाई की जा रही है।