बाईं किडनी में थी पथरी, डॉक्टर ने तो दाईं किडनी ही निकाल दी; फिर बोले- गलती हो गई, अब क्या करे

0
8

कंकड़बाग के एक डॉक्टर की लापरवाही से मरीज की जान खतरे में है। मामला बुधवार का है। मरीज की बाईं किडनी में पथरी के ऑपरेशन के दौरान डॉक्‍टर ने पथरी के बदले दाईं किडनी ही निकाल दिया। ऑपरेशन के बाद जब अस्‍पताल ने स्‍वजनों को किडनी सौंपा तो हंगामा हो गया।

खबर विस्तार

Image Source: Social Media

बेगूसराय के मरीज मो. मुजाहिद किडनी में स्टोन का इलाज कराने डिफेंस काॅलोनी, कंकड़बाग स्थित बीजीबी हॉस्पिटल पहुंचे। हॉस्पिटल डॉ. पीके जैन का है और वे जनरल सर्जन हैं। जांच में यह बात आई कि मरीज की बाईं किडनी में स्टोन है।

स्वजनों की सहमति पर ऑपरेशन हो गया, लेकिन इसके बाद तकलीफ बढ़ गई। पता चला कि चिकित्सक ने बाईं की बजाय दाईं किडनी का ऑपरेशन कर उसे निकाल दिया है। अंत में जब मामला बिगड़ गया और मरीज की जान पर बन आई तब उसे निकालना पड़ा। जब मरीज और परिजनों को पता चला तो बुधवार को अस्पताल में हंगामा मच गया। स्थानीय लोग भी जुट गए। पथराव किया।

मीडिया खबरों के अनुसार, रात तक परिजन और डॉक्टर के बीच समझौता हो गया। कंकड़बाग थानेदार अजय कुमार ने कहा कि शिकायत मिलने पर पुलिस गई थी। हंगामा हो रहा था तो शांत कराया। अबतक लिखित शिकायत नहीं मिली है। शिकायत मिलते ही कार्रवाई की जाएगी।

दोनों के बीच हुआ समझौता

भाई के अनुसार डॉक्टर ने बताया कि ऑपरेशन गलत हो गया है। इसके बाद स्वजन हंगामा करने लगे। स्थानीय लोग भी जमा हो गए। पुलिस के पहुंचने पर अस्पताल प्रबंधन ने दूसरे बड़े अस्पताल में अपने खर्च पर इलाज कराने की बात कह समझौता कर लिया।

बाएं की जगह दाएं साइड कर दिया ऑपरेशन

मुजाहिद ने कहा कि बाईं किडनी में स्टोन है। दर्द से परेशान था। जब दर्द अधिक बढ़ गया तब यहां आया। ऑपरेशन की बात कही गई। हमें क्या पता था कि डॉक्टर गलत ऑपरेशन कर देंगे और किडनी ही निकाल देंगे। डॉक्टर ने बाएं की जगह दाएं साइड ऑपरेशन कर दिया और अंत में नौबत ऐसी आई कि किडनी ही निकालनी पड़ी।

मरीज के अनुसार, जब उसे होश आया तब बाएं की जगह दाए तरफ दर्द सुरु हो गया, छूकर देखा तो बाएं की जगह दाएं साइड ऑपरेशन हो गया था। मरीज के भाई ने उमर अंसारी ने कहा कि शुरू में डॉक्टर ने घटना छिपाई, बाद में गलती मानी।

डॉक्टर ने मानी गलती

इधर डॉ. जैन ने पूछने पर कहा-गलती हो गई। जब ऑपरेशन कर दिया तो वहां भी पत्थर था जो अल्ट्रासाउंड में नहीं दिख रहा था। ऑपरेशन के दौरान ही अत्यधिक खून बहने लगा। किडनी बचाने की कोशिश की लेकिन नहीं हो पाया। इसके बाद मरीज की जान बचाने के लिए किडनी निकाल दी।

उन्होंने माना कि गलती हो गई, ह्यूमन एरर है, बड़े-बड़े अस्पतालों में हुआ है। मरीज के परिजनों से लिखित समझौता हो गया है। 10 लाख रुपए भी दिया हूं। इलाज करवा रहा हूं। अगर किडनी ट्रांसप्लांट की जरूरत होगी तो वह भी करवाऊंगा। कोई विवाद अब नहीं है।