द्रौपदी के 7 ऐसे राज जिन्हे जान कर उड़ जाएंगे आपके होश……..

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महाभारत में अनेक कथाएं है.महाभारत की अनेक कथाओं के रहस्य को आज तक कोई नहीं जान पाया है.इन्हीं कारणों से इन्हीं रहस्यों को आज तक फिल्माया नहीं गया.इन्सान की सोच से दूर ये ग्रन्थ अपने आप में अलग दुनिया है.महाभारत में कई पात्र है जिनके रहस्य और घटनाएं समझपाना आम इन्सान के लिए आसान नहीं है.इन सब पात्रों में एक द्रोपदी है जो अपने स्वभाव से विशिष्ट स्थान रखती है.द्रौपदी भारतवर्ष के प्रमुख राज्य की राजकुमारी थी.द्रौपदी प्रांचाल देश के द्रोपद राजा की पुत्री थी. कथाओं के अनुसार कहा जाता है उसकी उत्पति अग्नि कुण्ड से हुई है.द्रोपदी के स्वभाव में अनेक दंत कथाएं है. कहा जाता है कि द्रोपदी हर परिस्थिति में डट कर सामना करती थी.अन्य महिलाओं की तरह रोना धोना नहीं करती थी.

उसने अपने कटु वचनों से असाधारण योद्धाओं की निंदा की जिसमे भीष्म पितामह, उसके जीवन साथी पाण्डव आदि थे.द्रोपदी ने अपने आप को जब भी अकेला पाया तो उसने न्याय के लिए आवाज़ उठाई.द्रौपदी को कौमार्य लङकी का वरदान प्राप्त था.जिसमे वो अपने एक पति के साथ रात गुजारने के बाद पुनः कुंवारी लड़की के भाती बन जाती थी.द्रौपदी ने कुत्तों को खुले सहवास का श्राप दिया था.इसके पीछे की कारण है कि द्रौपदी एक बार युधिष्ठिर के साथ कमरे में थी इसके संकेत के लिए कमरे के बाहर अपने जूते रखे थे बाहर लेकिन कुत्ते ने वो जूते लेकर चला गया जिस से दूसरा पांडव कमरे में आ गया.इस से द्रोपदी को गुस्सा आ गया और उसने कूते को श्राप दिया.

द्रौपदी के चीरहरण में पतियों पाण्डवों द्वारा मदद ना करने से उसका अपने पतियों से विश्वास टूट गया था.जब उसकी पाण्डवों ने मदद नहीं थी तो उसने भगवान कृष्ण को सच्चे दिल से याद किया उन्होंने वरदान दिया और द्रोपदी की साड़ी इतनी लंबी हो गई की दुर्योधन बहोस हो गया था.दक्षिण भारत में,द्रोपदी को काली देवी का अवतार मानते है उनके अनुसार कौरवों का अहंकार को खत्म करने के लिए ये अवतार हासिल किया था.

दक्षिण भारत में इसी कारण से उनकी पूजा की जाति है. में एक रहस्य ये भी है कि भगवान कृष्ण को अपना सखी मानती है.द्रौपदी ने हमेशा भगवान कृष्ण का साथ दिया था.हिडिंबा के श्राप से पाण्डवों का अंत हो गया है.हिडिंबा पाण्डव भीम की पत्नी थीं.उनका एक पुत्र था घटोत्कच. द्रौपदी ने इसका मजाक उड़ाया था जिससे उसको यह श्राप मिला ।

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