ओबामा ने किताब में लिखा- बचपन में रामायण और महाभारत की कहानियां सुनी, भारत से मेरा गहरा लगाव

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अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने अपनी किताब ‘ए प्रॉमिस्ड लैंड’ में भारत को अपने दिल के करीब बताया है और अपनी इस किताब के जरिए ओबामा ने बताया कि उन्होंने अपने बचपन के कई साल इंडोनेशिया में गुज़ारे थे. वहां रामायण-महाभारत से जुड़े किस्से कहानियां भी सुनी थी, जिनका असर उनकी ज़िन्दगी पर हुआ था.

ओबामा के मुताबिक़, भारत एक बहुत बड़ा देश है और दुनिया की कुल आबादी का छटवां हिस्सा यहां मौजूद है. भारत की ख़ास बात यह है कि यहां दो हज़ार से भी ज़्यादा जनजातियां हैं और 700 से अधिक भाषाएं बोलीं जाती है. ओबामा ने अपनी किताब में महात्मा गाँधी का भी ज़िक्र किया है, उन्होंने कहा कि वह गाँधी जी से बहुत प्रभावित हैं, उन्हें अपने आइडल के तौर पर देखते हैं.

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बता दें, ओबामा की इस किताब के आने के बाद भारत की राजनीती पर भी इसका बहुत प्रभाव पड़ा है. उन्होंने अपनी इस किताब में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का ज़िक्र करते हुए कहा कि वह मुंबई हमले के बाद पाकिस्तान के खिलाफ कार्रवाई करने से बच रहे थे. हालाँकि, उनको इसका खामियाज़ा भुगतना पड़ा था. उन्हें डर था कि कहीं देश में मुख्या विपक्षी दल, BJP के असर से मुस्लिम विरोधी भावनाएं बढ़ रही हैं.

इतना ही नहीं, उन्होंने अपनी इस किताब में सोनिया गांधी, पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और राहुल गांधी का भी ज़िक्र किया है. उनके अनुसार, सोनिया गाँधी ने मनमोहन सिंह को इसलिए प्रधानमंत्री बनाया था ताकि राहुल गाँधी के लिए कोई चुनौती न खड़ी हो सकें. इससे पहले भी ओबामा की इस किताब का वह किस्सा सामने आया था जिसमे उन्होंने कहा था कि राहुल गाँधी उस स्टूडेंट की तरह हैं जो टीचर को इम्प्रेस करने में तो सक्षम हैं मगर सब्जेक्ट का मास्टर होने में अभी भी उनमे योग्यता या फिर कहें जूनून की कमी है और यही राहुल की सबसे बड़ी कमज़ोरी है.

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ओबामा ने एक डिनर का भी ज़िक्र किया है. उन्होंने बताया कि पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहनसिंह ने उनके सम्मान में एक डिनर आयोजित किया था, जिसमे सोनिया गाँधी और राहुल गाँधी शामिल हुए थे. सोनिया बोलने से ज़्यादा सुनना पसंद कर रहीं थी और जैसे ही बात पालिसी मैटर की होती तो वह बातचीत को अपने बेटे राहुल की तरह मोड़ देती. राहुल उस वक़्त काफी स्मार्ट, यंग और एनर्जेटिक दिखाई दिए, उन्होंने मुझसे 2008 के कैम्पेन के बारे में सवाल भी किए.

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ओबामा ने हाल में अपनी किताब में 2008 के चुनाव प्रचार अभियान से लेकर राष्ट्रपति के रूप में अपने पहले कार्यकाल के अंत में पाकिस्तान में अलकायदा प्रमुख ओसामा बिन लादेन को मारने के अभियान तक की अपनी यात्रा का विवरण किया है. ओबामा की इस किताब के दो भाग हैं, जिनमे से पहला भाग मंगलवार को देश भर में जारी किया गया. इसमें ओबामा ने आधुनिक भारत को एक सफल गाथा माने जाने की बात कही है, जिसने उन्होंने राजनीतिक दलों के बीच कटु मतभेदों विभिन्न सशस्त्र अलगावादी आन्दोलनों और भ्रष्टाचार के घोटालों का भी सम्मान किया है.

ओबामा लिखते हैं कि भारत की अर्थव्यवस्था में आए परिवर्तन का सारा श्रेय पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह रहे हैं. वह एक छोटे से, अक्सर सताए गए धार्मिक अल्पसंख्यक सिख समुदाय के सदस्य हैं, जो देश के प्रधानमंत्री के पद तक पहुंचे वह एक विनम्र स्वाभाव के व्यक्ति हैं, जिन्होंने भ्रष्टाचार मुक्त छवि से प्रतिष्ठा अर्जित करते हुए जनता का भरोसा जीता.

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ओबामा राष्ट्रपति के पद पर रहने के दौरान 2010 और 2015 में दो बार भारत आए और नवंबर 2010 के अपने भारत दौरे को याद करते हुए, ओबामा ने कहा कि उनके और मनमोहनसिंह के बीच एक गर्मजोशी भरा सकारात्मक रिश्ता भी बना.

ओबामा लिखते हैं कि प्रधानमंत्री पद पर मनमोहनसिंह के पहुंचने को कई बार भारत की जीत के तौर पर देखा जाता है और मैं यह नहीं बता सकता कि सत्ता के शिखर तक मनमोहन सिंह का पहुंचना भारतीय लोकतंत्र के भविष्य का प्रतीक है या फिर यह केवल संयोग है, मगर मैं इतना जनता हूँ कि वह भारत की अर्थव्यवस्था, आतंकवाद और मुस्लिम विरोधी भावनाओं को लेकर चिंतित थे. इसी के साथ मनमोहनसिंह ने कहा “राष्ट्रपति महोदय,बुरे समय में, धार्मिक और जातीय एकजुटता का आहान बहकाने वाला हो सकता है और भारत में या कहीं भी राजनेताओं द्वारा इसका इस्तेमाल करना इतना कठिन काम नहीं है.