क्या बीवी पर शक होने पर पति करवा सकता है बच्चे का DNA टेस्ट? सुनिये हाई कोर्ट का फैसला

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पति और पत्नी के बीच में अक्सर ही झगड़े आदि होते रहते है और सवाल तो होना वाकई में लाजमी सी बात है कि अगर कुछ भी गलत होता है तो फिर कौन किस पर दोष दे और ऐसे में फिर ये दोनों ही पार्टी रूख करती है और कोर्ट का और कोर्ट इस पर क्या फैसला देता है वो आने वाले केसेज के लिए एक तरह से बेस साबित होता है. सवाल ये है किअगर पति को शक है कि उसकी बीवी उसके लिए वफादार नही है तो क्या वो अपने बच्चे का डीएनए टेस्ट करवा सकता है?

दरअसल ये मामला हमीरपुर का है जहाँ पर रहने वाले एक दम्पति का तीन साल पहले ही तलाक हो गया था लेकिन मायके में रहने के दौरान उसकी बीवी प्रेग्नेंट हुई और उसने एक बच्चे को जन्म दे दिया. इस पर बीवी ने कहा कि ये बच्चा उसी का है जो कभी उसका पति रहा है.

इस पर पति ने कहा उसके अपनी पत्नी के साथ में कोई सम्बन्ध ही नही थे तो ऐसा कैसे हो सकता है? उसने कोर्ट जाकर डीएनए जांच की मांग की. इस पर हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि बच्चे का पिता कौन है यह प्रमाणित करने के लिए डीएनए जांच सबसे अधिक वैध तरीका है. इससे किसी की पत्नी की बेवफाई भी साबित की जा सकती है और डीएनए टेस्ट से ये भी साबित किया जा सकता है कि पत्नी बेवफा, बेईमान या व्याभिचारी नही है.

कोर्ट की ये स्टेटमेंट आने वाले कई केसेज के लिए नजीर साबित होगी जहाँ पर कपल आपस में एक दुसरे पर बेवफा होने के इल्जाम लगाते रहते है. अगर इनका समाधान मेडिकल तरीके से निकाला जाए तो कही न कही ये काफी बेहतर तरीका ही है और जल्दी इसे सोल्व करवा देता है जो लोगो के जीवन का समय भी बचाता है.