लंदन में लाखों की नौकरी छोड़ शुरू की खेती, आज सालाना 60 लाख से भी ज्यादा कमाती हैं नेहा भाटिया

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बाहर जाकर अपनी पढ़ाई पूरी करने वालों के प्रति समाज का एक अलग ही रवैया होता है. उनके मुताबिक जो लोग विदेश में पढ़ाई करते हैं, वे सबसे ऊपर होते हैं और उनकी नजरों में ऐसे लोगों की अहमियत भी ज्यादा होती है. हम में से कई लोग विदेश जाकर पढ़ाई या फिर नौकरी करने की चाहत रखते हैं. कई लोगों का तो सपना होता है विदेश में नौकरी करना. विदेश में लोगों की तनख्वाह भी ज्यादा होती है, जिससे कि वे अपनी सभी सपनों को पूरा कर सकते हैं.

विदेश में नौकरी कर सेटल होना लगभग हर दूसरे व्यक्ति का ख्वाब होता है, ऐसे में यदि कोई अपनी अच्छी-खासी नौकरी छोड़ भारत में आकर खेती करने लगे तो आप क्या कहेंगे? ऐसे लोगों को शायद लोग बेवकूफ ही कहेंगे, लेकिन आगरा की रहने वाली नेहा भाटिया ने जो किया है, उसे देख लोग उनकी तारीफों के पुल बांधते नहीं थक रहे. बता दें, नेहा भाटिया ने साल 2014 में लंदन के स्कूल ऑफ़ इकोनॉमिक्स से मास्टर्स की डिग्री ली है.

पढ़ाई पूरी करने के बाद नेहा ने साल भर लंदन में नौकरी किया, जहां उन्हें अच्छी तनख्वाह मिल रही थी. हालांकि बाद में वे देश वापस आ गईं और साल 2017 से उन्होंने ऑर्गेनिक फार्मिंग की शुरुआत की. आज के टाइम में नेहा तीन जगहों पर खेती करती हैं और आपको जानकर हैरानी होगी कि इससे उन्हें सलाना 60 लाख रुपये की कमाई भी हो रही है. इतना ही नहीं, नेहा किसानों को ऑर्गेनिक फार्मिंग की ट्रेनिंग भी दे रही हैं, जिससे वे अपना जीवन संवार सके.

नेहा 31 साल की हैं और एक बिजनेस फैमिली से संबंध रखती हैं. नेहा कहती हैं कि, “मैंने बहुत पहले ही तय कर लिया था कि मुझे बिजनेस करना है लेकिन, सिर्फ पैसे कमाने के लिए नहीं, बल्कि उसका सोशल बेनिफिट और सोशल इम्पैक्ट भी हो. उससे लोगों को भी फायदा हो. हालांकि, तब खेती के बार में नहीं सोचा था”. नेहा ने अपना ग्रेजुएशन दिल्ली यूनिवर्सिटी से किया है. ग्रेजुएशन पूरा होते ही वह एक सोशल ऑर्गेनाईजेशन से जुड़ गयी थीं. राजस्थान, हरियाणा, मध्यप्रदेश सहित कई राज्यों में नेहा ने शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी समस्याओं पर काम किया. इसके बाद वे साल 2012 में लंदन चली गयी थीं.

लंदन से वापस लौटने पर उन्होंने खुद को एक बार फिर सोशल ऑर्गेनाईजेशन के साथ जोड़ा और तकरीबन 2 साल तक काम किया. इस दौरान वे कई गांव वालों से मिलीं और उनकी परेशानियों से रूबरू हुईं. नेहा ने कहा कि इन लोगों से मुलाकात करके उन्हें समझ आया कि इनकी सबसे बड़ी समस्या हेल्दी फ़ूड की है. केवल शहरी लोग ही नहीं बल्कि गांव के लोग भी सही खाने से दूर हैं. ऐसे में नेहा ने साल 2016 में ‘क्लीन ईटिंग मूवमेंट’ के बारे में सोचा, जिससे कि लोगों को सही और शुद्ध खाना प्राप्त हो सके. इसके लिए वे कई एक्सपर्ट्स से मिलीं. नेहा ने रिसर्च शुरू कर दी थी.

लोगों का यही कहना था कि यदि सही खाना है तो सही उगाना भी पड़ेगा. अगर अनाज और सब्जियों में ही यूरिया और केमिकल होगा तो उनसे बना खाना कभी ठीक और सेहत को लाभ पहुंचाने वाला नहीं हो सकता. ऐसे में नेहा के दिमाग में ऑर्गेनिक फार्मिंग का आईडिया आया. हालांकि इस समय तक नेहा को खेती के बारे में कुछ नहीं पता था. खेती शुरू करने से पहले उन्होंने किसानों से बकायादा खेती के बारे में हर तरह की जानकारी ली. जानकारी हासिल करने के बाद नेहा ने नोएडा में दो एकड़ की जमीन खरीदी. शुरुआत में नेहा को निराशा ही हाथ लगी, लेकिन फिर भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी.

दूसरी बार की उपज अच्छी रही, जिसके बाद नेहा खुद अपने ऑर्गेनिक उत्पादों को मार्केट में लेकर गयीं और लोगों को इससे मिलने वाले फायदों से अवगत कराया. नेहा ने बताया कि कुछ ही दिनों में उन्हें अच्छा रिस्पांस मिलने लगा और धीरे-धीरे बिजनेस बढ़ने लगा. नोएडा के बाद मुजफ्फरनगर और भीमताल में भी उन्होंने खेती शुरू की. फिलहाल नेहा के पास कुल 15 एकड़ जमीन है, जिस पर वह ऑर्गेनिक फार्मिंग कर रही हैं. उनके टीम में आज 20 लोग हैं, जो काम को संभालते हैं. इतना ही नहीं, बड़ी संख्या में किसान भी नेहा के साथ जुड़कर उनसे ऑर्गेनिक खेती की ट्रेनिंग लेते हैं.

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