Diwali 2020: जानिए दिवाली में माता लक्ष्मी पूजन का सही तरीका और इसका शुभ मुहूर्त

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हिन्दू पंचांग के अनुसार हर साल की कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या को दिवाली का त्यौहार मनाया जाता है. दिवाली हिन्दुओं का पर्व है. यह त्यौहार भगवान श्री राम और सीता माता के अयोध्या वापस लौटने की ख़ुशी में मनाया जाता है. इस दिन लोगों ने हज़ारों-लाखों दीयों के साथ भगवान श्री राम और सीता माता का स्वागत अयोध्या नगरी में किया था. मानयता है कि इस दिन माता लक्ष्मी पृथ्वी का भ्रमंड करती हैं और अपने भक्तों के घर जाती हैं. दिवाली का यह त्यौहार पूरे 5 दिन मनाया जाता है, इसकी शुरुआत धनतेरस से होकर भाई दूज तक की जाती है.

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बता दें, दिवाली का यह त्यौहार शनिवार यानी की कल मनाया जाएगा. इस दिन लोग दूकान-घर-ऑफिस सजाते हैं और मिठाइयां बाटी जाती है. दिवाली के दिन धन की देवी लक्ष्मी को पूजा जाता है और बुद्धि के देव श्री गणेश और विद्या की देवी सरस्वती की पूजा अर्चना की जाती है. इस पूजा में माता लक्ष्मी को सफ़ेद फूल, कमल का फूल और खील बताशे से पूजा अर्चना की जाती है.

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दिवाली की तिथि और विधि
दिवाली पर इस बार कार्तिक अमावस्या तिथि 14 नवंबर को दोपहर 02 बजकर 17 मिनट से शुरू होकर 15 नवंबर की सुबह 10 बजकर 36 मिनट तक रहेगी.

काम काज में पूजा का शुभ मुहूर्त
दिवाली के इस पावन अवसर पर दुकान, फैक्ट्री,ऑफिस की पूजा भी की जाती है. इस दिन सभी व्यापारी लोग अपने बैठने वाले स्थान की पूजा करते हैं, जिसमे उनकी गद्दी, गल्ले की पूजा, तुला पूजा, मशीन की पूजा, बही खातों की पूजा और कलम दवात की पूजा करते हैं.

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दिवाली का शुभ मुहूर्त दिल्ली में शनिवार शाम 5 बजकर 30 मिनट से शाम 7 बजकर 25 मिनट तक रहेगा और मुंबई में पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 6 बजकर 03 मिनट से शाम 8 बजकर 03 मिनट तक रहेगा. इस बार दिवाली पर सर्वार्थ सिद्धि योग बन रहा है और हमारे हिन्दू मान्यता के अनुसार इस योग में खरीदारी करना शुभ होता है.

लक्ष्मी पूजन विधि
धनतेरस वाले दिन माता लक्ष्मी और गणेश की नई मूर्ति खरीदनी चाहिए और फिर उसकी पूजा करनी चाहिए माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा के लिए लाल कपडा, घी का दीपक, अगरबत्ती, हल्दी, फूलों की माला, सिन्दूर, इत्र, इलायची, कपूर, केसर, कमलगट्टे, कमल का फूल, खील-बताशे, गंगाजल, देसी घी, चन्दन, चंडी का सिक्का, चावल, दही, दीपक, दूध, लोंग, लोंग लगा हुआ पान, आम के पत्ते, इन सभी चीज़ों की ज़रुरत होती है. इस दिन लोग पूजा घर में सोना चंडी पैसे रखकर भी पूजा करते हैं.

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बता दें, दिवाली के ठीक अगले ही दिन गोवेर्धन पूजा की जाती है गोवेर्धन पूजा का शुभ मुहूर्त 15 नवंबर की दोपहर 11 बजकर 44 मिनट से 01बजकर 53 मिनट तक है. इस दिन लोग भगवान श्री कृष्ण को 55 प्रकार का खाना बनाकर भोग लगाया जाता है.