बिना मिट्टी के ही अपने छत पर 300 से भी ज़्यादा पेड़-पौधे उगा रहा है ये सॉफ्टवेयर डेवलपर- जाने कैसे

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हम अक्सर गार्डन लवर्स को पेड़ पौधों के साथ तरह-तरह के प्रयोग करते हुए देखते हैं। ये लोग पेड़-पौधों के साथ तरह-तरह की क्रिएटिविटी करते रहते हैं। ऐसे ही एक गार्डन लवर हैं मध्य प्रदेश के ‘तरुण उपाध्याय‘ जो एक सॉफ्टवेयर डेवलपर होने के साथ ही पिछले 6 साल से Soilless Gardening भी कर रहे हैं। उनके टैरेस पर विभिन्न प्रकार के फल, फूल और हरी सब्जियाँ देखने को मिलती है। वह इन सब में एक ख़ास प्रकार के पॉटिंग मिक्स का प्रयोग करते हैं, जिससे उन्हें मिट्टी का थोड़ा भी प्रयोग नहीं करना होता है।

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भोपाल के तरुण उपाध्याय अमेरिका के एक प्रतिष्ठित कंपनी में काफ़ी ऊंचे पद पर कार्यरत थें। 12 साल से भी ज़्यादा सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट का काम करते हुए तरुण को जब यह महसूस हुआ कि जॉब के चक्कर में उनकी क्रिएटिविटी खोती जा रही है। ऐसे में उन्होंने स्वदेश लौटकर कुछ क्रिएटिव करने का सोचा और फिर नौकरी से इस्तीफा देकर वापस अपने देश लौट आए।

इंडिया आकर उन्होंने 2 साल तक अपने क्रिएटिविटी पर काम किया और फिर एक स्टार्टअप ‘ऑनलाइन हेल्थ केयर रिच प्रोग्राम’ FitBanda. com‘शुरू किया और दूसरे स्टार्टअप’ Rebalance’पर भी काम कर रहे हैं। इसके अलावा वह एक इंटरनेशनल प्लेटफार्म’ Autodesk’s instructables‘ के फीचर ऑथर हैं। इन सबके साथ ही तरुण एक फूल टाइम गार्डनर भी हैं और वह अपने घर में ही कई प्रकार के सजावटी फूलों के साथ-साथ फल और सब्जियाँ भी उपजा रहे हैं।

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हमेशा से गार्डनिंग में रुचि रखने वाले तरुण को 2014 में जब इसके लिए पर्याप्त समय मिला तो उन्होंने निश्चय किया कि वह अपने इस शौक को पूरा शौक को पूरा करके ही रहेंगे। इसके लिए सबसे पहले उन्होंने अपने घर का रिइनोवेशन करा कर एक छत को 5 छतों में तब्दील करवा दिया।

फिर इसी के ऊपर स्वायल फ्री टैरेस गार्डनिंग करने की शुरुआत किया, जिसके ऊपर आज 300 से भी ज़्यादा पेड़-पौधे उपज रहे हैं। इनके गार्डन में 30 से भी ज़्यादा प्रकार के फल और सब्जियाँ जैसे-अंजीर, अमरुद, थाई एप्पल बेर, अलबरी, स्टार फ्रूट, आम, पपीता, लाल बेर, पेपर, स्ट्राॅबेरी, पालक, पुदीना लेमनग्रास, सीताफल, तुलसी पत्ता इत्यादि उगाई जाती है, जो पूर्णता ऑर्गेनिक होती है।

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इनके गार्डन की सबसे ख़ास बात है इसका स्वायल फ्री होना अर्थात वह जो गार्डनिंग करते हैं उसमें थोड़ा-सा भी मिट्टी का प्रयोग नहीं करते। इसके लिए तरुण एक विशेष प्रकार की पॉटिंग मिक्स तैयार करते हैं। आइए जानते हैं तरुण पॉटिंग मिक्स बनाने के लिए किन मिश्रणों का प्रयोग करते हैं-

  • गोबर की खाद 30%
  • वर्मी कंपोस्ट 30%
  • Coco Peat 20%
  • सरसों खली, नीम खली 10%

कभी-कभी तरुण इनमें बोनमिल का उपयोग भी करते हैं। यह मिश्रण हर प्रकार के पेड़ पौधों को उगाने का बेहतरीन माध्यम साबित होता है। पेस्टीसाइट के रूप में तरूण अपने पेड़-पौधों पर निम या करंज के तेल का स्प्रे करते हैं।

उन्होंने Soilless Gardening के बहुत सारे फायदे बताए हैं जैसे-

  • इसका प्रयोग कर हम गमलों के वज़न को 50% तक कम कर सकते हैं जिससे टैरेस पर पड़ने वाला वज़न कम हो जाता है और इन्हें मैनेज करना काफ़ी आसान हो जाता है।
  • हल्का होने की वज़ह से इसमें जड़ों का सही तरीके से विकास होता है, जिससे पेड़ पौधों का विकास अच्छी तरह से हो पाता है।
  • पाॅटिंग में ड्रेनेज सही से हो पाता है और इसमें नमी काफ़ी समय तक बनी रहती है जिसकी वज़ह से इनमें जैविक एडिविट मिलाना काफ़ी आसान हो जाता है। इनमें पोषण भी सामान्य मिट्टी से ज़्यादा रहता है।
  • इसकी सबसे ख़ास बात यह है कि इन्हें रि-पॉट करने में थोड़ी भी दिक्कत नहीं होती है।
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तरुण कहते हैं कि आने वाले साल में घर की लगभग सारी ज़रूरत वाले सामान को वह अपने गार्डन से ही उपजाएंगे। उनका मानना है कि गार्डनिंग करना बच्चों को पालने जैसा होता है। जैसे हम अपने बच्चों का ध्यान रखते हैं ठीक वैसे ही पेड़ पौधों का भी ध्यान रखना चाहिए। बच्चों को रासायनिक खाना खिलाने से बेहतर है उनके लिए घर पर ही हरी साग सब्जियाँ उगाई जाए।

तरूण आज बहुत से लोगों के प्रेरणा बन चुके हैं और हम आशा करते हैं उनके इस प्रेरणादायी कहानी को पढ़कर आप में से भी बहुत से लोग उनके इस अनोखे तरीके के गार्डनिंग को अपनाकर लाभान्वित होंगे।