70 बरस बंद रहा यह दरवाजा, खोलते ही खुला घर वालों की किस्मत का दरवाजा

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70 सालों से बंद था घर का एक कमरा, दरवाजा खोलते ही घरवालों का किस्मत जाग गया ,इस कमरे को खोलने पर यहां 200 साल पुराना ‘खजाना’, निकला जिसे देखकर घरवालों को अपनी नजर पर यकीन ही नही हो रहा था।

घर का एक कमरा हमेशा बंद ही रहता था, पर एक दिन जब उस कमरे के बंद दरवाजे को खोला गया सबकी आंखे खुली की खुली रह गई। वहां पर 200 साल पुराना खजाना निकला है जिसको देख कर घरवाले दंग रह गए है। उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग में अगस्त्यमुनि ब्लाक के स्यूपुरी गांव में एक ऐसा घर है जहा पर से लगभग 200 से अधिक दुर्लभ पांडुलिपियां मिली है। इन पांडुलिपियों की भाषा स्पष्ट नहीं पढ़ी जा सकती है, लेकिन इसकी रचना 1785 से 1832 के बीच में किया गया है।

यहां पर तल्ला नागपुर के एक स्यूंपुरी गांव निवासी सत्येंद्र पाल सिंह बर्त्वाल और धीरेंद्र सिंह बर्त्वाल के द्वारा बताया गया है कि यहां चार दिन पहले वह अपने घर में साफ-सफाई कर रहे थे, तभी वो सोचे की अपने दादा स्व. ठाकुर हीरा सिंह बर्त्वाल वाला कक्ष को भी साफ करना चाहिए जब इस कक्ष को खोला तो कमरे में तीन रिंगाल की कंडियां भी मिली है। इस कंडियों में 200 से अधिक दुर्लभ पांडुलिपियां भी रखी गई थी। ये पांडुलिपियां दो सेमी से लेकर 12 फीट लंबे कागज वाली हैं। इसको हम सबने देखा तो काफी हैरान हो गए थे।

उन्होंने बताया कि इन पांडुलिपियों में सबसे पुरानी वर्ष 1785 की लिखी हुई है , लेकिन अभी तक अच्छे से भाषा स्पष्ट पढ़ने में नहीं आ रही है और उन्होंने ये भी बताया कि घर में और भी ऐतिहासिक सामान अभी भी मौजूद हैं। यह विदित हो कि कुछ वर्ष स्यूंपुरी गांव में मानवेंद्र सिंह बर्त्वाल के घर श्रीबदरीनाथ धाम की आरती से संबंधित पांडुलिपि मिली थी, इस पांडुलिपि को यूसैक द्वारा इस दुर्लभ धरोहर को प्रमाणित किया गया था।

यहां पर इस दुर्लभ पांडुलिपियों का मिलना ही एक गौरव की बात है। यह इनके शोध और संरक्षण के लिए यह पर हर संभव प्रयास किया जाएगा और बहुत जल्द ही इस गांव पहुंच कर विशेषज्ञ इनका भौतिक परीक्षण भी करने वाले है।