केवल पति की लंबी उम्र के लिए नहीं काम आता है सिंदूर, जानिए इसके अन्य फायदे के बारे में

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एक चुटकी सिंदूर की कीमत हर कोई नहीं समझता बस एक विवाहिता स्‍त्री ही समझ सकती है। उस चुटकी भर सिंदूर में एक विवाहिता का सम्‍पूर्ण ब्रह्मांड होता है। सुहागन के 16 श्रृंगार में से एक सिंदूर उसके अखंड सुहागन होने का पहचान होता है।

क्या कभी आपने सोचा है कि आखिर हिंदू महिलाएं सिंदूर क्यों लगाती हैं? माँग में भरे जाने वाले सिंदूर का बहुत महत्व होता है। हिंदू धर्म में मांग में सिंदूर भरना सिर्फ एक परम्‍परा है, यह परम्परा सदियो से चली आ रही लेकिन इस परम्‍परा के पीछे पौराणिक और वैज्ञानिक दोनों ही कारण होते है।

सामुद्रिक शास्त्र में अभागिनी स्त्री के दोष निवारण के लिए मांग में सिंदूर भरने को कहा जाता था । सिंदूर भरने से किसी भी स्त्री के सौन्दर्य में वृद्धि हो जाती है और विवाह‍ित स्त्री कितनी भी सजी संवरी क्यों ना हो, सूनी मांग की वजह से उनका सौंदर्य अधुरा रहता है।सिंदूर में मिश्रित पारा धातु एक तरल पदार्थ हैं, जो की मस्तिष्क के लिए बहुत ही लाभदायक सिद्ध होता हैं। यह पारा सभी रोगों से महिलाओं को मुक्त रखने में सहायक होता हैं। महिलाओं को विवाह होने के बाद अपनी मांग में सिंदूर अवश्य लगाना चाहिए।

सिंदूर देवी लक्ष्मी के लिए सम्मान का प्रतीक माना गया है। देवी लक्ष्मी पृथ्वी पर पांच स्थानों पर रहती है और उन्हें हिन्दू समाज में सिर पर स्थान दिया गया है। जिसके कारण हम माथे पर कुमकुम लगा कर उन्हें सम्मान देते हैं। हिन्दू धर्म में नवरात्र और दीवाली जैसे महत्वपूर्ण त्योहारों के दौरान पति के द्वारा अपनी पत्नी की मांग में सिंदूर लगाना शुभ माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि यह उनके एक साथ रहने का प्रतीक होता है‌‌।विवाह के बाद दोनों एक दूसरे के साथ काफी खुश रहते हैं।

इसके लिए एक कथा भी प्रचलित है,कहा जाता है कि वीरा और धीरा दोनो ही शिकार खेलने जाते थे कि तभी कालिया नाम के एक डाकू ने धीरा को देख लिया और उसपर मोहित हो गया। पानी लेने जा रहे वीरा पर अचानक कालिया डाकू ने हमला कर दिया था जिससे वीरा घायल हो गया और धरती में गिर के तड़पने लगा। ये देखकर डाकू जोर जोर से हंसने लगा जिसकी आवाज धीरा ने सुन ली। जब धीरा भागती हुई उस जगह पर पहुंची तो वीरा की हालत देखकर क्रोधित होकर पीछे से डाकू पर हमला कर दिया। धीरा के वार से घायल डाकू जब आखिरी सांसे गिन रहा था तभी वीरा को होश आया और उसने धीरा की वीरता से खुश होकर उसके मांग में अपने रक्त भर दिया। उसी दिन से सिंदूर भरने की ये प्रथा की शुरुआत हुई थी।