चिराग पासवान ने सिर्फ जदयू ही नहीं लोजपा की भी झोपड़ी में आग लगा दी, ये है इनसाइड स्टोरी!

0
2

आंकड़े बताते हैं कि 2020 का विधानसभा चुनाव में लोजपा ने अब तक का सबसे खराब प्रदर्शन किया है।

New Delhi, Nov 15 : बिहार विधानसभा चुनाव परिणाम के बाद राजद, वाम दल तथा बीजेपी जहां फायदे में रही, वहीं कई सियासी पार्टियों को जबरदस्त झटका लगा है, सीएम नीतीश कुमार की जदयू को डैमेज करने के इरादे से चुनावी मैदान में उतरी लोजपा अध्यक्ष चिराग पासवान की अगुवाई में सिर्फ 1 सीट जीत सकी है, इस चुनाव में पार्टी वो कमाल नहीं कर सकी, जिसका दावा चिराग कर रहे थे, उल्टा लोजपा के गठन के बाद से अब तक की सबसे बड़ी हार का सामना करना पड़ा, चिराग ने 135 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे, उसने सिर्फ 1 सीट जीती है।

सबसे खराब प्रदर्शन
आंकड़े बताते हैं कि 2020 का विधानसभा चुनाव में लोजपा ने अब तक का सबसे खराब प्रदर्शन किया है, पूर्व केन्द्रीय मंत्री रामविलास पासवान द्वारा साल 2000 में लोजपा के गठन के बाद से सबसे ज्यादा 29 सीटें 2005 फरवरी चुनाव में आया था, ये पार्टी का पहला विधानसभा चुनाव था।

किसी के साथ गठबंधन नहीं
फरवरी 2005 में हुए चुनाव में लोजपा का स्पष्ट रुप से किसी दल के साथ गठबंधन नहीं था, लेकिन कांग्रेस के साथ कुछ सीटों पर आपसी तालमेल थे, तब उसके 178 उम्मीदवार मैदान में थे, इसके बाद साल 2005 अक्टूबर-नवंबर में हुए चुनाव में लोजपा का सीपीआई के साथ गठबंधन था, लोजपा के 203 उम्मीदवार मैदान में थे, paswan 7 जिसमें दस सीटों पर जीत हासिल की। फिर 2010 चुनाव में राजद के साथ गठबंधन हुआ और लोजपा ने 75 सीटों पर उम्मीदवार उतारे, तब उसे तीन सीटों पर जीत मिली, 2015 में एनडीए गठहबंधन में 42 सीटों पर पार्टी ने उम्मीदवार उतारे, जिसमें सिर्फ दो सीटों पर विजय मिली।

पहला मौका
आपको बता दें कि ये पहला मौका है, जब चिराग पासवान ने पिता राम विलास पासवान की अनुपस्थिति में चुनाव लड़ा, इससे पहले चुनाव की कमान हमेशा बड़े पासवान के हाथ में होती थी, इसलिये ये आंकड़े चिराग को काफी सताएंगे। Chirag Paswan 3
साल – सीट लड़े- वोट प्रतिशत- सीटों पर जीत
2005(फरवरी)- 178-  12.62-      29
2005 (अक्टूबर)- 203- 11.10-     10
2010-        75   – 6.74-      03
2015-        42-    4.80-      02
2020-       135-   5.66-       01