बैंड-बाजा न बराती, 17 मिनट में ही कैसे बन गए जीवन साथी

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जी हां, कोरोना काल में यह सब किसी मिसाल से कम नहीं है। बता दें शुक्रवार को ग्वालियर हाईवे स्थित इटौरा चौराहा पर संत रामपाल के आश्रम में ये अनोखी शादी हुई।

आपको बता दें धनौली, मलपुरा निवासी चेतन दास और बाह के जाटव टूला निवासी अविता निर्मल की शादी में न तो मंडप सजाया गया और न ही अग्नि के सात फेरे लिए गए। लड़का व लड़की पक्ष के चुनिंदा लोग ही आश्रम में पहुंचे। यहां गुरुवाणी के साथ ही उनका विवाह संपन्न हो गया। बात दें यहां आए लोगों को चाय, बिस्कुट का नाश्ता दिया गया। दोनों के परिवार के लोगों ने कहा कि शादी में फिजूलखर्ची से बचना जरूरी है। दहेज रहित शादियां बिना आडंबर के होनी चाहिए। यहां अविता की मां कपूरी देवी, पिता देवी चरन, भाई बिजेंद्र, चेतनदास की मां विद्यादेवी, पिता कमलदास आदि मौजूद रहे।