चित्रकूट: रहस्यमयी गुफा का मिला दूसरा छोर

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मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम की तपोस्थली चित्रकूट में गुप्त गोदावरी से मात्र 1 किलोमीटर दूर मिली एक और रहस्यमयी गुफा में कुछ ऐसे पत्थर के औजार प्राप्त हुए हैं जो पाषाण कालीन युग के प्रतीत होते हैं।यह पत्थर के औजार नुकीले धारदार और वजनदार हैं।

प्राचीन काल में जब आदिमानव पाषाण युग में रहा होगा तब इन गुफाओं में रहकर गुजर बसर करते रहे होंगे जब सभ्यता धीरे-धीरे विकसित हुई तो चित्रकूट में रहकर तपस्या करने वाले ऋषि-मुनियों ने भी इन गुफाओं को अपना आश्रय स्थल बना लिया और इन्हीं गुफाओं में रहकर वर्षो तपस्या की होगी।इस तरह की चित्रकूट में अनेक गुफाएं जो तमाम रहस्यों को छुपाए हैं। गुप्त गोदावरी के पास थर पहाड़ पर तीन दिन पहले यह रहस्यमयी गुफा मिली थी, जिसका बुधवार सुबह दूसरा छोर मिलने पर आसपास के कई लोग लगभग 100 मीटर अंदर तक घुस गए।गुफा के अंदर से लौटे ग्रामीणों ने बताया कि यह बेहद चिकने व सफेद रंग के पत्थर की गुफा है। जो कुछ हद तक गुप्त गोदावरी की गुफा से मिलती-जुलती है। यह पहाड़ के एक छोर से दूसरे छोर पर जाकर खुलती है।

जिले की सीमा अंतर्गत नगर पंचायत चित्रकूट के पर्यटन स्थल गुप्त गोदावरी के पास स्थित थर पहाड़ के पास सड़क निर्माण के लिए खुदाई का कार्य चल रहा है। रविवार को उसी दौरान यहां पर एक रहस्यमयी प्राचीन गुफा मिली थी। इसका दूसरा छोर स्थानीय ग्रामीणों ने तलाश लिया है।
पहाड़ के अंदर सीधा रास्ता बना हुआ है। जो कहीं जा रहा है। वहीं नायब तहसीलदार ऋषि नारायण सिंह ने राजस्व कर्मी राघवेंद्र व अरूणेंद्र के साथ गुफा स्थल का निरीक्षण किया। बताया कि पर्यटन की दृष्टि से यह गुफा महत्वपूर्ण हो सकती है।

इसकी रिपोर्ट शासन व पुरातत्व विभाग को भेजी गई है।ग्रामोदय विश्वविद्यालय के पुरात्व विभाग के शिक्षकों से भी इस मामले में सलाह ली जाएगी। महंत दिव्य जीवनदास, महंत संत नवलेश दीक्षित ने बताया कि धर्मनगरी में कई पौराणिक रहस्य हैं। इस गुफा को लेकर पुरातत्व विभाग से सर्वेक्षण कराकर जांच कराई जाए। इस गुफा से महज एक किलोमीटर की दूरी पर श्रीराम वनवास काल का गुप्त गोदावरी पौराणिक स्थल है। माना जाता है यहीं माता गोदावरी गुप्त रूप से भगवान राम के दर्शन के लिए प्रकट हुई थीं। चित्रकूट के बाहरी इलाके में स्थित गुप्त गोदावरी के गुफा मंदिर में दो पर्वतीय गुफाएं हैं।
इन गुफाओं में घुटने तक पानी रहता है, माना जाता है कि यह पानी भूमिगत गोदावरी नदी से जुड़ा है। माना जाता है कि भगवान राम और लक्ष्मण वनवास के दौरान कुछ समय के लिए यहां रुके थे। उस समय, भगवान राम से मिलने के लिए कई देवताओं सहित माता गोदावरी गुप्त रूप से इन गुफाओं में उनके दर्शन करने आई थीं।