जब लालू ने लाल होकर रोक दिया था आडवाणी का रथ, जानिये क्या हुआ था दोनों के बीच?

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अयोध्या विवाद पूरी तरह सुलझ गया है। वही राम मंदिर निर्माण का काम भी शुरू हो गया है। ऐसे में इन दिनों सबके जहन में लालकृष्ण आडवाणी की रथ यात्रा की तस्वीरें ताजा हो रही हैं। दरअसल इसका कनेक्शन बिहार से है। बिहार चुनाव का आगाज हो गया है तो चुनावी मुद्दे उखड़ना आम बात है। ऐसे में हाल-फिलहाल लालकृष्ण आडवाणी की रथ यात्रा को लेकर लोग एक बार फिर चर्चा करने लगे है। बिहार में लालकृष्ण आडवाणी को उस दौरान गिरफ्तार कर लिया गया था। इस गिरफ्तारी के बाद देश में राजनीतिक हालात बिल्कुल पलट गए थे और केंद्र की सरकार गिर गई थी। आखिर ऐसा क्या हुआ था जो एक रथ यात्रा को रोकने से सरकार की सत्ता पलट गई। एक दिग्गज नेता की गिरफ्तारी हो गई। आइए हम आपको इसकी पूरी कहानी सुनाते हैं।

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25 सितंबर को शुरू हुई रथ यात्रा

यह किस्सा 25 सितंबर 1990 का है। जब गुजरात के सोमनाथ मंदिर में पूजा कर आडवाणी ने अपने रथ यात्रा की शुरुआत की थी। इस रथयात्रा का एकमात्र मकसद राम मंदिर निर्माण का समर्थन करना था। इस रथयात्रा में कई राज्यों के नेता शामिल हुए थे। सोमनाथ मंदिर से राम जन्मभूमि तक जाने के लिए शुरू हुई यह यात्रा 8 राज्यों के साथ-साथ राजधानी दिल्ली से भी गुजरने वाली थी।

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नरेन्द्र मोदी ने दी थी चुनौती

यह यात्रा तय योजना के मुताबिक 25 सितंबर को सोमनाथ से शुरू होकर 30 अक्टूबर 1990 को अयोध्या में खत्म होनी थी, ऐसे में नरेंद्र मोदी के भी दो मुद्दे उस समय चर्चा में थे। एक वह नेशनल मीडिया से बात करने के लिए अधिकृत थे और दूसरा उनका प्रबंधन कौशल जिसका वह जिक्र हमेशा करते हैं। इस दौरान उन्होंने वीपी सिंह से लेकर यूपी सरकार तक को इस रथ यात्रा को रोकने की चुनौती तक दे डाली थी। यही वजह थी जिसने इस किस्से को जन्म दिया।

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जब लालू ने स्वीकार की मोदी की चुनौती

वहीं दूसरी ओर तय रणनीति के तहत रथ यात्रा शुरू हो गई, लेकिन इस रथयात्रा में असली ट्विस्ट तब आया जब लालकृष्ण आडवाणी रथ पर सवार थे और उधर बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव ने अपने दिलो-दिमाग में नरेंद्र मोदी के उस चैलेंज को बिठा लिया था और उन्होंने ठान लिया थी कि वह इस रथयात्रा को रोकेंगे ।उन्होंने इसका पूरा प्लान भी बना लिया था। उन्होंने इसके लिए एक योजना बनाई थी, लेकिन मुश्किल वहां हुई जब यह योजना लिक हो गई।

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लीक हो गई लालू की योजना

योजना के लीक होने के बारे में लालू प्रसाद यादव को कुछ भी नहीं पता था। वह अपनी प्लानिंग के मुताबिक ही काम कर रहे थे। उधर आडवाणी की रथयात्रा धनबाद से शुरू होने वाली थी और उन्हें उन्हें सासाराम के नजदीक गिरफ्तार करने की योजना बन गई थी। हालांकि यह योजना लिक हो गई बाद में धनबाद में गिरफ्तारी का प्लान बना। इस दौरान लालू के अधिकारियों के बीच मतभेद के चलते योजना पर पानी फिर गया।

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खुद मैदान में उतरे लालू

इसके बाद लालकृष्ण आडवाणी की इस रथ यात्रा का अगला पड़ाव समस्तीपुर था। लालू प्रसाद यादव ने उन्हें हर हाल में यहां गिरफ्तार करने का फैसला कर लिया था और वह किसी भी हाल में अपने इस फैसले से कर गुजारना चाहते थे। लालू यादव लालकृष्ण आडवाणी को समस्तीपुर में गिरफ्तार करने के सपने संजोए बैठे थे। लालकृष्ण आडवाणी समस्तीपुर के सर्किट हाउस में रुके हुए थे। वहीं लालू ने अधिकारियों को निर्देश दिए गए थे कि वह उन्हें कहीं नहीं जाने देंगे।

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ऐसे में लालू प्रसाद यादव के इस प्लेन का रोड़ा बने लालकृष्ण आडवाणी के समर्थक…दरअसल उस दौरान वहां समस्तीपुर के पड़ाव में लालकृष्ण आडवाणी के साथ भारी संख्या में समर्थक मौजूद थे। ऐसे में यह बात सभी जानते थे कि अगर लालकृष्ण आडवाणी की गिरफ्तारी होगी तो समर्थक बवाल करेंगे।

आडवाणी की गिरफ्तारी के लिए लालू ने एक नया ही पैंतरा आजमाया। लालू ने करीब रात 2:00 बजे पत्रकार बनकर सर्किट हाउस में फोन किया ताकि उन्हें यह पता चल सके कि उस समय आडवाणी के साथ कौन-कौन मौजूद था। फोन पर लालकृष्ण आडवाणी के एक सहयोगी ने बताया कि वह उस समय सो रहे हैं और सारे समर्थक जा चुके हैं। लालू इसी मौके की फिराक में थे। वह आडवाणी को गिरफ्तार करने का यह मौका बिल्कुल नहीं छोड़ना चाहते थे। ऐसे में लालू यादव ने बिना देरी किए वहां पहुंचने का फैसला किया।

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25 सितंबर को सोमनाथ से यात्रा शुरू हुई थी और 30 अक्टूबर को इसे अयोध्या में खत्म होना था, लेकिन लालू प्रसाद यादव की चाल के चलते लालकृष्ण आडवाणी 23 अक्टूबर को बिहार में गिरफ्तार हो गए। आडवाणी की गिरफ्तारी के बाद केंद्र की सियासत में भूचाल बच गया।

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लालकृष्ण आडवाणी की गिरफ्तारी का हर्जाना वीपी सिंह की सरकार को भुगतना पड़ा। बात इस कदर बिगड़ गई कि बीजेपी ने बीपी सरकार से अपना समर्थन वापस ले लिया। ऐसे में रातों-रात वीपी सिंह की सरकार गिर गई, जिसमें लालू प्रसाद यादव भी साझीदार थे। यह किसका उस वक्त की राजनीति का वह किसका है, जिसे राजनीति के दिग्गज आज तक नहीं भूल सकते। वीपी सिंह की सरकार का अचानक गिरना इसका पूरा कारण लालू को माना जाता है।