बिहार में परिवारवाद कितना भारी, जानिये कौन है वंशवाद के 20 चेहरे, देखे पूरी लिस्ट

0
3

परिवारवाद यानी नेपोटिज्म एक ऐसा शब्द जिसका जिक्र अक्सर किसी की भी काबिलियत को पल भर में खोखला कर देता है। हालांकि कई बार इस शब्द की असल बानगी भी देखने को मिलती है। हाल फिलहाल में बिहार इलेक्शन खासा चर्चाओं में बना हुआ है। ऐसे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तो आरजेडी कांग्रेस पर अक्सर परिवारवाद को बढ़ावा देने का आरोप लगाते रहते हैं। वही बिहार की राजनीति में परिवारवाद राजनीति पर कितना हावी है यह हर कोई जानता है। हालांकि राजनीति में बेहद कम ऐसी झलक देखने को मिलती है जहां परिवारवाद से कोई भी पार्टी अछूती हो।

ऐसे में बिहार की राजनीतिक पार्टियां भी परिवारवाद के इस शब्द से अछूती नहीं है। बिहार में इस विधानसभा चुनाव में करीबन 20 ऐसे चेहरे हैं जो परिवारवाद के नाम पर राजनीति में उतरे है। आइए हम आपको इनकी पूरी लिस्ट दिखाते हैं साथ ही समझाते हैं किसका ताल्लुक किस पार्टी और किस राजनेता से है…

तेजस्वी और तेजप्रताप यादव

बिहार की राजनीति में परिवारवाद का नाम आते ही सबसे पहले लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी के बेटे तेजस्वी यादव और तेजप्रताप यादव का नाम सामने आता है। लालू यादव ने साल 1990 से 1997 तक दो बार मुख्यमंत्री रहे जबकि राबड़ी देवी साल 1997 से 2005 तक तीन बार मुख्यमंत्री पद पर रही। राबड़ी देवी बिहार की एकलौती महिला मुख्यमंत्री के तौर पर जानी जाती है।

वही उनके दोनों बेटे तेजप्रताप यादव और तेजस्वी यादव अब तक चुनावी मैदान में कुछ खास कमाल नहीं दिखा पाए है। परिवारवाद की झलक के साथ दोनों ने राजनीति में कदम रखा, लेकिन दोनों ही राजनीति की पटरी पर अब तक अपनी गाड़ी सैट नहीं कर पाए हैं।

पुष्पम प्रिया चौधरी

इस लिस्ट में अगला नाम है पुष्पम प्रिया चौधरी का..पुष्पम प्रिया चौधरी विदेश से पढ़ाई कर बिहार की तस्वीर बदलने का सपना लिए बिहार की राजनीति में आई है। पुष्पम प्रिया चौधरी जेडीयू के एमएलसी विनोद चौधरी की बेटी है, हालांकि परिवार के ज्यादातर सदस्य राजनीति से ही ताल्लुक रखते हैं। ऐसे में हाल-फिलहाल राजनीति में कदम रख चुकी पुष्पम प्रिया चौधरी कितना कमाल दिखाती हैं यह तो चुनावी नतीजे आने के बाद ही सामने आएगा।

चंद्रिका राय

चंद्रिका राय पूर्व मुख्यमंत्री दरोगा प्रसाद राय के बेटे हैं। राजनीति से इनका और इनके परिवार का खासा गहरा नाता है। दरोगा प्रसाद राय 16 फरवरी 1970 से 22 दिसंबर 1970 तक मुख्यमंत्री रहे हैं। चंद्रिका 1985 से ही राजनीति में सक्रीय हैं। इसके चलते ही वह साल 1985 में कांग्रेस के टिकट पर विधायक बने थे। बाद में बेटी की शादी के साथ वह लालू यादव से जुड़ गए। दोनों के बीच बीते लंबे समय से चल रहे पारिवारिक कलह के बाद वह इस बार जदयू से ही लड़ रहे हैं।

नितेश मिश्रा

बिहार चुनाव में झंझारपुर से बीजेपी की ओर से टिकट लेकर लड़ रहे जेडीयू के विधायक रह चुके हैं। साल 2015 में जेडीयू के महागठबंधन में शामिल होने के बाद वह बीजेपी में आ गए थे इनका नाम है नितेश मिश्रा…नितेश मिश्रा पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्रा के बेटे है। बता दे जगन्नाथ मिश्रा दो बार बिहार के मुख्यमंत्री रह चुके हैं। उनका नाम चारा घोटाला के दौरान लालू प्रसाद यादव के साथ सामने आया था, हालांकि बाद में उन्हें बरी कर दिया गया।

दिव्या प्रकाश

दिव्या प्रकाश आरजेडी से टिकट पर लड़ रही है। दिव्या प्रकाश जयप्रकाश नारायण की बेटी है। जयप्रकाश नारायण की गिनती लालू प्रसाद यादव के करीबियों में होती है। इसके अलावा वह केंद्र में जल संसाधन मंत्री और बिहार सरकार में शिक्षा मंत्री भी रह चुके हैं।

चेतन आनंद

चेतन आनंद बिहार के बाहुबली नेता आनंद मोहन के बेटे है। उनकी मां का नाम लवली आनंद है, जो आरजेडी की टिकट पर सहरसा से चुनाव लड़ रही है। वहीं चेतन भी आरजेडी के ही उम्मीदवार है। आनंद मोहन और लवली आनंद दोनों सांसद रह चुके हैं। आनंद मोहन फिलहाल डीएम की हत्या मामले में उम्र कैद की सजा काट रहे हैं। ऐसे में चुनावी मैदान में उतरी मां-बेटी की जोड़ी क्या कमाल दिखाती है ये नतीजों के बाद साफ होगा।

श्रेयसी सिंह

बिहार के बड़े राजनीतिक परिवार से ताल्लुक रखने वाली श्रेयसी सिंह इस बार बीजेपी की ओर से चुनाव लड़ रही है। श्रेयसी एक इंटरनेशनल लेवल की शूटर है। कॉमनवेल्थ में वह गोल्ड मेडल जीत चुकी है। श्रेयसी सिंह के पिता दिग्विजय सिंह केंद्र में मंत्री हैं और उनकी माता कुलदेवी सांसद रह चुकी हैं।

सुभाषिनी यादव

सुभाषिनी शरद यादव की बेटी है। शरद यादव जदयू के अध्यक्ष रहे हैं, लेकिन मई 2018 में उन्होंने जेडीयू से अलग होकर लोकतांत्रिक जनता दल के नाम से पार्टी बनाई थी। सुभाषिनी के पति राजकमल राव भी हरियाणा के राजनीतिक घराने से ताल्लुक रखते हैं। सुभाषिनी कांग्रेस के टिकट पर इस बार बिहार चुनावी मैदान में उतरी हैं।

अजय यादव

अजय यादव राजेंद्र बाहुबली विधायक राजेंद्र यादव के बेटे हैं। वह अत्री सीट से लगातार तीन बार विधायक भी रह चुके हैं। मां कुंती देवी भी यहां दो बार विधायक रह चुकी हैं। साल 2015 में यहां से आरजेडी के टिकट पर उनकी मां ने चुनाव जीता था। इस बार अजय यादव आरजेडी से चुनाव लड़ रहे हैं।

कौशल कुमार उर्फ मणिकांत

कौशल कुमार उर्फ मणिकांत हरियाणा के राज्यपाल सत्यदेव नारायण आर्य के बेटे हैं। सत्य देव नारायण बीजेपी के कद्दावर नेताओं में गिने जाते हैं। वो राजगीर से 8 बार विधायक भी रह चुके हैं। हालांकि साल 2015 में हारने के बाद उन्हें हरियाणा का राज्यपाल बनाया गया था। इस बार उनके बेटे जेडीयू की ओर से चुनाव लड़े रहे है।

राहुल तिवारी

राहुल तिवारी मौजूदा समय में शाहजहांपुर से आरजेडी के विधायक हैं। उनके पिता शिवानंद तिवारी लालू प्रसाद यादव के साथ छात्र जीवन से जुड़े हुए हैं। हालांकि लालू प्रसाद यादव और शिवानंद तिवारी के बीच हुए मनमुटाव के बाद शिवानंद तिवारी ने नीतीश की पार्टी का हाथ थाम लिया था। उस दौरान शिवानंद तिवारी शाहपुर से विधायक भी रहे थे।

लव सिन्हा

शत्रुघ्न सिन्हा का राजनीतिक सिक्का ज्यादा नहीं चला है, ऐसे में यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि शत्रुघ्न सिन्हा के बेटे लव सिन्हा राजनीति में अपनी धाक जमा पाते हैं या नहीं। साल 2019 में लोकसभा चुनावों से पहले ही कांग्रेस में शामिल हुए शत्रुघ्न सिन्हा के बेटे इस बार बीजेपी के कांग्रेस की ओर से चुनावी मैदान में उतरे है।

शुभानंद मुकेश

शुभानंद मुकेश के पिता सदानंद सिंह हरगांव सीट से 9 बार विधायक रह चुके हैं। शुभानंद को इस बार कांग्रेस की ओर से टिकट मिला है। सदानंद सिंह विधानसभा अध्यक्ष भी रह चुके हैं। शुभानंद का राजनीति में यह पहला कदम है। ऐसे यह देखना दिलचस्प होगा कि वह अपने पिता की तरह राजनीति में कितनी पकड़ बना पाते हैं।