5वीं पास यह व्यक्ति आज उठाते हैं 21 करोड़ की सैलरी

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दोस्तों अपने बहुत बड़े बड़े कलाकारों की इंस्पिरेशनल स्टोरी सुनी होगी,पर आज हम आपको एक ऐसे व्यक्ति के संघर्ष की कहानी बताने जा रहे हैं जिसने अपना सब कुछ खत्म हो जाने के बाद भी हिम्मत नही हारी,और आज ये पूरी दुनिया में अपना नाम बना चुके हैं।

आज हम बात कर रहे हैं सबसे ज्यादा बिक्री होने वाले प्रोडक्ट के सीईओ,मसलों के बादशाह महाशय धरमपाल गुलाटी की। धरमपाल गुलाटी आज के समय में एक ऐसी हस्ती हैं जो किसी परिचय के मोहताज नही हैं। इनका जन्म पाकिस्तान में सियालकोट में हुआ था,इन्होंने केवल 5वीं तक पढ़ाई की है। जब साल 1947 देश का बंटवारा हुआ तो धरमपाल गुलाटी का परिवारी पाकिस्तान में अपना सबकुछ छोड़ कर दिल्ली चले आये और यहाँ कैंट में अपने परिवार के साथ रिफ्यूजी कैम्प में रहे।

इन्होंने 650 रुपए में एक टांगा खरीद कर अपनी आजीविका को शुरू करने का प्रयास किया। और कुछ दिन बाद इन्होंने अपने पुश्तैनी मसालों के कारोबार को ही शुरू कर दिया। साल 1991 में इनके पिता ने पाकिस्तान में एक मसाले की दुकान शुरू की थी। मगर उस वक़्त इन्होंने कल्पना भी नही की होगी कि एक दिन उनका बेटा इस छोटे से मसाले के कारोबार को 1500 करोड़ के व्यवसाय में बदल देगा।

इनकी कम्पनी का नाम MDH है जिसका मतलब है महाशय की हट्टी ।इन्होंने एक छोटी सी मसालों की दुकान से शुरू किए इस कारोबार को इतना बड़ा स्वरूप दे दिया। इन्होंने कम कीमत में अच्छे कॉलिटी का सामान उपलब्ध करवाया और यही आकर्षण का क्रेंद बना। धीरे धीरे ये आगे बढे और कई शहरों में अपना कदम जमा लिए। आज पूरे देश मे MDH की 15 फैक्ट्री चल रहीं हैं। इनके ऑफिस लंदन में भी हैं,इनके यहां से 1000 डीलरों को मसाले की सप्लाई की जाती है।

देसी मिर्च,चाट मसाला,छोले मसाला,सहित MDH 60 से भी ज्यादा प्रोडक्ट्स बनाते हैं। धरमपाल जी ने जरूरत मंदो की सहायता के मकसद से स्कूल, कॉलेज और हॉस्पिटल भी बनवाएं हैं,जहाँ निर्धन के लिए निशुल्क सेवा उपलब्ध है। इतना ही नही ये अपनी सैलरी का 90 फीसदी दान कर देते हैं। इस उम्र में भी यह अपनी फैक्ट्री और बाजार का खुद दौरा करते हैं जब तक पूरी तसल्ली न हो जाये इन्हें चैन नही मिलता।