सुपर 252 और 272 गेहूं बीज UP के किसानो की भी बनी पंसद , गेहूं से लहलहाई खेत

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पंजाब,हरियाणा, राजस्थान व उत्तराखंड के बाद अब उत्तर प्रदेश के किसानों की पहली पसंद बना यह बीज गाजियाबाद, 09 नवंबर।  गेहूं की फसल की उत्पादकता बढ़ाने के लिए विकसित किए गए सुपर 252 272 बीज ने गेहूं की फसल में क्रांति ला दी है। नतीजा यह है कि इस बीज को जो भी बोता है उसकी फसल लहलाने लगती है और खतरा भी नहीं है। आपको बता दें ये नयी बीज पंजाब, हरियाणा, राजस्थान व उत्तराखंड के बाद अब उत्तर प्रदेश के किसानों की भी पंसंद बन गयी है । दरअसल, किसानों की फसल उत्पादकता बढ़ाने में मदद करने के लिए वर्ष 2016 में सुपर 252 और सुपर 272 गेहूँ बीज लांच किये गए थे।बता दें पहले तो यह पंजाब, हरियाणा, राजस्थान व उत्तराखंड राज्य में ही इन बीजों से उपजी बंपर फसल लहलहा रही थी लेकिन अब उत्तरप्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों के किसान गेहूँ की इन किस्मों को खूब पसंद कर रहे हैं। यहां पर भी फसल लहलहा रही है। इन बीजों के प्रयोग से उत्तर प्रदेश के किसानों की गेहूं उत्पादकता बढ़ गयी है। अपनी अनुकूल क्षमता और उत्पादकता तथा पीली रतुआ बीमारी के प्रति अधिक सहनशीलता के चलते ये पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, उत्तराखण्ड एवं तराई क्षेत्रों में गेहूँ किसानों की पहली पसंद है। सुपर 252 और 272 गेहूँ बीज की फसल में ज्यादा बालियाँ व दाने बड़े और सुनहरे होते हैं और फसल की ऊंचाई भी उपयुक्त होती है। मजबूत कल्लों के कारण गिरने की शिकायत भी नहीं रहती। सुपर 252 जल्दी और देर से बुवाई के लिए भी उपयुक्त है। इन बीजों को लांच करने वाली श्रीराम फार्म सोलुशनस’ कम्पनी के बिजनेस हेड संजय छाबड़ा बताते हैं कि अयोध्या के किसान सुनील कुमार और आगरा के संसाबाद निवासी किसान हरी ओम सिंह की तरह अनेक किसानों ने सुपर 252 और 272 गेहूँ बीज बोने के बाद लहलहाती फसल पायी है। सुपर 252 और 272 गेहूं बीज के साथ-साथ अन्य किस्में जैसे सुपर 303 और सुपर 404 भी अपनी उत्पादकता के कारण पिछले कुछ सालों ही उत्तर प्रदेश के किसानों में बेहद लोकप्रिय हो गए हैं। श्री छाबड़ा का कहना है कि गेहूं के विश्व प्रसिद्ध वैज्ञानिकों के साथ मिलकर व्यापक शोध, परीक्षण और निरंतर सुधार के द्वारा इन विशेष किस्मों को विकसित किया है। आपको बता दें अनुसंधान और विकास की दिशा में हमारे प्रयासों ने ऐसी किस्मों को बनाने में मदद की है, जो अधिक कृषि उत्पादकता, विभिन्न जलवायु की लिए अनुकूलन क्षमता और बीमारियों के प्रति अधिक सहनशीलता प्रदान करती है।