एग्जिट पोल आने के बाद ब्यूरोक्रेट्स महागठबंधन के संपर्क में , बधाई और मिठाई देने में जुटे

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7 नवंबर को बिहार विधानसभा चुनाव का आखिरी मैच समाप्त हो गया । एग्जिट पोल के में महागठबंधन की सरकार बनते दिखाया गया हैं । ऐसे तो 10 नवंबर को रिजल्ट आएगा की कौन सत्ता का सुख लेगा और किसे यह चुनाव सताएगी। इधर एग्जिट पोल में महागठबंधन की बढ़त के बाद ब्यूरोक्रेट्स महागठबंधन के नेताओं से संपर्क साधना शुरू कर दिये हैं । बधाई और मिठाई देने का दौर शुरू हो गया हैं । वह ब्यूरोक्रेट्स जो कभी महागठबंधन से दूरी बनाकर रखते थे आज शीर्ष से संपर्क के लिए खास नजदीकी की तलाश कर रहे हैं । कुछ-एक को छोड़कर नेताओं व ब्यूरोक्रेट्स का हाल एक ही जैसा , गिरगिट की तरह रंग बदलते देर नहीं लगती ।केन्द्र हो या राज्य ,जैसे ही सरकार बदलती है ब्यूरोक्रेट्स के विभाग बदल दिये जाते हैं और नई सरकार अपने विश्वासी व भरोसेमंद को लाती हैं । एग्जिट पोल के मैथ्स के अनुसार तेजस्वी सरकार बनना तय है, इस तरह ब्यूरोक्रेट्स के भी ट्रांसफर -पोस्टिंग का सेटिंग्स होना तय माना जा रहा हैं । आधा दर्जन ब्यूरोक्रेट्स जो तेजस्वी व लालू यादव के शुभचिंतक रहे है उन्हें खास विभाग का शीर्ष पद मिलना तय हैं ।

मलाईदार पोस्ट के लिए दुहाई ,हम आपके है सर

एग्जिट पोल को सम्भावित रिजल्ट मानकर ब्यूरोक्रेट्स मलाईदार पोस्ट पाने और अपने पद को सुरक्षित रखने के लिए महागठबंधन से जुड़े नेताओं या शीर्ष के खास नजदीकी वाले को मख्खन लगाना शुरू कर दिया हैं । कई तो अपने या फिर अपने लोगों के हाथों नई सरकार बनने ,जीत दर्ज करने की बधाई ,फूलों की गुलदस्ता, काजू बरफी का डब्बा भेज रहे हैं । कई तो सीधा फोन पर बधाई दे रहे है और लगे हाथ दुहाई भी दे रहे है की सर हम आपके अपने है, बस ध्यान रखिएगा, किसी तरह के मान-सम्मान में कोई कमी नहीं करेंगे ।

ठप्पा लग चुके अधिकारियों में बड़ी बेचैनी

बिहार में नीतीश कुमार का करीब 15 साल शासनकाल रहा हैं । इसमें नीतीश कुमार के लिए करीब दो दर्जन ब्यूरोक्रेट्स भरोसेमंद रहे हैं । इन ब्यूरोक्रेट्स पर एक प्रकार से ठप्पा लग चुका हैं । कोरोना हो या बाढ़ या फिर शिक्षा विभाग व गृह विभाग , नीतीश के भरोसेमंद अधिकारियों ने हर तरह से सरकार की छवि बचाने के लिए हर हथकंडा अपनाया हैं । ऐसे अधिकारियों में बड़ी बेचैनी बढ़ गयी हैं । एग्जिट पोल के बाद अहम ओहदे पर रहने वाले ब्यूरोक्रेट्स सेंटिंग में पड़े अपने साथी मित्रों को फोन कर यह कहते दिखे की भाई अब तो तुम्हारा दिन आने वाला हैं । सुत्रों की मानें तो कई ब्यूरोक्रेट्स लंबित फाइल को फाइनल करने में जुटे हैं । शनिवार की रात तक सचिवालय में काम होना कुछ तो संदेश जरूर दे गया । हाल ही में महागठबंधन से एमएलसी बने एक विधान पार्षद ने अपने फेसबुक वाल पर लिखा है की गड़बड़ी नहीं होने दे, सक्रिय रहे और पुरी निगरानी रखें ,नहीं तो चूहे करामत कर देंगे ।

नौकरशाह पर रहेगा नीतीश का नियंत्रण

बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के पूर्व नीतीश कुमार की सरकार ने भारी मात्रा में जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक ,अनुमंडलाधिकारी (एसडीओ ) ,पुलिस उपाधीक्षक (डीएसपी ) ,भूमि उपसमाहर्ता (डीसीएलआर ) अंचलाधिकारी ( सीओ ) का ट्रांसफर किया था। इसमें अधिकांश नीतीश सरकार व एनडीए के भरोसेमंद थे । सुप्रीम कोर्ट के गाइड लाइन के अनुसार किसी पदाधिकारी /अधिकारी पर बिना गंभीर आरोप के तीन वर्षों तक हटाया नहीं जा सकता । इससे यह कहना कतई गलत नहीं होगा की सूबे में अगर सरकार बदल भी जाती है तो नौकरशाहों पर नीतीश सरकार व एनडीए से जुड़े लोगों का कम से कम ढाई वर्षों तक नियंत्रण रहेगा ।