भगवान श्री कृष्ण ने आखिर क्यों दिया अपने ही पुत्र को कोढ़ी होने का श्राप? बड़ी रोचक है कहानी

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हिन्दू ग्रंथों-हिन्दू पुराणों की बात करें तो हमारे हिन्दू पुराणों में भगवान विष्णु के विभिन्न अवतारों का वर्णन है. साथ ही 30 करोड़ से भी ज्यादा देवी-देवताओं के बारे में बताया गया है, जिसमे उनसे जुड़ी रहस्यमय पुराणिक कहानियां मौजूद है, जिसे बहुत कम लोग जानते हैं.

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ऐसी ही एक पुराणिक कथा भगवान विष्णु की भी है, जिसमे उनके और उनके पुत्र का वर्णन है. कहा जाता है कि भगवान विष्णु का एक अवतार कृष्ण अवतार भी था और उनके इस अवतार में उन्होंने अपने ही पुत्र सांबा को कोढ़ी होने का श्राप दे दिया था. आज इसी कहानी के बारे में बात करेंगे…

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बता दें, भगवान कृष्ण और जामवंती के विवाह की भी एक रोचक कहानी है, हिन्दू पुराणों के मुताबिक बहुमूल्य मणि को हासिल करने के लिए भगवान कृष्ण और जामवंत में पूरे 30 दिनों का युद्ध चला था जिसके चलते जब जामवंत ने कृष्ण का असली चेहरा पहचान लिया था तब उन्होंने कृष्ण को मणि भी दी और अपनी पुत्री जामवंती का हाथ भी उनके हाथ में दे दिया.

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भगवान कृष्ण और जामवंती का एक पुत्र था जिसका नाम सांबा था. कृष्ण का पुत्र बहुत सुन्दर था जिसके चलते कृष्ण की एक रानी ने उनके पुत्र के आकर्षक रूप से प्रभावित होकर, सांबा की पत्नी का रूप धारण कर उसे आलिंगन में भर लिया. कृष्ण ने यह सब देख लिया, इसी बात से गुस्सा होकर कृष्ण ने सांबा को कोढ़ी हो जाने का श्राप दे दिया था.

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हिन्दू पुराणों के मुताबिक़, महर्षि कटक ने सांबा को कृष्ण के दिए कोढ़ी के श्राप से मुक्त करने का उपाय दिया. उन्होंने सांबा को सूर्य देव की उपासना करने को कहा. उनका कहा मानकर सांबा ने सूर्य देव की उपासना भी की और उनका चंद्रभागा नदी के किनारे मंदिर भी बनवाया और सांबा ने सूर्य देव की 12 सालों तक तपस्या भी की.

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माना जाता है कि सूर्य देव ने सांबा कि कड़ी तपस्या से खुश होकर उसे कोढ़ मुक्त जीवन जीने के लिए नदी में स्नान करने को कहा. आज भी चंद्रभागा नदी को कोढ़ ठीक करने वाली नदी कहा जाता है. इस नदी में स्नान करने से व्यक्ति जल्द ही ठीक हो जाता है.