कभी कचरे के ढेर से जूठन चुनकर पेट भरती थी, आज अपनी मेहनत के दम पर हैं 1800 करोड़ के कंपनी की मालकिन

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    हम अपने जीवन में सफलता के लिए बैठकर योजना बनाते हैं या फिर सोते हुए उसके लिए सपना देखते हैं। लेकिन बैठकर योजना बनाने यह सपने देखने मात्र से इंसान सफल नहीं होता बल्कि जो अपने सपने के लिए सोना तक छोड़कर जी जान लगा दे वह इंसान सफल होता है। किसी एग्जाम को टॉप कर जाना सफलता का पैमाना मन नहीं माना जाता है, अपितु अनेक बार फेल होने के बाद भी हार ना मानना और लगातार प्रयासरत रह कर कुछ कर दिखाना सफलता है।

    ऐसी ही कहानी है अमेरिका की जानी-मानी कंपनी ‘नैस्टी गेल‘ (Nasty gale) की मालकिन ‘सोफिया अमोरूसो‘ (Sofia Amoruso) की जिन्होंने अपने जीवन के तमाम उतार-चढ़ाव के बावजूद भी सफलता का एक अनूठा उदाहरण प्रस्तुत किया है।

    Sofia Amoruso
    kenfolios.com

    1984 मैं अमेरिका के कैलिफोर्निया में जन्मी सोफिया को जब पता चला कि उनको ‘डिप्रेशन और अटेंशन डेफिसिट हाइपर एक्टिवीटी डिसऑर्डर की बीमारी हुई है तो मजबूरी बस उन्हें स्कूल छोड़ना पड़ा। उसी दौरान उनके माता-पिता की नौकरी भी छूट गई जिसके कारण परिस्थितियाँ और भी खराब हो गई। उस समय उनकी उम्र मात्र 9 साल की थी और जीवन यापन के लिए उसी उम्र में उन्होंने लेमोनेड की शॉप खोल ली।

    22 वर्ष तक की होते-होते बंजारों की तरह ज़िन्दगी जीते हुए उन्होंने लगभग 10 तरह की नौकरियाँ की थी, जिसमें चोरी भी शामिल थी। ऐसे ही एक चोरी के क्रम में वह पकड़ी गई और सजा पूरी होने के बाद उन्होंने निर्णय किया कि अब वह यह जीवन शैली बदल देंगी और फिर सैन फ्रांसिस्को में अपना क़िस्मत आजमाने चली गई।

    इस दौरान उन्होंने ‘ई-बे’ पर ‘नास्टिक गैल विंटेज’ नामक एक ऑनलाइन स्टोर खोला जो महिलाओं के कपड़ों से सम्बंधित था। इसके लिए सोफिया चैरिटी शॉप पर जाकर कपड़े चुनती थी, और फिर उसे अपने हिसाब से डिजाइन कर उसका फोटो लेती थी और उसे उचित कैप्शन के साथ ऊंचे दाम पर बेचती थी और ख़ुद से जाकर डिलीवर भी करती थीं। धीरे-धीरे उनका स्टोर बहुत प्रचलित हो गया। अपने फैशन ब्रांड के प्रचार-प्रसार के लिए उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स जैसे ‘माय स्पेस’ और ‘फेसबुक’ का काफ़ी अच्छा उपयोग किया और उनका स्टोर काफ़ी लोकप्रिय हो गया।

    2008 में ‘ई-बे’ ‘नैस्टी गैल’ पर अपने ख़ुद के ब्रांड को आरोप लगाते हुए उनका अकाउंट ब्लॉक कर दिया। तब सोफिया ने समय ना गँवाते हुए तत्काल ई-बे से हटकर लॉस एंजेलिस में अपने कर्मचारियों के साथ स्वयं का रिटेल स्टोर खोल दिया और शीघ्र ही 315 करोड रुपए की पूंजी एकत्रित कर लिए। उस समय उनके कंपनी की क़ीमत 1800 करोड़ रुपए की हो गई।

    उन्होंने 2012 में अपने कठिन परिश्रम और प्रयासों के बदौलत ‘फोर्ब्स’ के धनी महिलाओं की सूची में जगह पाने में सफलता हासिल किया।

    सोफिया ने ना केवल बिजनेस बल्कि महिला इंटरप्रेन्योर और महिला फैशन के क्षेत्र में भी कीर्तिमान स्थापित किया है। उन्होंने महिलाओं के लिए समाज में जो ग़लत और अवधारणाएँ प्रचलित हैं उसे उखाड़ फेंका और आधुनिक नारीवाद का एक बहुत-ही अच्छा उदाहरण प्रस्तुत किया है। आज सोफिया महिलाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं इनके सफलता के इस सफ़र को नेट फ्लिक्स पर ‘गर्ल बॉस’ नाम के सीरीज के माध्यम से चित्रण भी किया जा चुका है।

    सोफिया ने अपने अथक प्रयासों से दुनिया को यह दिखाया कि अगर आपने अपने डर के ऊपर जीत प्राप्त कर लिया है तो दुनिया की कोई भी नाकामयाबी आपको हरा नहीं सकती बस ज़रूरत है तो सिर्फ़ दृढ़ संकल्पित होकर अपने सपने के पीछे लगे रहने की।