इंदिरा गांधी की हत्या की कहानी: खास लोगों ने मारी थी 28 गोलियां, चढ़ाया गया था 80 बोतल खून

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इंदिरा गांधी की मौत का दिन आज भी गांधी परिवार के लिए किसी भायावह दिन से कम नहीं है ।इसकी पटकथा पहले से ही तैयार की जा चुकी थी। दिन था 30 अक्टूबर 1984 इंदिरा गांधी चुनावी भाषण तैयार कर रही थी। उसे हमेशा की तरह उनके सूचना सलाहकार एच वाई शारदा प्रसाद ने तैयार किया था। हाथ में पर्चा लिए इंदिरा गांधी पर्चे से अलग अपने मन के भाव बोल रही थी।

इंदिरा के बोलने का तेवर भी काफी बदले हुए थे। ये बेहद अजीब बात थी कि इंदिरा अचानक से कहने लगी कि मैं आज यहां हूं, शायद कल यहां ना रहूं…मुझे इस बात की कोई चिंता नहीं है, मेरा जीवन काल काफी लंबा रहा है और मुझे अपने जीवन काल में बिताए अपने हर पल पर गर्व है। मैंने अपना पूरा जीवन अपने लोगों की सेवा में बिताया है।

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अपने इस भाषण के अगले दिन सुबह 31 अक्टूबर 1984 को इंदिरा सुबह करीबन 7:30 बजे उठी और तैयार होकर बाहर आ गई। उन्होंने केसरिया रंग की साड़ी पहनी थी जिसका बॉर्डर काला था। इंदिरा का पूरे दिन का शेड्यूल पहले से ही बिजी था। उन्हें पहली मुलाकात पीटर उस्तीनोव से करनी थी जो कि इंदिरा की डॉक्यूमेंट्री बना रहे थे।

इसके बाद उन्हें दोपहर में ब्रिटेन के पूर्व प्रधान मंत्री जेम्स कैलेघन और मिजोरम के एक बड़े नेता से मुलाकात करनी थी। इसके अलावा वह शाम को ब्रिटेन की राजकुमारी के साथ डिनर करने वाली थी। इंदिरा का पूरे दिन का शेड्यूल काफी व्यस्त था। ऐसे में वह नाश्ते की टेबल पर पहुंची उनके डॉक्टर ने आकर उनका चेकअप किया। डॉक्टर केपी माथुर ने उनका रूटीन चेकअप किया और चले गए।

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इसके बाद करीबन 9:10 पर इंदिरा अपने घर के बाहर आई उस दौरान सिपाही नारायण सिंह ने काला छाता खोलकर इंदिरा गांधी के पास पहुंचे और साथ-साथ ही वह उनके बगल में चलने लगे। इंदिरा के कुछ कदम पीछे ही आरके धवन और उनके पीछे इंदिरा के खास सेवक नाथूराम चल रहे थे। इन सब के पीछे इंदिरा के निजी सुरक्षा अधिकारी सब इंस्पेक्टर रामेश्वर दयाल थे।

इस दौरान इन सभी खास लोगों के बीच चलते हुए इंदिरा गांधी आरके धवन से अपने उस दिन के शेड्यूल के बारे में बात कर रही थी, कि तभी अचानक से वहां तैनात सुरक्षाकर्मी ने बेअंत सिंह ने अपनी रिवाल्वर निकाली और इंदिरा गांधी पर फायर करना शुरू कर दिया। बेअंत सिंह की पहली गोली इंदिरा गांधी की पेट में लगी। इसके बाद इंदिरा गांधी ने अपना चेहरा बचाते हुए अपना दाहिना हाथ ऊपर उठाया कि तभी बेअंत ने दूसरी गोली पॉइंट करते हुए उनके सीने और कमर पर दाग दी।

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वहीं से करीबन 5 फीट दूरी पर खड़े सतवंत सिंह को बेअंत सिंह ने चिल्लाकर कहा गोलियां चलाओ। तभी सतवंत ने अपनी टॉमसन ऑटोमेटिक कारबाइन से करीबन 25 गोलियां इंदिरा पर चलाई। गोलियों की गड़गड़ाहट इतनी ज्यादा थी कि वहां मौजूद कोई भी हिला नहीं। तभी इंदिरा के पीछे चल रहे रामेश्वर दयाल ने आगे दौड़ना शुरू किया तो सतवंत सिंह ने उनकी जांघ और पैरों पर गोलियां चला दी और वह वहीं ढेर हो गए।

28 गोलियां लगने के बाद इंदिरा पूरी तरह क्षत-विक्षत हो गई थी। तभी एक पुलिस अफसर दिनेश भट्ट भागते हुए वहां आए उसी समय बेअंत सिंह और सतवंत सिंह दोनों ने अपने हथियार नीचे डाल दिए और उन्होंने कहा हमें जो करना था हमने कर दिया…अब तुम्हें जो करना है तुम करो।

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वहां मौजूद एक पक्ष ने बेअंत सिंह और सतवंत सिंह पर हमला किया और उन्हें आईटीबीपी के जवानों ने अपने घेरे में ले लिया। वहीं दूसरी ओर इंदिरा के घर के बाहर हमेशा एक एंबुलेंस खड़ी रहती थी जो उस दिन भी खड़ी थी, लेकिन उस दिन उसका ड्राइवर वहां से नदारद था।

ऐसे में इंदिरा के राजनीतिक सलाहकार माखनलाल फोतेदार ने चिल्लाकर कार निकालने को कहा…वही इंद्रा को जमीन से आरके धवन और कुछ सुरक्षाकर्मियों ने उठाकर सफेद एम्बेस्डर कार की पीछे वाली सीट पर रखा। सोनिया गांधी भी दौड़ती हुई बाहर आए और चिल्लाने लगी। इंदिरा गांधी को बेसुध हालत में देखकर सोनिया नंगे पांव कार में बैठ गई और इंदिरा का सर अपनी गोद में ले लिया।

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कार तेज रफ्तार के साथ एम्स अस्पताल के आगे जाकर रुकी। इंदिरा को कार से निकालकर हॉस्पिटल के अंदर ले जाने में करीबन 3 मिनट लग गए। अंदर ले जाते ही डॉक्टरों ने इंदिरा को खून चढ़ाने की बात कही। जांच के साथ ही इंदिरा को करीबन 80 बोतल खून चढ़ाया गया, जो कि एक आम इंसान के शरीर का 5 गुना है।

इसके बाद एम्स के वरिष्ठ कार्डियोलॉजिस्ट को इसकी सूचना दी गई। कुछ मिनटों में डॉक्टर गुलेरिया, डॉक्टर एमएम कपूर, डॉक्टर एस बालाराम इंदिरा के वार्ड में पहुंचे और इंदिरा के का इलाज शुरू किया। जांच के बाद डॉक्टरों ने बताया कि इंद्रा की नाड़ी की धड़कन नहीं मिल रही है और उनके दिल की गतिविधि भी काफी मामूली है। उनकी आंखों की पुतलियां फैली हुई है उनका दिमाग पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो चुका है।

वहां मौजूद डॉक्टरों ने यह बात भाप ली थी कि इंदिरा अब इस दुनिया में नहीं है, लेकिन इसके बावजूद भी ईसीजी किया गया और इस बात की पुष्टि हुई कि इंदिरा मर चुकी थी। इसके बावजूद बाद वहां मौजूद ड़क्टरों ने जब स्वास्थ्य मंत्री शंकरानंद से पूछा अब क्या करना है, तो शंकरानंद ने तुरंत जवाब दिया नहीं अभी इन्हें ऑपरेशन थिएटर में ले जाये।

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इंदिरा की जीवनी पर कहानी लिखने वाले इंदर मल्होत्रा ने इंदिरा के आखिरी समय का जिक्र करते हुए बताया है कि गोली लगने के करीबन 4 घंटे बाद यानी 2:23 पर इंदिरा को मृत घोषित कर दिया गया, लेकिन सरकार की ओर से इसकी आधिकारिक तौर पर घोषणा शाम 6:00 बजे की गई।

दरअसल इंदिरा गांधी पर हमले की सूचना पहले ही मिल गई थी। साथ ही यह भी सिफारिश की गई थी कि सिख समुदाय के सुरक्षाकर्मियों को उनके निवास स्थान से हटा दिया जाए। वहीं इस बात का जिक्र जब इंदिरा गांधी से कहा किया गया तो इंदिरा ने बेहद कड़े शब्दों में कहा- आर नॉट वी सर्कुलर? उसके बाद यह तय किया गया कि एक साथ दो सिख सुरक्षाकर्मियों को उनके नजदीक ड्यूटी पर नहीं लगाया जाएगा।

इस बदलाव के तहत ही सुरक्षाकर्मी सतवंत सिंह और बेअंत सिंह को अलग-अलग जगह तैनात किया गया था, लेकिन सतवंत सिंह ने पेट खराब होने का बहाना किया जिसके बाद उन्हें शौचालय के नजदीक ड्यूटी दे दी गई। इस तरह बेअंत सिंह और सतवंत सिंह एक बार फिर एक साथ तैनात हो गए और दोनों ने इंदिरा गांधी को मारने की साजिश एक साथ रची।