गांधी परिवार ने राजीव गांधी के हत्यारों को कर दिया था माफ, जानिये क्या था इतने बड़े फैसले का कारण

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गांधी परिवार के नाम का जब भी कभी जिक्र होता है तो परिवार से जुड़े एक से बढ़कर एक रहस्य सामने आते हैं। ऐसे में राजीव गांधी की मौत और उनके हत्यारे को माफ करने की कहानी भी अपने आप में एक रहस्य है। इस बात को राजनीति की दुनिया में दो नजरिए से देखा जाता है। एक नजरिया वह जो सोनिया गांधी के इस फैसले का मुरीद है, तो वही दूसरा एक तबका ऐसा भी है जो इससे राजनीतिक पहलू की साजिश का नाम देता है। आज भी लोग इस सवाल को लेकर अक्सर विवाद खड़ा करते हैं कि आखिर क्या वजह थी कि सोनिया गांधी ने राजीव गांधी के हत्यारों को माफ कर दिया? आइए हम बताते हैं कि इसके पीछे क्या कारण था…

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यह बात 21 मई 1991 साल 1991 में की है, जब देश के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की बम धमाके में हत्या कर दी गई। तमिलनाडु के श्रीपेरंबदूर में हुए बम ब्लास्ट में सोनिया गांधी ने अपने पति और देश ने अपने प्रधानमंत्री को खो दिया। यह वो वक्त था जब गांधी परिवार गम में डूबा हुआ था, लेकिन ऐसे में जब सोनिया गांधी को पति राजीव गांधी की हत्या में शामिल नलीनी श्रीहरण के बारे में पता चला तो उन्होंने उन्हें माफ करने का फैसला किया।

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दरअसल राजीव गांधी की हत्या की साजिश साल 1990 में खतरनाक आतंकी प्रभाकरण ने रची थी। उसने अपने इस प्लान में खास तौर पर 4 लोगों को शामिल किया था, जिसमें बेबी सुब्रमण्यम, मुथुराजा, मुर्गन और शिवराज का नाम शामिल था।

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इसके बाद यह लोग अपने प्लान को अंजाम देने के लिए चेन्नई पहुंचे, जहां इन्हें लोकल सपोर्ट की जरूरत थी। ऐसे में बेबी सुब्रमण्यम ने शुभा न्यूज़ एजेंसी में काम करना शुरू कर दिया। इस दौरान उन्होंने वहां काम करने वाले भाग्यनाथन को अपने झांसे में फंसाया। नलिनी भाग्यनाथन की ही बहन थी और उस दौरान वह भी प्रिंटिंग प्रेस में ही काम करती थी।

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नलिनी भी पैसों के चलते इन लोगों के प्लान में शामिल हो गई। इन लोगों ने पहले नलिनी को राजीव गांधी के खिलाफ भड़काया और फिर अपने प्लान में शामिल कर दिया। इसके बाद साजिश के तहत एक बम धमाका प्लान करते हुए राजीव गांधी की हत्या कर दी। वहीं हत्या की जांच पड़ताल के बाद जब नलिनी को राजीव गांधी की हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया गया इस दौरान नलिनी पहले से गर्भवती थी।

प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या के मामले में गिरफ्तार नलिनी 2 महीने से गर्भवती थी। नलिनी को फांसी होना तय था और उनका परिवार भी इस मामले में अपनी पूरी उम्मीद खो चुका था। ऐसे में अचानक खबर सामने आई कि सोनिया गांधी ने नलिनी को माफ करने का फैसला किया है। यह खबर सुनकर सभी चौक गए।

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दरअसल हुआ कुछ ऐसा कि साल 1999 में गांधी परिवार ने राजीव गांधी हत्याकांड की मेन दोषी नलिनी को माफ करने का फैसला किया। 18 नवंबर 1999 को सोनिया गांधी ने तत्कालीन राष्ट्रपति केआर नारायण को अचानक मिलने के लिए बुलाया। इसके बाद जब राष्ट्रपति सोनिया गांधी के पास पहुंचे तो सोनिया गांधी ने बेहद भावुक लहजे में कहा कि वह और उनके बच्चे नलिनी को माफ करने की अपील करते हैं। केआर नारायण सोनिया गांधी का यह फैसला सुनकर सन्न रह गए थे।

जहां दूसरी ओर नलिनी का परिवार नलिनी के जीवन की सांसों की आगे की उम्मीद छोड़ चुका था तो वहीं सोनिया गांधी के इस फैसले से उन्हें एक बार फिर उम्मीद जाग गई थी। सोनिया गांधी ने अपने इस फैसले का कारण बताते हुए कहा कि वह नहीं चाहती कि किसी की गलती की सजा एक मासूम से बच्चे को मिले, जो अभी इस दुनिया में आया भी नहीं।

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इसके बाद साल 2008 में प्रियंका गांधी राजीव गांधी की हत्या करने वाली नलिनी से मुलाकात करने वेल्लोर सेंट्रल जेल पहुंची। इस दौरान उन्होंने एक बार फिर नलिनी से ऐसा करने का कारण पूछा, तो नलिनी ने उन्हें पूरा किस्सा सुनाया और बताया कि किस वजह से उन्होंने यह कदम उठाया।

बता दे कोर्ट ने नलिनी को प्रधानमंत्री राजीव गांधी की मौत के मामले में फांसी की सजा सुनाई थी, लेकिन सोनिया गांधी की माफी के चलते उनकी यह सजा फांसी से आजीवन कारावास में बदल गई थी।