किसानों को न्याय, स्वाभिमान और स्वावलंबन की जिंदगी देना छत्तीसगढ़ सरकार का लक्ष्य: श्री भूपेश बघेल

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रायपुर 11 अक्टूबर 2020 मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने आज अपनी रेडियो वार्ता लोकवाणी की 11वीं कड़ी में ‘‘नवा छत्तीसगढ़: हमर विकास-मोर कहानी’’ विषय पर अपने विचार रखे। मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों को न्याय, स्वाभिमान और स्वावलंबन की जिंदगी देना राज्य सरकार का लक्ष्य है। इसके लिए राज्य सरकार ने धान का दाम 2500 रुपये क्विंटल, कृषि ऋण माफी, सिंचाई कर माफी, रियायती बिजली, अनुसूचित जाति-जनजाति वर्ग के किसानों को खेती के लिए निःशुल्क बिजली जैसी योजनाएं लागू की, ताकि किसानों के चेहरे पर मुस्कुराहट लौट आए। श्री बघेल ने रेडियो वार्ता में नयी सरकार द्वारा पौने दो वर्ष में शिक्षा, स्वास्थ्य, ग्रामीणों-किसानों की आय में वृद्धि, छत्तीसगढ़ी संस्कृति को प्रोत्साहन के लिए लागू की गयी योजनाओं की विस्तार से जानकारी दी। लोकवाणी में रेडियो श्रोताओं ने राज्य सरकार की योजनाओं की मुक्तकंठ से सराहना की।

‘मुख्यमंत्री विशेष स्वास्थ्य सहायता योजना’ से लाभान्वित दो जरुरमंदों ने लोकवाणी में श्री बघेल को दिया धन्यवाद

गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए राज्य सरकार की ‘मुख्यमंत्री विशेष स्वास्थ्य सहायता योजना’ संजीवनी बूटी साबित हो रही है। बिलासपुर के तिफरा के श्री राजेन्द्र कुमार सोनी ने लोकवाणी के माध्यम से बताया कि उनके 8 वर्षीय पुत्र कुणाल सोनी को ब्लड कैंसर के इलाज के लिए ‘मुख्यमंत्री विशेष स्वास्थ्य सहायता योजना’ से 20 लाख रुपए की सहायता मिली, जिससे उनके पुत्र का बोन मेरो ट्रांसप्लांट हो गया है। इसी तरह जिला जांजगीर-चांपा की तहसील जैजेपुर के ग्राम बेथिया के श्री अजीत कुमार जांगडे़ ने बताया की उनके 14 वर्षीय पुत्र लक्की जांगड़े को मेजर थैलेसिमिया नाम की बीमारी हो गयी है। इसी योजना से मिली 14 लाख रुपए की सहायता से उनके पुत्र का बोन मेरो ट्रांसप्लांट हो गया है। श्री सोनी और श्री जांगड़े ने अपने पुत्र का इलाज सीएमसी हॉस्पिटल वेल्लोर में कराया। दोनों ने ‘मुख्यमंत्री विशेष स्वास्थ्य सहायता योजना’ से मिली सहायता के लिए मुख्यमंत्री के प्रति आभार प्रकट करते हुए उन्हें धन्यवाद दिया।

मुख्यमंत्री ने बड़ी ही विनम्रता के साथ इस संबंध में कहा कि निश्चित तौर पर संवेदना के स्तर पर मैं ऐसे हर परिवार के साथ जुड़ा हूं जिन्हंे इलाज के लिए मदद की जरूरत है। उन्होंने कहा कि कृपया कोई यह न समझे कि हमने किसी पर कोई उपकार किया है। यह सुविधा मिलना आपका हक था जो हमने आपको आदर, विनम्रता और गरिमा के साथ दिया है। श्री बघेल ने कहा कि ‘डॉ. खूबचंद बघेल स्वास्थ्य सहायता योजना’ के अंतर्गत 9 माह में 2 लाख 71 हजार लोगांे को 50 हजार रुपए तक इलाज की सुविधा निःशुल्क दी गई है। वहीं मुख्यमंत्री विशेष स्वास्थ्य योजना के अंतर्गत 9 माह में 315 लोगों को 20 लाख रुपए तक उपचार की सुविधा दी गई है। सिर्फ इन दो योजनाओं में ही लगभग 350 करोड़ रूपए खर्च किए गए। स्वास्थ्य सुविधाओं को हर समुदाय और घरों तक पहुंचाया जा रहा है। हाट-बाजार क्लीनिक योजना, शहरी स्लम स्वास्थ्य योजना की अपार सफलता और लाखों लोगों के उपचार से प्रेरित होकर अब ‘डॉ. राधाबाई डायग्नोस्टिक सेंटर योजना’ की शुरुआत की जा रही है।

कोरोना से बचने करें सुरक्षा उपायों का पालन

मुख्यमंत्री ने रेडियो वार्ता के माध्यम से प्रदेशवासियों से कहा कि कोरोना को देखते हुए हमें बड़े और भीड़ वाले कार्यक्रमों से बचना है। इसलिए न खुद ऐसे आयोजन करना है और न भीड़ में शामिल होना है। उन्होंने प्रदेशवासियों से यह अनुरोध भी किया कि सभी मास्क के उपयोग सहित सुरक्षा उपायों का पालन करें और घर में रहकर परिवार के साथ खुशियाँ मनाएं। मुख्यमंत्री ने लोकवाणी में प्रदेशवासियों को नवरात्र, दशहरा, अग्रसेन जयंती, ईद-मिलादुन्नबी की शुभकामनाएं दीं।

छत्तीसगढ़ की संस्कृति को संरक्षित कर गढ़ रहे नवा छत्तीसगढ़

मुख्यमंत्री ने कहा कि नवा छत्तीसगढ़ गढ़ने का अर्थ हमारी लुप्त होती संस्कृति, बोली-भाषा, खान-पान, मूल्य-संस्कार को बचाते हुए विकास का नया रास्ता बनाना है। हमारा प्रयास है कि योजनाएं इस प्रकार बने कि एक योजना का फायदा दूसरी योजना में भी लोगों को मिले। उन्होंने कहा कि जैसे गरवा, गोठान और गोधन न्याय योजना प्रारंभ की गई है। वर्मीकम्पोस्ट के उत्पादन और उपयोग से धान के उत्पादन और बाड़ी की फसलों को भी फायदा मिलेगा। नरवा के विकास का लाभ भी सभी को मिलेगा।

बाजार और कम्पनियों को भी करनी होगी छत्तीसगढ़ी में अपनी बात

रायपुर की दक्षश्री साहू ने लोकवाणी के माध्यम से मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि छत्तीसगढ़िया लोगों की चिन्हारी छत्तीसगढ़ी भाषा को भी उचित स्थान मिलना चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि हम छत्तीसगढ़ी भाषा की जितनी सेवा करेंगे, जितना उपयोग और प्रचार करेंगे, उतना ही हमारी संस्कृति और भाषा का विकास होगा। बाजार और कम्पनियों को भी छत्तीसगढ़ी में बात करनी होगी। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ी को आठवीं अनुसूची में शामिल करने के लिए विधानसभा में संकल्प पारित कराके, केन्द्र सरकार को भेजा गया है। हम अपनी ताकत से छत्तीसगढ़ी भाषा को सिरमौर बना सकते हैं।

मुख्यमंत्री ने रेडियो वार्ता के माध्यम से किसानों द्वारा राज्य सरकार की योजनाओं की सराहना के संबंध में कहा कि आप लोगों की बातें सुनकर मुझे काफी संतोष का अनुभव हो रहा है। किसानों के लिए हम जो करना चाहते थे उसमें सफल हुए हैं। ‘राजीव गांधी किसान न्याय योजना’ के तहत 5 हजार 700 करोड़ रुपए देने का वायदा, आधा से ज्यादा पूरा हो चुका है। शेष राशि भी आपको जल्दी ही मिल जाएगी। अनेक श्रोताओं ने लोकवाणी के माध्यम से बस्तर क्षेत्र के दूरस्थ अंचलों में सोलर लाईट, मुख्यमंत्री सुपोषण योजना, वनोपज संग्रहण से महिला स्व सहायता समूहों को मिल रहे लाभ से आ रहे बदलाव और कोरोना काल में आमचो रेडियो योजना के माध्यम से बच्चों को स्कूलों से जोड़े रखने में मिल रही सफलता की जानकारी दी।

बिजली ही नहीं, शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य सुविधाओं की रौशनी भी पहुंची बस्तर

मुख्यमंत्री ने इस संबंध में कहा कि हमने वायदा किया था कि बस्तर में विकास की जो नई शुरुआत होगी, वह आपसी समझ, आपसी विश्वास की बुनियाद पर होगी। घर और गांव रोशन हो गये हैं, तो मन को बहुत संतोष हुआ। बस्तर के दूरस्थ अंचल में 11 हजार 886 घरों में क्रेडा द्वारा बिजली पहुंचायी गयी। बिजली ही नहीं, शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य सुविधाओं की रौशनी भी बस्तर अंचल में पहुंचायी गई है। सुकमा जिले के जगरगुंडा नक्सल प्रभावित गांव में 13 साल बंद स्कूल चालू हो गये। बस्तर ने कुपोषण मुक्ति की अलख जगाई। मुख्यमंत्री सुपोषण योजना बनाई गई और एक साल में पूरे प्रदेश में कुपोषण की दर 13.79 प्रतिशत कम हुई। तेंदूपत्ता संग्रहण पारिश्रमिक बढ़ाने के साथ लघु वनोपज खरीदने का दायरा 7 से बढ़ाकर 31 किया। इससे छत्तीसगढ़ देश में सर्वाधिक वनोपज खरीदने वाला राज्य बन गए। मनरेगा कोरोना काल में तो यह लाइफ-लाइन बन गई और इसमें भी देश में सर्वाधिक काम देने का कीर्तिमान बना।

दन्तेवाड़ा में बनेगा मल्टीस्किल सेंटर

लोहाण्डीगुड़ा में आदिवासी किसानों की जमीन वापसी से उपजा उत्साह प्रदेश में 200 फूड पार्क स्थापित करने का माध्यम बन गया। 101 फूडपार्क के लिए जमीन चिन्हांकित हो चुकी है। जेल में बंद करीब 900 आदिवासियों की मुक्ति सुनिश्चित की गई है। अब तो आमचो बस्तर की धमक भी सुनाई पड़ रही है। इमली, हल्दी, काजू, कॉफी को आप लोगों ने बस्तर ब्रांड बना दिया है। हम बोधघाट बहुद्देशीय परियोजना बनाएंगे और इंद्रावती नदी को बचाएंगे। भोपालपटनम में बांस आधारित कारखाना लगाएंगे। कोंडागांव में मक्का प्रसंस्करण करेंगे। दन्तेवाड़ा में मल्टीस्किल सेंटर स्थापित करेंगे। बस्तर कुपोषण मुक्त होगा, मलेरिया मुक्त होगा और हर तरह के अन्यायों से भी मुक्त होगा, यह मेरा वायदा है। नारायणपुर में उच्च क्षमता का ‘मोबाइल-टॉवर’ और जगदलपुर से हैदराबाद-रायपुर की हवाई कनेक्टिविटी से हालात और तेजी से बदलेंगे। अब बदलता हुआ बस्तर सब के सामने है और आप लोगांे की आवाजों की चहक, इसका सबसे बड़ा प्रमाण है।

वन अधिकार पत्र मिलने से वनांचल क्षेत्र में विकास की नई शुरूआत

अनेक रेडियो श्रोताओं ने बताया कि वनांचल क्षेत्रों में वनवासियों को वन अधिकार पत्र और सामुदायिक वन अधिकार पत्र मिलने से वनांचल क्षेत्र में विकास की नई शुरूआत हो रही है। मुख्यमंत्री ने इस संबंध में कहा कि वन अधिकार पत्र के दावों को खारिज करके जो अन्याय किया गया था, सरकार में आते ही उस पर कार्यवाही का निर्णय लिया गया। निरस्त दावों में से 40 हजार से ज्यादा लोगों को व्यक्तिगत पट्टे और 46 हजार सामुदायिक पट्टे दिए गए। सामुदायिक पट्टे देने के मामले में तो यह एक नई क्रांति हुई है। इस प्रकार प्रदेश में 4 लाख 87 हजार भू-अधिकार पट्टों के माध्यम से 51 लाख एकड़ भूमि का पट्टा दिया जा चुका है, जो देश में सर्वाधिक है। यह कार्य सिर्फ बस्तर ही नहीं, बल्कि प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में हुआ है। इन वन अधिकार पट्टों से मिली जमीनों में, अब दर्जनों गांवों में खेती, पशुपालन, मछलीपालन तथा आजीविका के नये-नये काम हो रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कोरोना काल में शिक्षा दे रहे शिक्षकों-शिक्षिकाओं को दिया साधुवाद

मुख्यमंत्री श्री बघेल ने लोकवाणी के माध्यम से बच्चों को कोरोना काल में नवाचारों के जरिए शिक्षा दे रहे समस्त शिक्षकों और शिक्षिकाओं को साधुवाद दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि नई सरकार ने 14 हजार 850 स्थाई शिक्षकों की भर्ती, पहिली तथा दूसरी कक्षा के बच्चों को 20 बोली-भाषाओं में द्विभाषी पाठ्यपुस्तकों का वितरण, स्वामी आत्मानंद शासकीय इंग्लिश मिडियम स्कूल योजना के तहत 51 सरकारी आदर्श अंग्रेजी मीडियम स्कूल खोलने जैसे बड़े निर्णय लिए। शिक्षाकर्मियों का संविलियन 2 वर्षों में पूरा करने का वायदा भी निभाया है।

श्री बघेल ने कहा कि कोरोना संकट काल में बच्चों की ऑनलाइन पढ़ाई के लिए पहले ‘पढ़ाई तुंहर द्वार’ योजना शुरू की। जिसमें 22 लाख बच्चे और 2 लाख शिक्षक-शिक्षिकाएं जुड़े। जहां इंटरनेट कनेक्टीविटी को लेकर समस्याएं आईं तो ‘पढ़ाई तुंहर पारा’ योजना शुरू की। इस योजना में 22 हजार 916 शिक्षकों द्वारा 34 हजार 917 बसाहटों के पारे मोहल्लों में कक्षायें संचालित की जा रही है। जिसमें 7 लाख 48 हजार से ज्यादा बच्चे भौतिक दूरी और सुरक्षा के साथ पढ़ाई कर रहे हैं। 2 हजार 278 शिक्षक, 4 हजार 298 दुर्गम स्थानों में 72 हजार से अधिक बच्चों को पढ़ाई करा रहे हैं। इंटरनेट सुविधाविहीन स्थानों में ब्ल्यूटूथ के माध्यम से शिक्षण सामग्री प्रदाय किया गया है। बुल्टू के बोल के माध्यम से 26 हजार 522 लोगों को 55 हजार 748 आडियो सामग्री पढ़ाई के लिए भेजे गए। पारा-मोहल्ला में पढ़ाने वाले शिक्षकों को मिस्डकॉल गुरुजी, मोटरसायकल पर सिनेमा वाले बाबू जैसे नामों से लोकप्रियता मिल रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि युवाओं को नए अवसर दिलाने के लिए प्रदेश में इंटरनेट ऑफ थिंग्स तथा रोबोटिक की प्रयोगशालाएं, आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस का पाठ्यक्रम सहित अनेक नये स्कूल-कॉलेज खोले गए हैं। कॉलेजों में भी स्थायी शिक्षकों की भर्ती की जा रही है। मेरा विश्वास है कि टीचर्स और बच्चे मिलकर प्रदेश में उपयोगी तथा गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की नई क्रांति लाएंगे। एक श्रोता ने उच्च शिक्षा के क्षेत्र में प्रदेश में ‘महात्मा गांधी उद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय’ की स्थापना के लिए श्री बघेल को बधाई दी।