मां की हो चुकी है कोरोना से मौत, अब मुख्यमंत्री से इच्छा मृत्यु की इजाजत मांग रही है एक युवती

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देश में अब भी कोरोना महामारी का कहर खत्म नहीं हुआ है। हर रोज हजारों कोविड-19 के पेशेंट सामने आते हैं। वहीं मौत का आंकड़ा भी बढ़ता जा रहा है। गिरती हुई अर्थव्यवस्था को देखकर सरकार ने पूरे देश में अनलॉक की प्रक्रिया शुरू कर दी है। हालांकि अनलॉक होने के बाद से कोरोना मामलों में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। सरकार फ्री टेस्ट से लेकर इलाज तक की सुविधा मुहैया करा रही है। इसी बीच मध्यप्रदेश के भोपाल में एक युवती ने ऐसी मांग कर डाली जिसे सुनकर हर कोई सरकार पर सवाल उठा रहा है। बता दें कि मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल के कोलार क्षेत्र में रहने वाली एक 27 वर्षीय युवती ने अपनी मां की मौत होने के बाद सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी कर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से भाई‑बहन समेत इच्छा मृत्यु की मांग की है। युवती का नाम प्रियंका रजक बताया गया है। वीडियो में प्रियंका ने कहा है कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मामा भांजी के नाम को बहुत प्रसिद्ध किया, लेकिन उनकी भांजी भटक रही है। युवती ने बताया कि उसकी मां की मौत जेपी अस्पताल में हो गई थी। उसकी मां कोरोना वार्ड में भर्ती थी। वो नहीं जानती कि उसकी मां की रिपोर्ट  क्या रही,लेकिन उन्हें तो मौत के बाद भी सुकून नहीं मिला।

 इलाज के नाम पर 50- 50 हजार रुपए लिए गए

प्रियंका ने आरोप लगाये हैं कि अस्पताल में किसी ने उनकी मां की लाश को छुआ तक नहीं। वह खुद ही अपने चाचा के साथ शव को लेकर पूरे अस्पताल में भटकती रही। जिसके बाद अंतिम संस्कार भी उन्होंने खुद ही किया। प्रियंका ने बताया कि इससे पहले एक निजी अस्पताल में उनकी मां के इलाज के नाम पर 50–50 हजार रुपये लिए गए लेकिन उनके इलाज का कोई फायदा नहीं हुआ। उनके पिता की आठ साल पहले ही मौत हो गई थी।  प्रियंका ने कहा कि उनकी मां ही उन चार‑भाई बहनों का सहारा थीं। मां की मौत के बाद अब उनके पास कोई रास्ता नहीं बचा है। वे चारों भाई बहनों में सबसे बड़ी है। अब उनके ऊपर ही भाई बहनों की जिम्मेदारी है। प्रियंका ने यह भी बताया कि उनसे प्रशासन ने जांच की बात कही थी, लेकिन आज तक किसी का फोन नहीं आया।

अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ एफआईआर की मांग

प्रियंका ने आरोप लगाए कि उसकी मां संतोष रजक की तबियत खराब होने पर उन्हें निजी अस्पताल में भर्ती किया, जहां कोरोना संक्रमित होने के नाम पर उनसे 50–50 हजार रुपये वसूले गए। इसके बाद भोपाल कलेक्टर से मदद मांगी और फिर उनकी मां को जेपी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनको देखने वाला कोई नहीं था। रात में ऑक्सीजन की सप्लाई भी कर दी जाती थी। 24 सितम्बर को उनकी मां की मौत हो गई। इसके बाद अस्पताल में उनके शव को लावारिस की तरह छोड़ दिया गया। पीपीई किट लपेटकर स्ट्रेचर के पर मां के शव को घर ले जाना पड़ा। अस्पताल में उनकी किसी तरह की कोई मदद नहीं की गई। प्रियंका ने मुख्यमंत्री ने मांग की है कि मामले की जांच कर अस्पताल प्रबंधन पर एफआईआर दर्ज की जाना चाहिए। अगर हमें न्याय नहीं मिलता है तो अब हमारे पास मरने के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं है। प्रियंका ने मुख्यमंत्री से भाई‑बहनों समेत इच्छा मृत्यु की मांग की है।