लौकी की खेती में 15 हजार खर्च कर 1 लाख रुपये का भरी मुनाफा बना रहा है ये किसान, मुनाफे के चर्चे देशभर में फैले

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भारत वस्तूत: एक कृषिप्रधान राष्ट्र है, फसलों की अच्छी लागत और उत्पादन भारत की अर्थव्यवस्था के साथ-साथ किसानो के जनजीवन और आय को प्रभावित करता है! भारत में मानसूनी मौसम के कारण हर जगह खेती बाड़ी का प्रयोग अलग-अलग तरीके और प्रयोगों के माध्यम से किया जाता है, फिलहाल में सुखा, खराब मौसम के तहत खेती में लागत निकालना भी कई बार असंभव होता है! अगर ऐसी स्थिति में कोई सब्जि की लागत से मालामाल हो जायें तो?

जी हाँ ऐसा ही हुआ है, आप सभी जानकर चौंक हो जायेंगे के अंबिका प्रसाद रावत (Ambika Prasad Rawat) नाम के किसान ने लागत मूल्य 15 हज़ार मात्र ख़र्च कर लाखो से मालामाल होकर देश के किसानों के बीच चर्चा का मुख्य विषय बन गये है!

अंबिका प्रसाद रावत (Ambika Prasad Rawat) बाक़ी किसानों की तरह बाराबंकी क्षेत्र में बाक़ी केवल धान, गेहूँ और मोटे अनाजो का उत्पाद करते थे, वही पारंपारिक फसलों को बोया जाता है जिसमे अधिकतर रासायनिक खाद डालकर और तकनिक से लगभग सब ख़र्चा छोड़कर 15-20 हज़ार का मुनाफा किसान के हाथ में बाक़ी रह जाता है, अम्बिका प्रसाद ने अपने मन में कुछ अलग तरीके से लौकी की नर्सरी बनाने का तय किया, क्योंकि लौकी की फ़सल वर्ष में 3 बार लगायी जा सकती है जिससे बारबार नये से जमिन पर खेती के काम में ख़र्च बच जाता है।

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उनसे बातचीत में ये जानकारी मिल गई की, सभी ऋतुओं में लौकी लाभकारी न केवल उगाने में है बल्कि खाने से भी बहुत सारे स्वास्थ्य सम्बंधि फायदे मिलते है, लौकी के ज्युस सेवन से मधुमेही (डायबेटिक) के मरीजों को लाथ होता है तथा लौकी के सेवन से पाचन तंत्र सुधरता जाता है। जिस कारण हर मौसम में लौकि की माँग ग्राहकों द्वारा बड़ी मात्रा में की जाती है।

लौकी नर्सरी बनाने के लिये जगह भी बहुत कम लगती है, 1 मीटर की क्यारी बनाकर मीट्टी भुरभुरी कर के लौकि के बीज बोये जाते है, लगभग 30 से 35 दिनों में लौकी नर्सरी तैयार हो जाती है। नर्सरी तैयार होने पर खेत में 10 से 12 फीट की पंक्तियों में 1-1 फीट की दुरी पर पौधे की बोआई की जाती है, उसके साथ टमाटर की मिश्र खेती की जाती है, लौकी के तने से टमाटर को सहारा मिल जाता है और किसानो को एक साथ दो उत्पाद लेने का फायदा होता है! अच्छी योजना और उसके स्वरुप अगर कृतिकार्यक्रम अपनाया जाये तो योजनाएँ सफल होती ही है।

अंबिका प्रसाद रावत ने केवल जैविक खाद डाल कर अपनी लौकी की खेती को सिंचा है, उनके मुताबिक रसायन खेती उपजाऊपन कम कर रहे है और लोगों का स्वास्थ्य दिनबदिन खतरे में आ रहा है, प्राकृतिक तरीके से खेती करने से न केवल भूमि कि हानी रुक जाती है बल्कि हमारे आहार में पोषक पदार्थ खाने को मिलते है और स्वास्थ्य ठीक रहता है।

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अंबिका प्रसाद रावत के इस विक्रमशाली उत्पादन और मुनाफे के चर्चे गांव-गाँव से देशभर में फैल रहे है, जिसके चलते बहुत सारे किसान, कृषी क्षेत्र के अधिकारी उन की खेती और किसानी का राज़ जानने के लिये उनके खेती में उनसे मुलाकात करने आ रहे है! उनकी इस उपलब्धी स्वरुप अंबिका प्रसाद रावत आजकल सभी किसान वार्तापत्र की सुर्खियों में छाँ गये है।

हर किसान ने अंबिका प्रसाद जी के भाँति सोच-विचार, सुझबुझ और ज़रूरी योजना कर खेती में मेहनत करे तो हर किसान अपने उत्पाद फसलों से मालामाल बन सकता है! किसानों की स्थिति अच्छी हो तो देश की तरक्क़ी भी होती है।

वीडियो के माध्यम से देखें अम्बिका प्रसाद के खेती का वीडियो