गांधी परिवार से अमिताभ बच्चन के रिश्ते की पूरी कहानी, जाने क्यों छिड़ता है हमेशा विवाद!

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बॉलीवुड और राजनीति दो ऐसे क्षेत्र हैं जहां आने वाले टर्न एंड ट्वीस्ट हर दिन जनता की जिज्ञासा बढ़ा देते हैं। ऐसे में इन दो अलग-अलग क्षेत्रों का मेल असल जिंदगी में बच्चन परिवार और गांधी-नेहरू परिवार के बीच एक समय में देखने को मिलता था। बच्चन और गांधी परिवार के बनते बिगड़ते रिश्तो की कहानी इतिहास के पन्ने हमेशा बयां करते हैं।

ऐसे में आज हम आपको आधुनिक भारत में सबसे बड़े रहस्य रहे बच्चन परिवार और गांधी परिवार के रिश्तो की का एक पहलू बताएंगे। साथ ही यह भी बताएंगे कि आखिर गांधी नेहरू परिवार और बच्चन परिवार के बीच ऐसा क्या हुआ जो दोनों के बीच न सिर्फ दूरियां आ गई बल्कि 36 का आंकड़ा भी नजर आने लगा।

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दोनों परिवार के बीच की दूरी का आधुनिक भारत में पहला जिक्र साल 2004 में राजनीतिक सभा के दौरान हुआ। यह वह वक्त था जब राजनीतिक सभा में खड़ी जया बच्चन ने एक लाइन में दोनों परिवारों के बीच आई दरार को सभा में एक बयान के जरिए साझा किया।

जया बच्चन ने कहा जो लोग हमें राजनीति में लाए वह हमें बीच मझधार में छोड़ कर चले गए। जब हम मुसीबत में थे तो उन लोगों ने हम से किनारा कर लिया। वह लोग आज देश में धोखा देने के लिए जाने जाते हैं।

इतना ही नहीं जया बच्चन के इस बयान से पहले एक बार अमिताभ बच्चन भी सार्वजनिक रूप से दोनों परिवारों के बीच खड़े हुए सवाल पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा था, कि वह लोग राजा है और हम लोग रंक…और राजा और रंक का कोई मेल नहीं होता।

ऐसे में सवाल उठता है कि कभी गांधी परिवार की ज्यादातर पारिवारिक तस्वीरों का हिस्सा रहने वाले अमिताभ बच्चन ने अचानक ऐसे गांधी परिवार से छिटकारा क्यों किया?

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वहीं दूसरी ओर जया बच्चन के बयान के बाद सत्ता में बैठी कांग्रेस सरकार बिफर गई और उसने अमिताभ बच्चन पर सत्ताधारी निशाना साधना शुरू कर दिया। यह वह दौर था जब अमिताभ बच्चन को इनकम टैक्स अधिकारी परेशान करने लगे। अमिताभ बच्चन इन मामलों की वजह से इनकम टैक्स विभाग की परेशानियों का शिकार होने लगे। बात-बात पर इनकम टैक्स विभाग के द्वारा उनका नाम खबरों में उछाला जाने लगा।

अक्सर राजनीतिक पार्टियों के दिग्गजों और सत्ताधारीओं की पोल उनके खास लोग ही खोलते हैं। ऐसे में उस दौर में काफी प्रसिद्ध रहे वरिष्ठ पत्रकार रशीद किदवई ने दोनों परिवारों के रिश्तो पर एक किताब लिखी, जिसका नाम था नेता-अभिनेता

यह किताब मुख्य रूप से बॉलीवुड स्टार परिवार अमिताभ बच्चन और इंडियन पॉलिटिक्स में अपनी धाक बना चुके कांग्रेस परिवार के रहस्यमई रिश्तो की कहानी पर लिखी थी। इस किताब का एक पूरा अध्याय फ्रेंड्स इन हाई प्लेसिस अमिताभ बच्चन और गांधी नेहरू परिवार के शुरुआती रिश्तो से लेकर कड़वाहट तक के दौर की कहानी बयां करता था।

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राशिद किदवई एक पॉलीटिकल पत्रकार थे। ऐसे में राजनीति की तरह उनका झुकाव इस किताब में काफी नजर आया है। उन्होंने गांधी परिवार से ज्यादा बच्चन परिवार को कटघरे में खड़ा किया है। किदवई ने अपनी किताब में बताया है कि बच्चन और गांधी नेहरू परिवार की असल में हरिवंश राय बच्चन और जवाहरलाल नेहरू के जमाने में रखी गई थी।

उस दौर की दोस्ती और गुजरते वक्त के साथ दोनों के संबंध काफी गहरे थे। दोनों परिवारों को अक्सर छोटे-बड़े पारिवारिक समारोह में एक साथ देखा जाता था।

अपनी किताब में रशीद किदवई ने एक दूसरी जो कि किताब हरिवंश राय बच्चन के जीवन पर आधारित है, दस द्वार से सोपान तक का हवाला देते हुए लिखा है कि सरोजिनी नायडू ने साल 1942 में हरिवंश राय बच्चन और तेजी को पहली बार नेहरू परिवार में आमंत्रित किया था। वहीं से तेजी और इंदिरा की दोस्ती शुरू हुई।

दूसरी और जवाहरलाल नेहरू और हरिवंश राय बच्चन के बीच भी यह रिश्ता गहराने लगा और दोनों परिवारों के रिश्ते गाढ़े होने लगे।

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नेहरू परिवार के आनंद भवन में पहुंचे हरिवंश राय बच्चन और तेजी बच्चन को सरोजनी नायडू ने नेहरू परिवार से यह कहकर मिलवाया कि यह हरिवंश राय बच्चन है और यह उनकी कविता…इंदिरा गांधी को सरोजनी नायडू का यह व्यक्तित्व परिचय इतना भाया, कि इंदिरा ने इसके बाद जब भी तेजी बच्चन की मुलाकात अपने किसी विदेशी दोस्त से कराई तो उन्होंने तेजी का यही परिचय दिया।

साल 1984 यानी इंदिरा गांधी के निधन तक दोनों परिवारों के बीच के संबंध काफी घनिष्ठ रहे। इसके बाद दोनों परिवारों का रिश्ता अब अमिताभ बच्चन और राजीव गांधी की दोस्ती के साथ आगे बढ़ने लगा।

अमिताभ बच्चन और राजीव गांधी की दोस्ती का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जब साल 1968 में सोनिया गांधी बतौर राजीव गांधी की मंगेतर के तौर पर भारत पहुंची थी, तो उन्हें पालम एयरपोर्ट पर सुबह तड़के रिसीव करने अमिताभ बच्चन ही पहुंचे थे।

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इसके बाद साल 1969 में जब सोनिया गांधी और राजीव गांधी की शादी तय हुई तो सोनिया गांधी का परिवार शादी के समय पर कुछ दिनों के लिए अमिताभ बच्चन के घर विलिंगडन बच्चन आवास पर ही ठहरा था। 1984 तक दोनों परिवारों की दोस्ती काफी गहरी हो चुकी थी। ऐसे में राजीव गांधी ने पहली बार अमिताभ बच्चन को चुनाव लड़ने के लिए राजी किया। इस दौरान अमिताभ बच्चन इलाहाबाद से चुनाव लड़ने के लिए खड़े हुए।

अमिताभ बच्चन ने राजनीति में एंट्री के साथ ही जीत दर्ज कर दी। 1984 में अमिताभ बच्चन ने काफी बड़े अंतर से हेमवती नंदन बहुगुणा को हराया। इसके बाद दिल्ली में अमिताभ बच्चन कांग्रेस यूथ ब्रिगेड का हिस्सा बने। अमिताभ बच्चन की राजनीतिक छवि जीत के साथ ही उभरने लगी थी। अमिताभ बच्चन के नाम की तुलना अरुण नेहरू, अरुण सिंह, सतीश शर्मा और कमलनाथ के साथ की जाने लगी थी।

अमिताभ बच्चन का राजनीतिक सफर ज्यादा लंबा नहीं रहा और इसका कारण था साल 1988 में बोफोर्स घोटाले को लेकर छपी एक खबर…इस खबर में अमिताभ बच्चन की इस घोटाले में संलिप्तता को लेकर काफी कुछ लिखा गया था। इसके बाद यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा और मामले की जांच पड़ताल के बाद अमिताभ बच्चन को इस मामले से क्लीन चिट मिल गई।

इस मामले के बाद दोनों परिवारों के बीच कड़वाहट आ गई थी, लेकिन इस बात को दोनों परिवारों ने बाहर नहीं जाने दिया। यही कारण था कि जब प्रियंका गांधी की शादी हुई तो अमिताभ बच्चन उस शादी में शामिल हुए। लेकिन साल 1988 में उन्होंने राजनीति छोड़ दी और बॉलीवुड में वापसी की।

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हालांकि राजनीति से बॉलीवुड में वापसी करने के बाद अमिताभ बच्चन को काफी मशक्कत करनी पड़ी। उनकी कई फिल्में औंधे मुंह गिरी। इसके बाद साल 1991 में राजीव गांधी के निधन के बाद दोनों परिवारों के बीच के रिश्ते बिगड़ने लगे। जहां एक और गांधी परिवार ने यह महसूस करना शुरू कर दिया कि अमिताभ बच्चन ने उनके बुरे वक्त में उन्हें छोड़ दिया, तो वहीं अमिताभ बच्चन के परिवार को भी गांधी परिवार का बरताव रुखा लगने लगा।

एक समय में इन दोनों परिवार की मंडली यानी यंग अमिताभ, अजिताभ, संजय, राजीव और सोनिया इंडिया गेट के लोन में घंटों समय बिताया करते थे और आइसक्रीम और डिनर का लिफ्ट लूट उठाया करते थे। वही आज एक दूसरे के लिए बेगाने हो गए थे। एक समय में कभी भी प्रधानमंत्री आवास में आने-जाने वाला बच्चन परिवार अब उसी गांधी नेहरू परिवार के लिए अछूता हो गया था। एक समय में राजीव-सोनिया से बच्चे राहुल प्रियंका जो बच्चन को बच्चन मामू कहकर बुलाया करते थे वह अचानक बेगाने हो गए थे।

दोनों परिवारों के बीच आइए तल्खी साल 2004 में जया बच्चन और अमिताभ बच्चन के बयानों से सामने आई। इसके अलावा राशिद किदवई ने अपनी किताब में दोनों परिवारों के रिश्तो की कई कहानी बयां की है।

स्टोरी संभार- नेता-अभिनेता, लेखक- वरिष्ठ पत्रकार रशीद किदवई