सौरव गांगुली को बीजेपी का बड़ा ऑफर, ममता दीदी के खिलाफ तैयार हो रहा चक्रव्यूह!

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बीते 2 साल में बीजेपी पश्चिम बंगाल में काफी तेजी से बढ रही है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है, कि पार्टी ने 2019 के लोकसभा चुनाव में 42 में से 18 सीटों पर जीत हासिल की थी।

New Delhi, Nov 03 : पश्चिम बंगाल में बीजेपी एक ऐसे नेता की कमी से जूझ रही है, जिसकी समाज के हर तबके में स्वीकार्यता हो, यही वजह है कि बीजेपी बंगाल में कई चर्चित शख्सियतों को अपने साथ जोड़ने की कोशिश में लगी हुई है, इसी कड़ी में टीम इंडिया के पूर्व दिग्गज क्रिकेटर सौरव गांगुली बीजेपी के लिये एकदम मुफीद साबित हो सकते हैं, क्योंकि बतौर क्रिकेटर सौरव गांगुली ने बंगाल में जो लोकप्रियता हासिल की है, उसका कोई सानी नहीं है।

बीजेपी की कोशिशों को झटका
हालांकि बीजेपी की कोशिशों को तब बड़ा झटका लगा, जब सौरव गांगुली ने फिलहाल राजनीति की पिच पर उतरने से इंकार कर दिया, टेलीग्राफ की रिपोर्ट के मुताबिक गांगुली ने अपने फैसले से बीजेपी नेतृत्व को भी अवगत करा दिया है, उन्होने कहा कि फिलहाल वो अपनी क्रिकेट की जिम्मेदारियों को निभाने में व्यस्त हैं और उसी में खुश हैं, बताया जा रहा है कि सौरव गांगुली ने बीजेपी के लिये विधानसभा चुनाव में प्रचार करने से भी इंकार कर दिया है।

बढ रहा है बीजेपी का ग्राफ
आपको बता दें कि बीते 2 साल में बीजेपी पश्चिम बंगाल में काफी तेजी से बढ रही है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है, कि पार्टी ने 2019 के लोकसभा चुनाव में 42 में से 18 सीटों पर जीत हासिल की थी, साथ ही वोट शेयर के मामले में भी टीएमसी से सिर्फ तीन फीसदी ही पीछे रही थी। हालांकि बंगाल की राजनीति में अभी भी ममता बनर्जी की अच्छी पकड़ मानी जाती है, ममता दीदी की मास अपील होने के साथ ही अल्पसंख्यक वोटरों में भी अच्छी पकड़ मानी जाती है, ऐसे में विधानसभा चुनाव में ममता दीदी को टक्कर देने के लिये बीजेपी को भी एक मास लीडर की जरुरत है।

बीजेपी नेतृत्व
पश्चिम बंगाल में बीजेपी नेतृत्व की बात करें, तो अभी दो नेता सबसे आगे दिख रहे हैं, जिनमें दिलीप घोष और मुकुल रॉय का नाम आता है, दिलीप घोष को आरएसएस का समर्थन भी है, लेकिन घोष को बंगाल के मध्यम और उच्च वर्गीय समाज से ज्यादा समर्थन नहीं मिलता है, वहीं मुकुल रॉय का इतिहास दागदार है, जो उन्हें मजबूत दावेदार बनने से रोकता है। यही वजह है कि बीजेपी विधानसभा चुनाव से पहले किसी ऐसे चेहरे की तलाश में है, जिसकी स्वीकार्यता राज्य के सभी वर्गो में हो, जो लोकप्रियता के मामले में ममता दीदी को टक्कर दे सके, बीजेपी भी ये बात अच्छे से जानती है कि विधानसभा चुनाव में पीएम मोदी का चेहरा उतना कारगर नहीं रहेगा और उन चुनाव में लोग स्थानीय नेतृत्व को ज्यादा तरजीह देते हैं, हालांकि सौरव गांगुली के इंकार से तो लग रहा है कि बीजेपी की ये परेशानी अभी हल नहीं होने वाली है।