महाभारत काल का पुल आज भी है मौजूद, जानिए किस जगह पर है यह पुल

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महाभारत हिंदुओ का प्रमुख ग्रंथ है। यह पौराणिक कथा हमारे देश की धरोहर के रूप में सबसे विशेष मानी जाती है। भारत में कई ऐसे ग्रन्थ हैं जिनका संबंध किसी न किसी पौराणिक घटनाओं से जुड़ा हुआ है। उन्हीं में से एक है महाभारत, महाभारत एक धार्मिक ग्रंथ तो हैं ही पर इसके साथ ही यह एक दार्शनिक,पौराणिक, ऐतिहासिक ग्रंथ भी है। इसे हिन्दू धर्म का पंचम वेद भी माना जाता है।

बात अगर भारत की करी जाए,तो भारत को देव भूमि माना गया है। भारत के कई सारे स्थान, अथवा गाँव ऐसे हैं जो पौराणिक घटनाओं से जुड़े हैं,जिनमे पौराणिक रहस्य छिपे हुए हैं। आज हम एक ऐसे ही गाँव के बारे में बताने जा रहे हैं। यह गाँव उत्तराखंड में स्थित है।

भारत का आखिरी गाँव का रहस्य

आज हम एक ऐसे गाँव के बारे में बताने जा रहे हैं,जिसका संबंध पौराणिक कथाओं से है। जी हाँ आज हम उत्तराखंड के एक गाँव के बारे में चर्चा कर रहे हैं। बता दें कि उत्तराखंड स्थित इस गांव को हिंदुस्तान का आखिरी गाँव के नाम से जाना जाता है। इस गाँव के नाम के पीछे भी कई रहस्य छिपें हुए हैं। वहीं इस गाँव का संबंध भगवान श्री गणेश से भी है।

यही से स्वर्ग गए थे पांडव

उत्तराखंड स्थित हिंदुस्तान के आखिरी गाँव से कई तरह की बातें जुड़ी हैं। इस गाँव का नाता महाभारत काल से भी जुड़ा हुआ है। ऐसा माना जाता है कि अपना राज्य अपने उत्तराधिकारी को सौप कर पाँचों पांडव स्वर्ग को चले गए थे। इस गाँव के विषय मे यह मत प्रसिद्ध है कि पांडव यही से होकर स्वर्ग गए थे। इस गाँव का एक और नाम माणा भी है। यह लगभग 19 हजार फीट की ऊँचाई पर स्थित है। ऐसा कहा जाता है कि मणिभद्र देव के नाम पर इस गाँव का नाम माणा पड़ गया था। पौराणिक मत के अनुसार यदि देखा जाए तो यह मान्यता उल्लेखित है कि यह गाँव धरती पर स्थित चारों धामों से भी ज्यादा पवित्र है। इस गाँव को किसी भी प्रकार के शाप और पाप से भी मुक्त माना जाता है।