गुरु ने 30 साल पहले 500 रूपए देकर भेजा था पढ़ने, शिष्य ने बैंक सीईओ बन दी 30 लाख की गुरु दक्षिणा

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कहतें हैं कि गुरु के ज्ञान का कोई मोल नही होता। एक अच्छा शिक्षक उस कुम्हार के सामान है जो अपनी निपुणता और कार्यकुशलता से कच्ची मिट्टी सामान एक अबोध बालक को आकार देता है जो आगे चल कर इस समाज की दशा और दिशा तय करता है। गुरु शिष्य की ये परंपरा सदियों से चली आ रही है और उसी का एक पर्याय है गुरु
दक्षिणा।

आपको याद होगा महान धनुर्धर एकलव्य ने अपना अंगूठा अपने गुरु द्रोणाचार्य को भेंट स्वरुप दे दिया था, जिसकी आज भी मिसालें दीं जातीं हैं। लेकिन इन दिनों सोशल मीडिया पर छाई एक ख़बर ने कलयुग में गुरु -शिष्य परंपरा की एक अद्भुत मिशाल खड़ी की है। क्या है पूरा मामला आइये जानतें हैं।

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दरअसल इन दिनों आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के सीईओ और एमडी वी वैद्यनाथन एक बार फिर सुर्खियों में हैं। इस बार उनके चर्चे में होने की वजह बेहद खास है। दरअसल उन्होंने अपने शिक्षक गुरुदयाल स्वरुप सैनी को 30 लाख रूपए के इक़्विटी शेयर गुरु दक्षिणा के रूप में दिए हैं।

इससे पहले भी स्वामीनाथन 2018 में सोशल मीडिया में चर्चा का विषय बने थे। तब उन्होंने अपने सहकर्मियों और कर्मचारियों को 20 करोड़ के शेयर गिफ्ट के रूप में दिए थें।

30 साल बाद स्वामीनाथन ने उतारा गुरु का क़र्ज़

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वी स्वामीनाथन का जन्म चेन्नई में हुआ था। लेकिन उनकी शिक्षा देश के कई अलग -अलग राज्यों के केंद्रीय विद्यालयों में सम्पन्न हुई। इसी बीच पढाई के दौरान पठानकोट केंद्रीय विद्यालय में उनकी जान -पहचान उनके गणित के टीचर गुरुदयाल सैनी से हुई।

वाकया है आज से करीब 30 साल पुराना लगभग 90 के दशक का, जब स्वामीनाथन को अपनी उच्च स्तरीय शिक्षा प्राप्ति के लिए रांची के बिरला इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी जाना था। उस वक़्त उनके पास इतने भी पैसे नही थे कि वो ट्रेन की टिकट तक खरीद सकें।

उस वक़्त उनके गणित के अध्यापक गुरुदयाल सैनी ने उन्हें 500 रूपए देकर रांची भेजा था। जिसे अब पूरे 30 सालों बाद उन्होंने 30 लाख के शेयर अपने गुरु के नाम कर उन्हें लौटाया है। स्वामीनाथन ने बताया कि वो पिछले 30 सालों से अपने गुरु को ढूंढ रहे थे जो कि इस साल उन्हें आगरे में मिले।

कौन हैं वी स्वामीनाथन

वी स्वामीनाथन आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के सीईओ और एमडी हैं। शुरुआत में उन्होंने कैपिटल फर्स्ट नाम की एक एनबीएफसी शुरू की थी जिसका साल 2018 में आईडीएफसी बैंक में विलय हो गया जिसके बाद आईडीएफसी फर्स्ट बैंक अस्तित्व में आया।

दान के लिए मशहूर वी स्वामीनाथन ने पहले भी अपने कर्मचारियों और सहकर्मियो को ऐसे तोहफ़े कई बार दिये हैं लेकिन इस बार उनका ये तरीका सोशल मीडिया पर जम कर वायरल हो रहा है।