पैदा होते ही बच्चे को क्यों रुलाया जाता है,वजह जानकार हैरान हो जायेंगे आप

0
71




दोस्तों माता पिता बनना सभी के लिए बहुत ज्यादा सौभाग्य की बात होती है,दोस्तों ये एक उच्च कोटि का सुख होता है जिसे हर माँ और बाप भोगना चाहेगा,दोस्तों घर में अगर बच्चे न हो तो घर की सभी चीज़े सुनी लगती घर सुना सुना लगता है जीवन में एक अधूरापन सा लगता है दोस्तों जिस माँ-बाप ने बच्चे की पहली किलकारी सुनना हर किसी के लिए वह वक्त और प्रसंता का पल होता है, पर क्या आप लोग यह जानते हैं कि के बच्चा पहली बार पैदा होते ही क्यों होता है आखिर ऐसी क्या वजह है जिस कारण बच्चे को अगर वह ना रोए तो डॉक्टर यां नर्से उसको हल्का सा थपथपा के थप्पड़ लगा कर रुलाते हैं. इसके पीछे कई कारण बताए जाते हैं, इसे पौराणिक काल से जुड़ी बात मानता है, तो इसका साइंटिफिक कारण भी है। तो आइये जानते हैं इसके बारे में।


शिशु जब मां के गर्भ में होता है, तब वह सांस नहीं लेता। वह एम्नियोटिक सैक नामक एक थैली में होता है, जिसमें एम्नियोटिक द्रव भरा होता है। उस समय शिशुओं के फेफड़ों में हवा नहीं होती है। उनके फेफड़ों में भी एम्नियोटिक द्रव भरा होता है। इस स्थिति में बच्चे के सारा पोषण अपनी मां के द्वारा गर्भनाल के जरिये मिलता है। मां के शरीर से बच्चे के बाहर आते ही गर्भनाल काट दी जाती है। इसके बाद शिशु को उल्टा लटकाकर उसके फेफड़ों से एम्नियोटिक द्रव निकालना जरूरी होता है, ताकि फेफड़े सांस लेने के लिए तैयार हो सकें और वायु का संचार होने लगता है।

दरअसल रोते समय बच्चा गहरी सांस लेता है। यही वजह है कि जन्म के बाद अगर बच्चा खुद नहीं रोता है, तो उसे हल्की सी चपत लगाकर रुलाया जाता है। प्रसव की क्रिया मां और बच्चे दोनों के लिए कष्टदायक होती है। बच्चा बहुत संकरे मार्ग से निकलकर दुनिया में आता है। और उसके लिए यह वातावरण 9 महीने के वातावरण से बिल्कुल अलग होता है