बिहार का वो  गांव जहां हर घर से IIT में सिलेक्ट होते हैं बच्चे, साल 1996 से देशभर के लिए स्टडी मॉडल

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प्रतिभा किसी की मोहताज नहीं होती, ये एक दूसरे को देखकर और निखरती है । जानिए एक ऐसे गांव के बारे में जहां हर घर से एक आईआईटीयन जरूर निकला है ।

New Delhi, Oct 22: देश में एक ऐसा गांव भी है, ज‍हां के हर घर से कोई एक आईआईटी तक जरूर पहुंचा है । जी हां बिहार के गया जिले के मानपुर एरिया का पटवाटोली गांव, आईआईटी विलेज के नाम से जाना जाता है । एक जमाने में यहां हर घर और हर गली में पावरलूम हुआ करता था, आज इस गांव का जिक्र यहां से निकलने वाले आईआईटियन्स की वजह से होता है । दी ललनटॉप की एक रिपोर्ट के मुताबिक़, पटवाटोली को पहले मैनचेस्टर ऑफ़ बिहार कहा जाता था ।

होता था लूम का काम
पटवाटोली के हर घर में पॉव्‍रलूम था और यहां लूम से चादर, तौलिया, गमछा बनता था । लेकिन, समय बदला और इस गांव के लोगों के बीच शिक्षा का महत्‍व समझा गया, धीरे-धीरे गांव की पहचान विलेज ऑफ़ आईआईटियंस से हो गई है । आपको यकीन नहीं होगा लेकिन इस गांव से हर साल एक दर्जन से ज्यादा स्टूडेंट्स बिना किसी बड़ी कोचिंग में पढ़े जेईई में सिलेक्ट होते हैं ।

मुफ्त लाइब्रेरी
दरअसल इस गांव में एक लाइब्रेरी भी है जिसे वहां युवकों के आर्थिक सहयोग से चलाया जाता है । दरअसल साल 1996 में यहां के कुछ बच्चों ने आईआईटी में प्रवेश लिया था, अपनी मेहनत लगन के दम पर ये बच्‍चे सफल हुए थे । इसके बाद से इन्‍होने ही पहल की । गांव के उन बच्‍चों को लाइब्रेरी की सुविधा दी, ताकि जो भी पढ़ना चाहे उसे कमी ना हो ।

लाइब्रेरी है आकर्षण का केंद्र
इस लाइब्रेरी की किताबे गांव के हर बच्‍चे के लिए मुफ्त है । यहां बच्चे फ्री में पढ़ सकते हैं, तैयारी कर रहे बच्चों को यहां के सीनियर्स जो आईआईटी में पढ़ाई कर चुके हैं या कर रहे हैं फ्री में ऑनलाइन कोचिंग देते हैं । इस गांव से हर साल बच्‍चे सफल होते हैं और अपने और परिवार के साथ गांव का भी नाम ऊंचा करते हैं ।