बिहार को 4 मुख्यमंत्री दे चुका है यह कॉलेज, कई Alumni  केंद्र और राज्य में मंत्री भी रहे

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राज्‍य के एक और पूर्व मुख्‍यमंत्री दिवंगत सत्येंद्र नारायण सिन्हा भी भागलपुर के इस कॉलेज से जुड़े रहे हैं, उन्होंने यहां पर कुछ दिनों तक इतिहास पढ़ाया था।

बिहार में राजनीति का क्रेज ही कुछ अलग है, सुबह की चाय से लेकर रात के खाने तक यहां हर शख्‍स पॉलिटिक्‍स को जैसे बारीकी से समझता है । बिहार की राजनीति और वहां के राजनेताओं की जब भी बात होती है तो राज्य के दो नामी शिक्षण संस्थानों का जिक्र जरूर होता है । पहला है पटना यूनिवर्सिटी और दूसरा भागलपुर का टीएनबी कॉलेज । टीएनबी कॉलेज ने तो प्रदेश को 4 मुख्यमंत्री भी दिए हैं । इस कॉलेज की स्‍थापना 1883 में हुई थी । यह राज्य का एक प्रतिष्ठित महाविद्यालय है।

दरोगा प्रसाद राय और सत्‍येंन्‍द्र नारायण सिन्‍हा रहे एलुमनी
बिहार के दसवें मुख्यमंत्री दरोगा प्रसाद राय टीएनबी कॉलेज से ही पढ़े थे। 16 फरवरी 1970 से लेकर 22 दिसंबर 1970 तक वे राज्य के सीएम रहे । शायद आप ना जानते हों, लालू प्रसाद के बेटे तेजप्रताप यादव के ससुर चंद्रिका राय दरोगा राय के ही बेटे हैं। वहीं राज्‍य के एक और पूर्व मुख्‍यमंत्री दिवंगत सत्येंद्र नारायण सिन्हा भी भागलपुर के इस कॉलेज से जुड़े रहे हैं, उन्होंने यहां पर कुछ दिनों तक इतिहास पढ़ाया था। सिन्हा 11 मार्च 1989 से 6 दिसंबर 1989 तक राज्य के सीएम रहे।

भगवत झा आजाद और सतीश प्रसाद सिंह
भागवत झा 14 फरवरी 1988 से 10 मार्च 1989 तक बिहार के मुख्यमंत्री रहे थे। भागवत झा आजाद ने टीएनबी कॉलेज से ही अर्थशास्त्र में स्नातक किया था। भारतीय क्रिकेटर औऱ राजनेता कीर्ति आजाद भागवत झा के ही बेटे हैं । वहीं बिहार के इतिहास में सबसे कम दिनों के लिए सीएम रहने वाले सतीश प्रसाद सिंह भी भागलपुर के टीएनबी कॉलेज के छात्र थे । वह 1968 में महज 5 दिनों के लिए सीएम बने थे।

देश के कई राजनेता इस कॉलेज से निकले हैं …
इन चार मुख्यमंत्रियों के अलावा भी टीएनबी कॉलेज ने कई दिग्गज राजनेता दिए हैं । इन में भारत के रेल मंत्री रह चुके ललित नारायण मिश्रा और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष डॉ. शिवचंद्र झा जैसे नाम शामिल हैं। बिहार का ये कॉलेज पॉलिटिशियन्‍स की मशीन कहलाता है । कॉलेज में राजनीति पर चर्चा छात्रों का फेवरेट विषय माना जाता है ।