गुगल मैप को फाॅलो करना युवक के पड़ा भारी, जंगल में जा फंसे कार चालक मशक्कत के बाद ऐसे निकली कार

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नई दिल्ली: गूगल मैप रास्ता बताने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। वैसे तो हर कोई इस पर भरोसा करता है। लेकिन कई बार ऐसा भी हुआ है जब गूगल मैप के बताये गए रास्ते पर चलते हुए कई लोग अपने गंत्वय पर पहुंचने के बजाये भारी मुसीबत में फंस गए। अभी कुछ दिनों पहले एक ऐसी ही घटना घटी जिसमे एक व्यक्ति अपनी कार के साथ जंगल में फंस गया और वहां से निकलने में उसे बड़ी मशक्कत करनी पड़ी।

टीम बीएचपी की एक रिपोर्ट के अनुसार, टाटा हैरियर में एक व्यक्ति अपने परिवार के साथ पुणे से जबलपुर के लिए निकला, उसे लंबी ड्राइव पर कार चलाने का कोई अनुभव नहीं था। उसे पुणे से गूगल मैप की मदद से अपने सफर की शुरूआत की। रास्ते में उसने नागपुर में रुकने की योजना बनाई। गूगल मैप के अनुसार वह रात के 11 बजे नागपुर पहुंच जाता।

गूगल मैप में उसे एक डायवर्सन लेने का निर्देश दिखा जो अमरावती के पास एक मुख्य सड़क पर था। लगभग 14 घंटे ड्राइव करने के बाद उसने उस डायवर्सन पर गाड़ी को ले गया और आगे बढ़ने लगा। वह इस डायवर्सन पर लगभग 20 किलोमीटर तक आगे बढ़ गया तभी उसने देखा कि आगे एक छोटी नदी है और उसपर जो पुल है वो क्षतिग्रस्त है।

उसने गूगल मैप पर दोबारा सही डायरेक्शन के लिए देखा लेकिन गूगल मैप में उसे रास्ते पर आगे बढ़ने का निर्देश दिया जा रहा था। उसने देखा कि नदी के बगल से एक कच्ची सड़क जा रही है जिसपर कार चलाई जा सकती है।

उसने बिना देरी किये उस रस्ते पर गाड़ी आगे बढ़ा दी। हालांकि, रास्ते पर काफी अधिक गड्ढे होने के कारण गाड़ी कुछ दूर आगे बढ़ते ही फंस गई और इधर-उधर फिसलने लगी। कुछ देर प्रयास करने के बाद भी गाड़ी नहीं निकली, तभी उसने देखा की इंजन से कुछ धुआं उठ रहा है और जलने की गंध आ रही है।

वही कार चालक ने रात के 2.30 बजे रोड साइड असिस्टेंस से संपर्क किया और मदद मांगी। जिसके बाद करीब 3.30 बजे कार मकेनिक मदद के लिए 70 किलोमीटर का सफर तय कर वहां पहुंच गए जहाँ कार फंसी थी। इस घटना से यह पता चलता है कि गूगल मैप पर पूरी तरह भरोसा नहीं किया जा सकता, खासतौर उस समय जब आप लॉन्ग ड्राइव पर निकल रहे हों।

बेहतर होगा की आप शॉर्टकट या डायवर्सन के लिए किसी जानकार से संपर्क करें या ड्राइव करते समय आस-पास के लोगों से सही रूट के लिए मदद मांगें।