शादी का जोड़ा लाल ही रंग का क्यों होता है, रहस्य है काफी हैरान कर देने वाला

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शादी एक वो रस्म है जिसमे दो लोग ही नहीं मिलते बल्कि दो बिरादरी, खानदान, पीढ़ी मिल जाती है. तो अनजान लोग के साथ कितने परिवार जुड़ जाते है. विवाह जीवन का सबसे बड़ा कार्य है माँता पिता के लिए. कितने अधिकार इस रिश्ते के जुड़ने से मिल जाते है.परिवार का विकास होता है.आपको बता दे वैसे शादी की काफ़ी सारी रस्मे होती है.और जिस तरह अब फैशन की बात करे तो शादी मे रस्मे भी ज़्यादा होने लगी है. इन रस्मो का क्रेज़ भी ज़्यादा बढ़ गया है.हर शादी की रस्म के लिए कपड़ो की थीम बन गये है.आज कल शादी से पहले प्री शादी का चलन ज्यादा हो रहा है,शादी में फोटो सेशन के लिए पूरा सेटअप तैयार किया जाता है और लड़का लड़की अपने पुरे परिवेश यानि दूल्हा दुल्हन की परिधान में ये फोटो सेशन करवाते है.मगर इस फोटो सेशन में एक चीज़ को चेंज नहीं करते है वो है दुल्हन का लाल जोड़ा.
जैसे की मेहंदी मे हरे रंग के कपड़े पहनने का चलन हो गया है.

वही हल्दी की रस्म भी काफ़ी भारी मनाये जाने लगी है. इस दिन अधिकतर लड़कीया पिले रंग के कपड़े पहनती है.इसी प्रकार हर रस्म के अलग अलग कपड़े और कलर तय हो जाते है. मगर शादी के दिन का जोड़ा सदियों से लाल रंग चढ़ता आया है.चाहे वे किसी भी धर्म मे हो. मगर लाल ही बनाया जाता है. हिन्दू रीति रिवाज़ से मान्य है की यह शुभ रंग माना जाता है.

एक अच्छे रिश्ते की शुरुआत हो तो दुल्हन को लाल रंग का जोड़ा पहनाया जाता है. फिर लाल रंग सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है. वैज्ञानिक दृष्टि से देखा जाये तो लाल रंग ऊर्जा का स्त्रोत है.

उसी प्रकार काफ़ी सारे ऐसे कारण है जिनमे रंगों का बहुत महत्व है.वही काला रंग बुरा रंग नीला रंग अच्छा नहीं माना जाता.
इसलिए जीवन के इस खास दिन लाल रंग को ज़्यादा महत्व दिया जाता है,और यह केवल किसी एक जाति या धर्म मे नहीं सारे समाज मे ही माना जाता है की लाल रंग ही हो दुल्हन के लिए जोड़े मे.
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