आप जानते है गांधारी के धृतराष्ट्र थे दूसरे पति, पहले पति के बारे में जानकर आपके होश उड़ जाएंगे

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हिंदू धर्म में गंधारी का पात्र महत्वपूर्ण था,महाभारत का एक पात्र थी,और खलनायक दुर्योधन की माता दी थी,नारी से जुड़ी काफी ऐसी बातें हैं जो कि लोगों को नहीं पता है,अंगारी एक पतिव्रता पति थी उनके पति की आंखें खराब थी जिसके चलते गंधारी ने भी अपनी आंखों पर पट्टी बांध की और पति के साथ पूरा जीवन बिना देखे ही गुजारा,गंधारी के 100 पुत्र थे.

जैसा कि आप सभी जानते हैं गंधारी का विवाह हस्तिनापुर के राजा धृतराष्ट्र के साथ हुआ था,तुझे सच्चाई बहुत ही कम लोग जानते हैं कि गंधारी के दो विवाह हुए थे, यह बात बहुत कम लोग जानते थे और उनके पति जिस राष्ट्र भी यह बात ही जाते थे,आज हम आपको यह बात बताने जा रहे हैं,गंधारी के दो विवाह अवश्य की हुए थे परंतु उनका पहला विवाह किसी मनुष्य से ना होकर एक बकरे के साथ किया गया था,ज्योतिषियों के कहने के अनुसार गंधारी के विवाह दोष को दूर करने के लिए यह बात कराया गया था इसके बाद बकरे की बलि दे दी गई थी जिससे कि गंधारी विधवा हो गई थी.गंधारी सुबल राजा की बेटी थी.

जब गंगापुत्र भीष्म पितामह गंधारी के लिए नेत्रहीन धृतराष्ट्र का रिश्ता लेकर उनके पिता के पास पहुंचे तो उन्होंने इस रिश्ते को स्वीकार कर लिया परंतु जब धृतराष्ट्र को इस बारे में पता चला कि वह पहले से शादीशुदा है और विधवा है तो उन्होंने गंधार के राज्य को समाप्त करने की ठान ली और सब्जी को कैद कर लिया कैद में इन सभी को सिर्फ एक मुट्ठी चावल दिए जाते थे जिससे कि धीरे-धीरे यह मर जाए परंतु, सबल के राजा ने यह निश्चय किया कि वह यह एक मुट्ठी चावल अपने सबसे छोटे बेटे को खिलाएंगे जिससे कि उनके राज्य और उनके वंश का विनाश ना हो ऐसा ही उन्होंने किया और सब में सिर्फ एक उनका सबसे छोटा पुत्र शकुनी ही बचा,ना जाने यह देखकर सब उन्हीं को आजाद कर दिया और कहा कि तुम अपने राज्य जा सकते हो या यहीं रहकर राज्य की देखभाल करो

गंधारी की कुंडली जब बचपन में बने तो उसमें एक दोस्त सामने आया उसके निवारण के लिए पंडितों ने बकरे से विवाह कराने का विचार सामने रखा, जिससे गंधारी का विधवा दोष दूर हो जाए,बकरे की बलि के बाद गंधारी विधवा हो गई उनकी कुंडली से यह दोष दूर हो गया जिसके बाद उनकी शादी दूसरा से हुई विश्वास दृष्टिहीन थे परंतु माता-पिता की आज्ञा मानकर गंधारी ने उनसे विवाह कर लिया और अपनी आंखों पर सदा के लिए पट्टी बांध ली के जब मैं मेरे पति नहीं देख सकते तो मुझे भी दुनिया को देखने का अधिकार नहीं है बहन के इस स्थिति को देखकर शकुनी बहुत दुखी थे और वह इस विवाह के खिलाफ थे.