हाथरस कांड: दिल्ली के सफदरगंज अस्पताल में हुई थी पीड़िता का शव छीनने की कोशिश- DM

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उत्तर प्रदेश के हाथरस मामले की इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ में सुनवाई के दौरान हाथरस के जिलाधिकारी प्रवीण कुमार लक्षकार ने स्पष्ट किया है कि जिला प्रशासन को स्थानीय स्तर पर परिस्थितियों के आधार पर पीड़िता का अन्तिम संस्कार 29 सितम्बर की रात्रि में ही करने का निर्णय लेना पड़ा था.

करीब 1000 लोगों ने अस्पताल परिसर में किया हंगामा

डीएम ने अपने बयान में कहा कि तात्कालिक परिस्थितियों को देखते हुए हाथरस और आसपास के तमाम जिलों में कानून व्यवस्था बनाये रखने और शान्ति बरकरार रखने के लिये उन्हें यह निर्णय स्वयं लेना पड़ा. पीड़िता की मृत्यु दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में सुबह हो चुकी थी. लगभग 1000 लोगों द्वारा अस्पताल परिसर में ही हंगामा किए जाने कारण शव को पोस्टमार्टम के बाद हाथरस ले जाने के लिए बाहर लाने में ही लगभग 10 घंटे का समय लग गया था. यही नहीं कुछ संगठनों के उपद्रवी तत्वों ने शव को छीनने का भी प्रयास किया था.

12.30 बजे शव हाथरस पहुंचा

शव के हाथरस पहुंचने में रात्रि के लगभग 12.30 बज चुके थे और कुछ असामाजिक तत्व गांव और गांव के बाहर जमा हो गए थे, जो पूरी तरीके से हिंसा पर आमादा थे. चूंकि पीड़िता की मृत्यु हुए काफी समय हो चुका था अतः शव की भी हालत बिगड़ती जा रही थी.

मौके की नजाकत को देखते हुए लिया अंतिम संस्कार का फैसला

डीएम ने अपने बयान में कहा है कि परिस्थिति का आकलन करते हुए जिलाधिकारी के रूप में मैंने हाथरस में मौजूद वरिष्ठ अधिकारियों से सलाह करके पीड़िता के परिवार को विश्वास में लेकर अपने स्तर पर रात्रि में दाह संस्कार कराने का निर्णय लिया. जिलाधिकारी के रूप में मैंने मौके की नजाकत समझते हुये कर्तव्यस्वरूप कानून व्यवस्था की दृष्टि से पीड़िता के शव का दाह-संस्कार कराना आवश्यक समझा.

ये नेता थे अस्पताल में उपस्थित

हाथरस कांड की आड़ में प्रदेश को अराजकता की आग में झोंकने का पूरा षड्यंत्र था. अस्पताल परिसर में ही भीम आर्मी के कार्यकर्ताओं द्वारा शव छीनने का प्रयास भी किया गया था. पूर्व सांसद उदित राज, भीम आर्मी अध्यक्ष चन्द्रशेखर रावण, कांग्रेस के पीएल पुनिया, जयकिशन और आप पार्टी के विधायक अजय राय वाल्मीकि, राखी बिरला, सौरभ भारद्वाज सहित कई पार्टियों के नेता, तथाकथित सामाजिक संगठनों के कार्यकर्ता और राष्ट्र व समाज विरोधी ताकतों के सदस्य वहां मौजूद थे.

माहाैल बिगाड़ने की कोशिश

डीएम के अनुसार इसी बीच प्रशासन को सूत्रों के माध्यम से पता चला था कि एक वेबसाइट ‘जस्टिस फॉर हाथरस’ भड़काऊ कन्टेन्ट कि जरिये हाथरस और आस-पास के क्षेत्रों में अशांति एवं अव्यवस्था फैलाने में जुटी है. उसी दौरान कांग्रेस के प्रमुख नेता शिवराज जीवन का एक वीडियो भी वायरल हो चुका था, जिसमें उनके द्वारा तमाम भड़काऊ, आपत्तिजनक एवं हिंसक बातें कहीं गयीं थी. सोशल मीडिया पर भी असामाजिक तत्व जान–बूझकर साजिश के तहत अत्यन्त आपत्तिजनक एवं झूठी अफवाहें फैलाकर सामाजिक सौहार्द को बिगाड़ने की पूरी कोशिश कर रहे थे.

बाबरी विध्वंस केस का फैसला अगले दिन ही आना था

प्रशासन के संज्ञान में यह बात भी पूरी गम्भीरता से थी कि अगले ही दिन अयोध्या के बाबरी विध्वंस केस पर अदालत का फैसला भी आना था. अतः किसी तरह की अशांति और अव्यवस्था फैलाने का प्रयास न हो सके इसको ध्यान में रखकर फैसले लिए गए.

इस बात के पुख्ता प्रमाण मिले हैं पीएफआई जैसे संगठन से जुड़े कथित पत्रकार व कुछ अन्य पत्रकारों की भूमिका भी परिवार को तब भड़काने में रही. जब परिवार के लोगों की मुख्यमंत्री जी से वार्ता हो चुकी थी और उनकी सारी मांगे मानी जा चुकी थीं. ऐसे भी संकेत मिले हैं कि माहौल बिगाड़ने के लिये भीम आर्मी को पीएफआई से फंडिंग की गई. प्रदेश को दंगे की आग में झोंकने की साजिश में कई नक्सली संगठनों की भूमिका के भी इनपुट मिले हैं जिसकी जांच की जा रही है.

उन्होंने कहा कि मीडिया द्वारा ये भी खुलासा किया गया है कि हाथरस घटना की आड़ में योगी सरकार को सोशल मीडिया पर बदनाम करने के लिये बड़ी साजिश की गयी थी. भारत के बाहर से योगी सरकार के खिलाफ नफरती और झूठे ट्विट्स भी कराये गए. इसमें सबसे अधिक ट्वीट मिडल ईस्ट और पाकिस्तान से किये गए थे, जबकि इस घटना में पहले एसआईटी जांच और अब सीबीआई जांच शुरू हो गई है तो साजिश में शामिल कई चेहरे बेनकाब होंगे.