परदे के पीछे से जारी है प्रशांत किशोर का खेल? चिराग पासवान के जरिये नई समीकरण तलाश रहे!

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दूसरी ओर पटना के राजनीतिक गलियारे से खबरें है कि प्रशांत किशोर रालोसपा समेत अन्य छोटे दलों से बात कर महागठबंधन में अपना भविष्य तलाश रहे हैं।

New Delhi, Oct 19 : बिहार विधानसभा चुनाव घोषणा से डेढ साल पहले जदयू के पूर्व उपाध्यक्ष रहे प्रशांत किशोर ने बिहार की बात की थी, माना जा रहा था कि इस बार विधानसभा चुनाव में पीके बैकडोर की जगह फ्रंट पर आकर चुनाव लड़ेंगे, लेकिन ऐसा नहीं हो सका, खास बात ये है कि वह चुनाव तो नहीं लड़ रहे हैं, साथ ही बिल्कुल खामोश बैठे हैं, एक ओर जहां चुनाव को लेकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर नेता और दल अलग-अलग दावे तथा वादों के जरिये जनता के बीच जा रहे हैं, वहीं पीके ने इन चुवालों पर कोई ट्वीट तक नहीं किया है, उनका आखिरी ट्वीट जुलाई में कोरोना के संबंध में था।

काम में लगे हैं
दूसरी ओर पटना के राजनीतिक गलियारे से खबरें है कि प्रशांत किशोर रालोसपा समेत अन्य छोटे दलों से बात कर महागठबंधन में अपना भविष्य तलाश रहे हैं, वहीं जदयू का मानना है कि लोजपा के एनडीए के साथ नहीं आने के पीछे वजह प्रशांत किशोर ही हैं।

चिराग पासवान को पीके ने समझाया
अंग्रेजी अखबार द इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक पीके ने लोजपा अध्यक्ष चिराग पासवान को समझाया, कि ये राज्य का आखिरी विधानसभा चुनाव है, इसके बाद पुराने समाजवादी नेताओं की पीढी नेपथ्य में चली जाएगी, और ऐसे में उन्हें बड़ा रिस्क लेना चाहिये। हालांकि लोजपा प्रवक्ता अशरफ अंसारी ने इन दावों को बेकार बताते हुए खारिज किया है।

2025 का इंतजार कीजिए
पीके के बारे में कुछ लोगों का कहना है कि उनकी सफलता जीतने वाले को चुनना है, यूपी चुनाव में सपा-कांग्रेस को वो जीत नहीं दिला पाए, Nitish PK2 वहीं कइयों का मानना है कि पीके को खारिज ना करते हुए साल 2025 का इंतजार करना चाहिये, रिपोर्ट के मुताबिक पीके के एक करीबी ने कहा कि कोरोना की वजह से वह जमीनी स्तर पर नहीं उतरे, लेकिन डिजिटली बिहार की बात सबसे बड़ा पॉलिटिकल पेज है, जहां 20 लाख से ज्यादा फॉलोवर्स हैं।