इतिहास के अनसुलझे और रहस्यमयी सवाल, जिसका जवाब आज भी किसी के पास नहीं है, आइए जाने

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दोस्तों समूचा विश्व कई अनसुलझे रहस्यों से भरा पड़ा है जिनका पता लगाना आज भी किसी वैज्ञानिक के लिए कड़ी चुनौती से काम नहीं है,कुछ रहस्यों का पता लगाकर वैज्ञानिकों ने उस खोज को देश की सुरक्षा के मामले में डाल कर उसे सुरक्षित रखा है ताकि किसी अन्य को उस का पता न चल सके,कई देशो ने इन ऐतिहासिक चीज़ो को देश की धरोह बनाया तो किसी देश ने सम्पूर्ण सुरक्षा के साथ संग्रहीत किया है,दोस्तों आज हम ऐसे ही रहस्यों की बात करने वाले है

चरामा की एलियन नुमा शैल चित्र

छत्तीसगढ़ के बस्तर आदिवासी इलाके में चरामा गाँव के पास पुरातन गुफाए मिली है. जहा के पत्थरों पर दूसरे ग्रह के लोगों जैसे दिखने वाले चित्र पाये गये है. गुफाओ की खोज करने वाले पुरातत्ववादी कहते है कि, चित्रो में चेहरे अलग तरह से दिखते है और कुछ चित्र उड़न तश्तरी के भी है. इससे जुडी हुई एक कहानी गांववाले बताते है. जिसमे रोहेला नामक लोग उड़न तश्तरी से यहाँ आते थे और गांववालो का अपहरण करते थे. छत्तीसगढ़ पुरातत्व विभाग ने भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन और अमेरिका की अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) को इस मुहीम में मदद करने की मांग की है.

बिहार की सोन भंडार गुफाएं

बिहार की सोन भंडार गुफाएं एक बड़े पत्थर से बनायीं हुयी है. इस बारे में कहा जाता है कि, ये गुफाएं मगध राजा बिम्बिसार के ज़माने की है. लोगों का मानना है कि, बिम्बिसार राजा अपने खजाने को छुपाने के लिये इन गुफाओं का इस्तेमाल करता था. सोन भंडार का मतलब है ‘सोने का खजाना’. बताया जाता है कि, जब बिम्बिसार को उसके पुत्र अजातशत्रु ने कारागार में डाल दिया तब उसके आदेश से उसकी पत्नी ने राज्य का खजाना इन गुफाओं में छिपाया था. यहाँ पर मिली हुयी संखलिपि में लिखित शिलालेख है जिनसे शायद इस खजाने तक पहुँचने की चाबी मौजूद है. अंग्रेजों ने खजाने को हासिल करने के लिये दरवाजो पर तोप के गोले बरसाये थे जिनके निशान आज भी दिखते है पर उन्हें कुछ भी नहीं मिला थ

जयगढ़ किले का शाही खजाना


जयगढ़ का जैवाना किला दुनिया के सबसे बड़े पहियों वाली तोपो के लिये विख्यात तो है. पर इसके आलावा साजिश और खजानों की कहानियों के लिये भी प्रसिद्ध है. ऐसा कहा जाता है कि, अफगानिस्तान की जंग जीतने के बाद अकबर के रक्षा मंत्री मान सिंह ने युद्ध में जीता हुआ खजाना इसी किले में छुपा के रखा था. सन 1977 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने किले में खजाना और पानी की टंकिया ढूंढने के लिये एक मुहीम चलायी. पर इसमे कुछ भी नहीं पाया गया. इस मुहीम की पूरी कहानी महारानी गायत्री देवी द्वारा लिखी गयी ‘A Princess Remembers’ नामक किताब में पढ़ने को मिलता है.

नेताजी सुभाष चन्द्र बोस की मृत्यु

नेताजी सुभाष चन्द्र बोस की मृत्यु के बारे में असंख्य कहानियाँ प्रचलित है, जो आज भी एक रहस्य बनी हुई है. कोई नहीं जानता कि, तायपेई से टोकियो जाने वाले विमान में उनके साथ क्या हुआ. आजाद भारत का ये एक अनसुलझा सवाल है. उनके गायब होने के बाद ऐसा कहा जाता है कि, वो भारत वापस आये थे और उत्तर भारत में साधू के वेश में रहते थे. इस बात का कोई सबूत नहीं है पर कुछ लोगों का यह मानना है कि, उत्तर प्रदेश के फैजाबाद में रहने वाले साधू गुमनामी बाबा ही सुभाष चन्द्र बोस थे.