ये हैं वो 7 कर्मठ महिलाएं, जो डिलीवरी के कुछ ही दिनों बाद पहुंची काम पर

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वेदों पुराणों और आदि काल से अब तक हमेशा यह बात कही गई है कि महिलाओं से सर्वशक्ति और कोई नहीं होता है। ऐसे में इसकी असल बानगी हाल ही में कुछ महिलाओं ने पेश की है। मां बनना हर महिला की जिंदगी का बेहद हिस्सा होता है। जिसमें वह अपनी खुशी बयां नहीं कर पाती, ठीक उसी तरह अपना दर्द बयां नहीं कर पाती।

एक महिला को मां बनने के दौरान इतने दर्द होता है, जिसे डॉक्टरी जुंबा में बया करें तो यह शरीर की 20 हड्डियों के टूटने के बराबर होता है। ऐसे में आज हम आपको ऐसी 7 महिलाओं की कहानी सुनाएंगे, जिन्होंने खुद से ऊपर अपने फर्ज को रखा और बच्चे को जन्म देने के कुछ ही दिनों या महीनों बाद वह अपने कर्तव्य भूमि पर पहुंच गई।

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सौम्या पांडे

कर्तव्य निष्ठा की मिसाल पेश करने वाली इन महिलाओं की लिस्ट में हम सबसे पहला नाम सौम्या पांडे का लेना चाहेंगे। सौम्या पांडे हाल-फिलहाल चर्चाओं में थी। सौम्या पांडे की तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है। इस तस्वीर में वह अपने सरकारी दफ्तर में बैठी हैं और उनकी गोद में उनकी 22 दिन की बच्ची। बता दे यह तस्वीर प्रयागराज की रहने वाली सौम्या पांडे की है, जिन्होंने साल 2017 बैच की आईएएस अधिकारी के तौर पर अपना कार्यभार संभाला था।

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अर्चना जयंत

पुलिस महकमे में काम कर रहे कर्मचारियों की जितनी तारीफ की जाए उतनी कम है। ऐसे में साल 2018 अक्टूबर में एक तस्वीर सोशल मीडिया पर काफी वायरल हुई थी। इस तस्वीर में एक महिला पुलिसकर्मी जिनका नाम अर्चना जयंत है वह अपने दफ्तर में अपनी 6 महीने की बच्ची के साथ काम करती नजर आई थी। अर्चना जयंत झांसी में बतौर महिला कॉन्स्टेबल के तौर पर काम करती है। अर्चना की यह तस्वीर सोशल मीडिया पर काफी वायरल हुई थी और लोगों ने उनकी कर्तव्यनिष्ठा को नमन भी किया था।

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कमिश्नर जी सृजन

हाल फिलहाल कोरोना की मार झेल रहे देशों में भारत का नाम भी शामिल है। ऐसे में ग्रेटर विशाखापट्टनम से एक तस्वीर सामने आई थी, जिसमें विशाखापट्टनम में काम करने वाली नगर निगम की कमिश्नर जी सृजन अपने बच्चे के साथ काम पर लौटी थी। उनकी इस तस्वीर को सोशल मीडिया पर लोगों ने काफी सराहा था। साथ ही कोरोना वॉरियर्स के तौर पर काम पर लौटी कमीश्नर सृजन को लोगों ने तहे दिल से नमन भी किया था।

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रूपा प्रवीण राव

कर्तव्य की मिसाल पेश करने वाली इन महिलाओं में एक नर्स का नाम भी शामिल है। इनका नाम है रूपा प्रवीण राव है। रूपा कर्नाटक के शिवमोग्गा के हॉस्पिटल में बतौर नर्स काम करती है। मई में जब कोरोना का कहर अपने चरम पर था उस समय अपनी और अपने बच्चे की जान की परवाह किए बगैर वह अपनी कर्तव्यनिष्ठा का प्रमाण दे रही थी।

इस दौरान रूपा 9 महीने गर्भ से थी। इसके बावजूद वह कोरोना मरीजों की सेवा में 6-6 घंटे काम किया करती थी। उनकी यह तस्वीर सोशल मीडिया पर काफी वायरल हुई थी। इसके अलावा कर्नाटक सीएम येदुरप्पा ने भी उनकी तारीफ की थी।

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शकुंतला

ऐसा नहीं है कि इस लिस्ट में सिर्फ बड़े ओहदे की वरीयर्स महिलाओं के ही नाम है बल्कि इसलिए इसमें एक ऐसी महिला का नाम भी है, जो ना तो कोई बड़ी अधिकारी है और ना ही कोई पुलिस महकमे में काम करने वाली पुलिस ऑफिसर है। यह महिला वो थी जो अपने गर्भ काल के पूरा होने के बाद भी अपने बच्चों की भूख को देखते हुए हजार किलोमीटर की पैदल यात्रा पर अपने गांव निकल पड़ी थी।

यह बात सभी जानते हैं कि कोरोना काल में लाखो हजारों प्रवासी लोगों ने पैदल यात्रा की थी। कोरोना काल में काम कारोबार पूरी तरह से बंद हो जाने के कारण प्रवासी मजदूरों ने कई किलोमीटर की यात्रा पैदल ही की थी। शकुंतला प्रवासी मजदूरों की इसी पैदल यात्रा का एक हिस्सा थी। उस दौरान जब शकुंतला का नाम खबरों में आया था तो शकुंतला ने एक लाइन में अपने दर्द को बयां किया था। उन्होंने कहा था कि एक गरीब इंसान कभी मौत से नहीं डरता, वह डरता है तो सिर्फ भूख से…

इस दौरान शकुंतला ने बीच रास्ते में अपने बच्चे को जन्म दिया और वह खबरों का केंद्र बन गई, जिसके बाद पुलिस महकमे ने उनकी मदद की और उन्हें ट्रक में बैठा कर उनके गांव सतना छोड़ा। बता दे शकुंतला इस पैदल यात्रा में अपने दो मासूम बच्चों और पति के साथ निकली थी।

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ब्रियाना हिल

इस लिस्ट में विदेशी महिलाओं के नाम भी शुमार है। इसमें एक नाम दिया ब्रियाना हिल का, जो कि अमेरिका में इलिनॉइस में रहती है। दरअसल उन्होंने हाल फिलहाल ही एक एग्जाम की परीक्षा के लिए फॉर्म भरा था, जिस की परीक्षा कोरोना के चलते आगे बढ़ा दी गई थी। ऐसे में 38 हफ्ते की गर्भवती इलिनॉइस परीक्षा केंद्र पहुंची। इस दौरान वह परीक्षा दे ही रही थी कि अचानक उन्हें एहसास हुआ कि उनका मां बनने का समय आ गया है।

वह जैसे ही खड़ी हुई उन्होंने तुरंत हॉल के बाहर बैठे अपने पति और अपनी मां को आवाज लगाई। इसके बाद उन्हें तत्काल हॉस्पिटल ले जाया गया। वह अब तक अपना आधा पेपर पूरा कर चुकी थी और आधा बाकी था। ऐसे में जब उन्हें हॉस्पिटल पहुंचाया गया तो उन्होंने अपना आधा बचा हुआ पेपर हॉस्पिटल बेड से ही पूरा किया।

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ट्रिसा ओल्सन

इस लिस्ट में अगला नाम भी अमेरिका से ही है, यह नाम है ट्रिसा ओल्सन का, जो कि अमेरिका के रॉक स्प्रिंग्स की रहने वाली है। ट्रिसा ओल्सन साल 2018 में 31 साल की थी, जब उन्होंने अपने बेटे को जन्म दिया। इसके बाद अपने बेटे की डिलीवरी के 3 हफ्ते बाद ही वो गाड़ी चलाती हुई नजर आई और उनकी तस्वीर मीडिया पर काफी वायरल हो गई। इस दौरान जब उनसे पूछा गया कि उन्हें काम पर जाने की इतनी जल्दी क्यों थी, तो उन्होंने जवाब में कहा कि घर के सारे बिलों का भुगतान अपने आप से नहीं होगा, इसके लिए कमाना पड़ेगा। दरअसल अमेरिका जैसे विकसित देश में भी ट्रिसा ओल्सन को मेटरनिटी लीव नहीं दी गई थी, जिसके चलते उन्हें 3 महीने हफ्ते बाद ही काम पर लौटना पड़ा।

इन महिलाओं की कहानी अपने आप में दुनिया भर की महिलाओं के लिए एक ऐसी मिसाल है, जिसे शब्दों में बयां कर पाना बेहद कठिन है। कुछ महिलाएं मजबूरी में काम पर लौटी तो कुछ कर्मनिष्ठा के चलते, लेकिन साहस सभी का एक बराबर था। नवजात बच्चे को लेकर काम पर लौटना अपने आप में एक बड़ी मिसाल है। ऐसे में इन सभी महिलाओं को एक नमन द हिंदुस्तान टाइम्स की टीम की ओर से भी समर्पित है।