भारत ने ऑर्डर किया है जो S-400 डिफेंस सिस्टम, रूस उसे बना रहा और ज्यादा घातक

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भारत ने अमेरिकी प्रेसिडेंट ट्रम्प की धमकी के बाद भी रूस के साथ पावरफुल मिसाइल सिस्टम S-400 की अहम डील की है. यह डील 500 करोड़ डॉलर की है. अमेरिका ने भारत को आगाह किया था कि अगर डील होती है तो भारत को अमेरिकी प्रतिबंधों का सामना करना पड़ सकता है. लेकिन भारत ने इसे नजरअंदाज कर आज डील पूरी की ली. आखिर भारत के लिए क्यों अहम है यह डील, पढ़ें इस बारे में रिपोर्ट….

शीत युद्ध के दौरान अमेरिका और सोवियत संघ के बीच हथियारों की होड़ लगी थी जो आज भी जारी है. इस होड़ में जब सोवियत संघ, अमेरिका जैसे मिसाइल नहीं बना सका तो सोवियत संघ ने फैसला किया कि अगर बेहतर मिसाइल नहीं बनाए जा सकते हैं तो फिर इन मिसाइलों को गिराने वाले मिसाइल बनाए जाएं.

रूस जब सोवियत संघ का हिस्सा था तब 1967 में S-200 अंगारा नाम की वायु रक्षा प्रणाली विकसित की थी. यह S सीरीज की पहली मिसाइल थी. यह मिसाइल किसी भी अत्याधुनिक विमान या मिसाइल को मार गिराने में सक्षम थी. इसकी तकनीकी दक्षता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि यह सिस्टम आज भी सेवा में है. S-400 मौजूदा वक्त की सबसे एडवांस एयर डिफेंस सिस्टम है. रूस अब S-500 के विकास में लगा हुआ है और जिसे 2020 तक तैनात किए जा सकते हैं.

S-400 एयर डिफेंस सिस्टम संभावित मिसाइल की जानकारी देता है और जरुरत पड़ने पर यह एंटी मिसाइल दागकर दूसरी मिसाइल को मार गिराता है. रूस ने अभी तक यह मिसाइल सिर्फ चीन को बेची है.S-400 को 1990 में अल्मज सेंट्रल डिजाइन ब्यूरो ने विकसित किया गया था. 12 फरवरी 1999 को इसकी पहली टेस्टिंग रूस के कपुस्तिन यार में की गई जो सफल रही थी. इसके बाद 2001 में इसे रूसी सेना में तैनात किया गया और 2007 में रूसी सशस्त्र बालों ने इस्तेमाल करना शुरू किया. S-400 एक मल्टीफंक्शनल सिस्टम पर आधारित है जो अलग-अलग स्पीड से मिसाइल को छोड़ने की क्षमता को रखता है जजो क्रूज और बैलेस्टिक मिसाइल को भी निशाना बना सकता है. S-400 को दुनिया का सबसे बेहतर एयर डिफेंस सिस्टम माना जाता है.

S-400 डिफेंस में लगे रडार 300 किलोमीटर तक के टारगेट को ट्रैक कर सकते हैं. डिफेंस एक्सपर्ट्स का मानना है कि इसकी मदद से भारत 600 किलोमीटर तक की रेंज में ट्रैकिंग कर सकता है.इस सिस्टम में मौजूद सुपरसोनिक और हाइपरसोनिक मिसाइलें 30 किलोमीटर की उंचाई और 400 किलोमीटर तक के लक्ष्य को निशाना बनाया जा सकता है. S-400 से विमान, क्रूज, बैलेस्टिक मिसाइल के साथ जमीनी टारगेट को भी रौंदा जा सकता है. यह मिसाइल एक बार में 400 किलोमीटर की रेंज में एक साथ 36 टारगेट को निशाना बना सकता है.

S-400 मिसाइल में करीब 12 लॉन्चर होते हैं जो अलग-अलग क्षमताओं से लैस होते हैं. इससे तीन तरह की मिसाइल को एक साथ निशाना बनाया जा सकता है. पुराने एस सीरिज के मिसाइल के मुकाबले यह करीब दोगुना ताकतवर है.

भारत और रूस के बीच हुए S-400 डील के बारे में जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी के इंटरनेशनल रिलेशन डिपार्टमेंट के एसोसिएट प्रोफेसर राजन कुमार बताते हैं, “S-400 डील से भारतीय एयर फोर्स को बूस्ट मिलेगा. यह डील भारत के लिए बहुत महत्वपूर्ण है. चीन के पास भी S-400 मिसाइल हैं लेकिन इससे बेहतर मिसाइल चीन के पास भी नहीं है. किसी कारणवश यदि भारत को दो फ्रंट पर युद्ध लड़ना पड़े तो यह भारत के लिए यह महत्वपूर्ण है कि इसे स्ट्रेटेजिक लोकेशन पर इसे रखा जा सकता है. इसमें एक साथ कई लेयर से मिसाइल फायर करते हैं जिसके कारण इसकी क्षमता काफी बढ़ जाती है,”
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