रावण से बदला लेने के लिए आतुर थी शूपर्णखा, लंकेश के मौत के बाद हो गई थी ऐसी हालत!

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हिंदू धर्म के सबसे महान ग्रंथों में से एक रामायण से भला कौन परिचित नहीं होगा, यह ग्रंथ हिंदू धर्म का सबसे आदर्श और सबसे जाना माना ग्रंथ है। वैसे तो रामायण में भगवान राम, माता सीता तथा इनके कई महान भक्त जैसे लक्ष्मण, हनुमान, सुग्रीव, सबरी जैसे किरदार हैं, मगर इन सबके अलावा एक अहम किरादर जो है वो शूर्पणखा है। माना जाता है कि शूर्पणखा की वजह से ही राम-रावण युद्ध हुआ, क्योंकि उस युद्ध की शुरूआत लक्ष्मण द्वारा शूर्पणखा के नाक काटे जाने से ही हुई थी। खैर, शूर्पणखा के बारे में बहुत कम जानकारी मिल पाती है। आइये जानते हैं, शूर्पणखा से जुड़ी कुछ अनकही और कुछ अनसुनी बातें…

कैसी थी शूर्पणखा की शारीरिक बनावट?

चूंकि शूर्पणखा राक्षस कुल से थी, इसलिए उसके पास मायावी शक्ति थी और इसी कारण वो अपना भेष बदल लेती थी। शूर्पणखा ना सिर्फ अपना रंग रूप और शारीरिक बनावट बदल लेने में माहिर थी बल्कि वो अपनी आवाज भी बदल लेती थी। वाल्मिकी रामायण के अनुसार शूर्पणखा का रंग-रूप और बनावट काफी डरावना था।

पति की मौत के बाद ऐसी हो गई थी शूर्पणखा की जिंदगी

शूर्पणखा के पति का नाम विद्युतजिह्वा था, जो राजा कालेकय का सेनापति था। शूर्पणखा और विद्युतजिह्वा के बीच अगाध प्रेम था। मगर एक बार रावण और कालकेय के बीच युद्ध हुआ, जिसमें विद्युतजिह्वा को रावण ने मार डाला। इससे शूर्पणखा पूरी तरह से बिखर गईं और पति की मौत के बाद उसने अपनी पूरी जिंदगी लंका और दक्षिण भारत के जंगलों में बिताई। शूर्पणखा कुछ समय तक अपने भाईयों खर और दूषण के साथ भी रही थी।

शूर्पणखा ने इस वजह से कराई राम और रावण के बीच शत्रुता

वाल्मिकी और तुलसीदास दोनों ही रामायण में ये उल्लिखित है कि शूर्पणखा, राम के रूप पर मोहित हो गई थी। मगर भगवान राम पत्नीव्रता थे, इसलिए उन्होंने शूर्पणखा को लक्ष्मण के पास जाने को कहा। लक्ष्मण ने भी शूर्पणखा को इंकार कर दिया, इसके बाद शूर्पणखा गुस्से में आकर सीता पर हमला करने की कोशिश करती है, परिणामस्वरूप लक्ष्मण शूर्पणखा का नाक काट देते  हैं। इसके बाद राम-रावण युद्ध की शुरूआत होती है।

हालांकि मान्यता ये भी है कि शूर्पणखा अपने पति विद्युतजिह्वा की मौत से पूरी तरह टूट गई थी और उसने उसी दिन ठान लिया था कि रावण के कुल का नाश करना है। मगर शूर्पणखा रावण के ही दरबार में रही, क्योंकि शूर्पणखा रावण की शक्तियों को भलि भांति जानती थी। जब उसने भगवान राम के पराक्रम और शक्तियों के बारे में सुना तो उसकी बदला लेने की इच्छा फिर से जाग उठी और उसने जानबूझकर राम और लक्ष्मण से दुश्मनी मोल ली और रावण से इस बारे में बताया। इसके बाद भगवान राम और रावण की दुश्मनी हुई और रावण ने माता सीता का अपहरण किया, मगर अंत में भगवान राम के हाथों रावण की मृत्यु हुई।

जानिए कैसे हुआ शूर्पणखा का अंत

कहा जाता है कि रावण की मौत के बाद शूर्पणखा, विभीषण के राज में लंका में ही रही थीं, मगर सालों बाद ही शूर्पणखा अपनी सौतेली बहन कुंबिनी के साथ समुद्र किनारे मृत अवस्था में पाई गई थीं। इस तरह से शूर्पणखा का भी अंत हुआ। वैसे ये कहा जाना गलत नहीं होगा कि शूर्पणखा न होती तो रावण जैसे अहंकारी राक्षस का अंत भी न होता।