कहानी उस जंग की जिसमे पाकिस्तान ने भारत के सामने हथियार डाल दिए थे और एक आजाद मुल्क पैदा हुआ

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वो जंग जिसमे पाकिस्तान की आधी नेवी ख़त्म हो गई वो ऑपरेशन जिसके चलते दिसंबर को नेवी डे मनाया जाता है. दरअसल, इस बीच इंदिरा गाँधी देश में नहीं थी जब उनको पता चला भारत पर पाकिस्तान के जहाज़ों ने हमला कर दिया है वह जल्द से जल्द दिल्ली आईं और आधी रात को कैबिनेट नेताओं और सेना के अफसरों के साथ मीटिंग की.

आर्मी के रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल एस के सिन्हा ने बताया कि पाकिस्तान ने बमबारी शुरू कर दी थी मगर हमने भी प्लान बना रखा था. दरअसल, इस युद्ध से सात महीने पहले उन्होंने एक कैबिनेट मीटिंग बुलाई थी, जिसमे जनरल सैम मानेक शॉ भी मौजूद थे और वहीँ इंदिरा को एक परेशानी ओर थी क्यूंकि, बांग्लादेश से लाखों की तादात में भारतीय आ रहे थे.

तब इंदिरा का कहना था कि भले ही हमे युद्ध क्यों ना करना पड़ जाए मगर हमे इसे रोकना होगा लेकिन मानेक शॉ उनकी इस बात से सहमत नहीं थे. उन्होंने बताया कि वायुसेना हमारी सहायता नहीं कर पाएगी क्यूंकि, मानसून आ रहा है जिसके चलते सभी नदियां…समुन्दर बन जाती हैं. ऐसे में एक किनारे से दूसरा किनारा तक नहीं दिखता है. हम युद्ध करेंगे तो भी हार जाएंगे इसलिए हम तैयार नहीं हैं हमे थोड़े वक़्त की ज़रुरत है.

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मगर इंदिरा युद्ध को ज़्यादा समय तक टाल नहीं सकती थीं क्यूंकि, उन्होंने बांग्लादेश को फौज के ज़ुल्म से आज़ाद कराने का वादा जो किया था.

इसी बीच पाकिस्तान ने युद्ध की शुरुआत कर दी, जिसके चलते इंदिरा ने भारतीय सेना को ढ़ाका की तरफ जाने का आदेश दिया और एयरफोर्स ने भी पाकिस्तानी अड्डों पर बम बरसाना शुरू किया और इंदिरा ने कहा "हम लड़ ज़रूर रहे हैं क्यूंकि, सभी देशों को स्वतंत्र होने का अधिकार है और अगर लोगों की मांगें सही हो तो उन्हें भी अपनी आवाज़ उठाने का अधिकार है. हमे विश्वास है जब आज़ादी की आवाज़ उठती है तो न्याय और भाईचारे की आवाज़ भी ज़रूर उठती है. हमेशा उसी की विजय होती है”.

इस लड़ाई में भर्ती सेना ने ईस्ट पाकिस्तान पर कब्ज़ा करना शुरू किया तब पाकिस्तान के राष्ट्रपति याहया खान ने भारतीय सेना को वेस्ट बॉर्डर पर घेरने की तैयारी शुरू कर दी क्यूंकि उनके मुताबिक़ भारतीय सेना का ध्यान ईस्ट बॉर्डर पर ज़्यादा था इसलिए उन्होंने उत्तरलाई एयर बेस को अपना निशाना बनाया मगर पाकिस्तानी ब्रिगेडियर तारिक मीर को भारतीय सेना और एयर फ़ोर्स की तरह से करारा जवाब मिला क्यूंकि, इंदिरा ने पहले ही भारत के ऊपर उड़ रहे पाकिस्तान के एयरक्राफ्ट पर बैन लगा दिया था, जिससे वेस्टर्न पाकिस्तान ईस्टर्न पाकिस्तान से कट गया था.

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इस दौरान इंदिरा ने एक स्पीच दी और कहा “हम समझते हैं कि हम सिर्फ भारत नहीं बल्की, अपने उसूलों के लिए लड़ रहे हैं. हम जो सारी दुनिया में दबे हैं या फिर दुनिया से दबाएं गए हैं उसके लिए लड़ रहे हैं. भले ही वह सभी इसे ना पहचान सकें या फिर अपनी इस गुलामी को ना पहचान पा रहे हो मगर हम पहचान चुके हैं कि अगर हम आज नहीं लड़े तो यही धक्का हमे बार-बार लगेगा”.

इतना ही नहीं 4 दिसंबर को भारतीय नौसेना की तरफ से भी ऑपरेशन ट्राई टेन्ड शुरू किया गया जिसके चलते भारतीय सेना ने बंगाल की खाड़ी में पूर्वी पाकिस्तान और पश्चिमी पाकिस्तान का अरब सागर का मोर्चा संभाला हुआ था और 3-4 दिसंबर की रात को ही कराची पोर्ट पर हमला कर दिया गया और पाकिस्तान के खैबर को भी डुबो दिया गया. इसी के साथ पाकिस्तान को बहुत बुरा नुक्सान हुआ, जिसमे मरने और जख्मी होने वालों की संख्या लगभग 700 से भी ज़्यादा थी.`

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ऑपरेशन ट्राइटेंड के बाद ऑपरेशन पायथन हुआ जिसमे भारत के मिसाइल जहाज़ों ने कराची के बंदरगाह पर फिर से हमला कर दिया था. इस लड़ाई में पाकिस्तान के तीन मर्चेंट शिप डूब गए थे और रिज़र्व फ्यूल टैंक भी पूरी तरह से नष्ट हो गए थे.

कराची पोर्ट कई दिनों तक जलता ही गया… अगर पूर्वी तट की बात करें तो आईएनएस विक्रांत की मदद से सी हॉक फाइटर बॉम्बर में पूर्वी पाकिस्तान के कई इलाकों में हमला किया, जिसके जवाब में पाकिस्तान में सबमरीन गाजी भेजा जो विशाखापट्नम कोस्ट के पास डूब गया. भारत के आईएनएस राजपूत ने इसे ख़त्म कर दिया था. इसमें लगभग 93 सैनिक थे. 9 दिसंबर को भारत को तगड़ा झटका तब लगा जब पाकिस्तानी सबमरीन ने आईएनएस खुकरी को अरब सागर में डुबो दिया इसमें भारत के लगभग 18 अफसर और 176 सेलर मारे गए थे.`

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मगर भारत को एक सुकून भी था क्यूंकि, इस युद्ध में पाकिस्तान की सात गनबोट, एक माईन्स स्वीपर, एक सबमरीन, दो डिस्ट्रॉयर, तीन क्राफ्ट, अठारह कार्गो को तो नुक्सान पहुंचा ही मगर साथ ही तीन मर्चेंट नेवी अनवर बक्श, पसनी , मधुमथी पर भी कब्ज़ा कर लिया गया. देखते ही देखते पाकिस्तान ने अपनी आधी नौसेना को युद्ध में खो डाला था.