यहां बेमानी है लव जिहाद, गांव के मेले में युवक अपनी मर्जी से चुनते हैं जीवनसाथी!

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शहरों में थीम मैरेज या महंगे होते शादी समारोहों के दौर में बैगा आदिवासियों का ये रिवाज दूसरों के लिये नजीर की तरह है।

New Delhi, Dec 06 : ऐसे समय में जब देश में लव जिहाद को लेकर जबरदस्त चर्चा हो रही है, छत्तीसगढ के कवर्धा वनांचल में रहने वाले बैगाओं की अनोखी परंपरा आज भी कायम है, इस आदिवासी समाज में युवाओं को अपना जीवन साथी अपनी मर्जी से चुनने की स्वतंत्रता दी जाती है, जी हां, बैगा समाज द्वारा मेला मंडई का आयोजन किया जाता है, जिसमें समाज के शादी योग्य युवक-युवती शामिल होते हैं, मेले में पूरे उत्साह के साथ लोग पारंपरिक नृत्य पर थिरकते हैं, जिसके बाद युवा अपनी पसंद से जीवनसाथी चुनते हैं, मेले में अलग-अलग गांव के बैगा परिवार शामिल होते हैं, एक गांव के लड़के वाले तो दूसरे गांव के लड़की वाले शिरकत करते हैं, युवक-युवतियों के द्वारा अपना जीवन साथी पसंद करने के बाद बैगा रीति-रिवाज से उनकी शादी करा दी जाती है।

खास आयोजन
पारंपरिक परिधानों में कर्मा नृत्य के साथ होने वाला ये खास आयोजन बैगा आदिवासी समुदाय की पहचान है, खासकर शादी करने की चाहत लेकर आने वाले युवक-युवतियों को इस मेले का इंतजार रहता है, ताकि वो इसमें अपने लिये जीवनसाथी चुन सकें।

खास तैयारी
स्थानीय बैगा रामस्वरुप बताते हैं कि इस मेले में आकर ही युवा अपना जीवन साथी चुनते हैं, जिसके साथ वो पूरा जीवन बिताते हैं, उन्होने बताया कि इस मेले के आयोजन की जानकारी समाज के लोगों को पहले ही दे दी जाती है, ताकि सभी तैयारी के साथ आ सके, जिस गांव में मेला लगता है वहां के लोग मेहमानों के खाने-पीने का इंतजाम करते हैं।

आदिवासियो का रिवाज
शहरों में थीम मैरेज या महंगे होते शादी समारोहों के दौर में बैगा आदिवासियों का ये रिवाज दूसरों के लिये नजीर की तरह है, कहने को तो ये बैगा समुदाय पिछड़ी जनजाति वर्ग में आते हैं, लेकिन तथाकथित सभ्य समाज के लोगों के लिये ऐसी परंपराएं उदाहरण है, जहां शहरों में शादी के लिये लाखों रुपये खर्च किये जाते हैं, भोजन की बर्बादी होती है, ऐसे में बैगा समाज के लोग गांव में ही परंपरा निभाते हैं, आपस में चंदा कर भोजन की सामाग्री जुटाकर कुछ लोगों के बीच में शादी कर लेते हैं।