घर में है पुराना-खराब मोबाइल या कंप्‍यूटर-लैपटॉप तो पढ़ें ये काम की खबर

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E Waste Management क्‍या आप अपने घर में जमा पुराने मोबाइल या कंप्‍यूटर-लैपटॉप से परेशान हैं, तो यह खबर आपके काम की है। रांची नगर निगम ने इसके लिए पहल की है। ई-कचरा व खतरनाक घरेलू कचरा एकत्र करने के लिए रांची में पांच जगह केंद्र बनाया है। इन केंद्रों पर कचरे में से खतरनाक कचरा अलग कर यहां रखा जाएगा। रांची नगर निगम के उप नगर आयुक्त ने बताया कि ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमावली के अनुसार ठोस अपशिष्ट का पृथक्करण यानी उन्हें अलग करना जरूरी है।

इन्हें गीला कचरा, सूखा कचरा और घरेलू खतरनाक कचरा में से अलग किया जाना है। उन्होंने बताया कि खतरनाक कचरे में कॉस्मेटिक चीजें हैं। इनमें तेल, बैटरी, बल्ब आदि आते हैं। इसी तरह इन खतरनाक कचरा में ई-वेस्ट भी आता है। जैसे लैपटॉप, प्रिंटर, रेडियो, कार्डलेस, फोन रिसीवर, डिजिटल कैमरा, रिकॉर्ड प्लेयर, डिजिटल राउटर्स, ड्राई सेल बैटरी, स्कैनर्स, इलेक्ट्रिक टाइपराइटर्स, इलेक्ट्रॉनिक स्क्रैप, स्पीकर, इलेक्ट्रॉनिक, टेप रिकॉर्डर ‌आदि। निगम ने ई कचरे काे अलग करने के लिए यह प्रयास शुरू किया है। इन केंद्रों पर इलेक्‍ट्रॉनिक कचरे काे अलग किया जाएगा।

बता दें कि संयुक्त राष्ट्र विश्वविद्यालय की एक रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2020 से 2030 की अवधि के दौरान वैश्विक स्‍तर पर ई-कचरे में तकरीबन 38 फीसद तक की बढ़ोतरी होगी। इस रिपोर्ट के अनुसार 2019 में एशिया में सर्वाधिक लगभग 24.9 मीट्रिक टन ई-कचरा उत्पन्न हुआ है। इसी वर्ष उत्पन्न कुल ई-कचरे के 18 फीसद से भी कम हिस्से का पुनर्नवीनीकरण किया जा सका। रिपोर्ट में बताया गया कि यदि इसका पुनर्नवीनीकरण किया जाता तो कम-से-कम 57 बिलियन डॉलर प्राप्त किया जा सकता था।

अब विश्‍व स्‍तर पर 78 देश हैं, जिन्होंने ई-कचरे से संबंधित कोई नीति या कानून अपनाया है। इसमें भारत भी शामिल है। देश में जैसे-जैसे तकनीक बढ़ रही है, उसी अनुपात में ई-कचरा भी बढ़ रहा है। इसका प्रमुख कारण मनुष्‍य की जीवन शैली में बदलाव आना है। इस कचरे से स्वास्थ्य और प्रदूषण संबंधी बड़ी समस्‍या है। ट्यूबलाइट, बल्ब जैसी चीजें जिन्हें हम रोज इस्तेमाल में लाते हैं, उनमें पारे जैसे कई प्रकार के विषैले पदार्थ पाए जाते हैं। यह बेकार हो जाने पर पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक साबित होते हैं।

ग्लोबल ई-वेस्ट मॉनिटर 2017 के अनुसार भारत प्रत्‍येक वर्ष लगभग 2 मिलियन टन ई-कचरा उत्पन्न करता है। ई-कचरा उत्पादक देशों में अमेरिका, चीन, जापान और जर्मनी के बाद भारत 5वें स्थान पर है। आंकड़ों के अनुसार भारत में ई-कचरे का पुनर्नवीनीकरण करने वाली कुल 312 अधिकृत कंपनियां हैं, जो प्रतिवर्ष 800 किलो टन ई-कचरे का पुनर्नवीनीकरण कर सकती हैं।